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Weak Ketu Signs: क्या करें क्या ना करें की हालत कर देता है केतु, मानसिक भ्रम से टूट जाता है जातक

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 21 Jan 2026 05:14 PM IST
सार

Kamjor Ketu Ke Lakshan: अशुभ केतु का प्रभाव अक्सर अचानक बदलावों के रूप में सामने आता है। मानसिक तनाव, रिश्तों में दूरी, आर्थिक अस्थिरता और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। आइए जानते हैं अशुभ केतु के प्रमुख लक्षणों और उनसे जुड़े प्रभावी उपायों के बारे में।

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कुंडली में खराब केतु के लक्षण - फोटो : Amar Ujala

Kamjor Ketu Ke Lakshan: वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। इनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता, लेकिन व्यक्ति के जीवन पर इनका प्रभाव बेहद गहरा और दूरगामी माना जाता है। केतु को मोक्ष, वैराग्य, अध्यात्म, रहस्य, पूर्व जन्म के कर्म और अचानक घटने वाली घटनाओं का प्रतीक माना गया है। यदि जन्म कुंडली में केतु मजबूत और शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, गहरी समझ और तीव्र बुद्धि प्रदान करता है। लेकिन यही केतु कमजोर या अशुभ हो जाता है, तो जीवन में असंतुलन और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।



अशुभ केतु का प्रभाव अक्सर अचानक बदलावों के रूप में सामने आता है। मानसिक तनाव, रिश्तों में दूरी, आर्थिक अस्थिरता और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। हालांकि केतु का मूल स्वभाव व्यक्ति को भौतिक मोह से निकालकर आत्मिक ज्ञान की ओर ले जाना है। यदि समय रहते इसके नकारात्मक संकेतों को समझ लिया जाए और सही उपाय किए जाएं, तो यही केतु जीवन को सही दिशा भी दिखा सकता है। आइए जानते हैं अशुभ केतु के प्रमुख लक्षणों और उनसे जुड़े प्रभावी उपायों के बारे में।

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मानसिक अस्थिरता और भ्रम - फोटो : Freepik.com

1. मानसिक अस्थिरता और भ्रम
खराब केतु का सबसे सामान्य प्रभाव मन पर पड़ता है। व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के बेचैन रहने लगता है। निर्णय लेने में कठिनाई, बार-बार विचार बदलना, अकारण भय और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। पढ़ाई या काम में मन नहीं लगता और छोटी-छोटी बातों पर उलझन बढ़ जाती है। जब केतु चंद्रमा के साथ पाप ग्रहों से प्रभावित हो या चतुर्थ व द्वादश भाव में कमजोर स्थिति में हो, तो मानसिक अशांति और बढ़ जाती है।

उपाय
प्रतिदिन गायत्री मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करें। चांदी की अंगूठी अनामिका उंगली में धारण करें। घर के दक्षिण-पश्चिम कोने को साफ और व्यवस्थित रखें।

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रिश्तों में दूरी और अलगाव - फोटो : adobe stock images

2. रिश्तों में दूरी और अलगाव
केतु का संबंध वैराग्य से है, लेकिन अशुभ होने पर यह रिश्तों में ठंडापन ले आता है। व्यक्ति को लगता है कि कोई उसे समझ नहीं पा रहा। परिवार और मित्रों से दूरी बन जाती है, वैवाहिक जीवन में भावनात्मक कमी आ सकती है और गलतफहमियों के कारण संबंध टूटने की स्थिति बनती है। जब केतु सप्तम, पंचम या एकादश भाव में पाप प्रभाव में हो या शुक्र-केतु और शनि-केतु की अशुभ युति बने, तो रिश्तों में तनाव बढ़ता है।

उपाय
हर गुरुवार जरूरतमंदों को पीली दाल का दान करें। विवाहित महिलाएं बुधवार को हरे वस्त्र पहनकर शिव-पार्वती की पूजा करें। समय-समय पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण करें।

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करियर और धन में अस्थिरता - फोटो : Adobe Stock

3. करियर और धन में अस्थिरता
अशुभ केतु करियर और आर्थिक स्थिति में अचानक उतार-चढ़ाव लाता है। नौकरी में रुकावट, प्रमोशन का रुक जाना, व्यवसाय में नुकसान या बार-बार काम बदलने की स्थिति बन सकती है। निवेश में घाटा और भविष्य को लेकर असमंजस बना रहता है। जब केतु दशम, द्वितीय या अष्टम भाव में कमजोर हो या राहु-केतु की दशा चल रही हो, तब यह प्रभाव और तीव्र हो जाता है।

उपाय
मंगलवार को हनुमान मंदिर में सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। शनिवार को काले तिल और उड़द की दाल दान करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा अवश्य करें।

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रहस्यमय स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Freepik.com

4. रहस्यमयी स्वास्थ्य समस्याएं
केतु से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं अक्सर ऐसी होती हैं जिनका कारण तुरंत समझ नहीं आता। सिर दर्द, आंखों की परेशानी, त्वचा रोग, बिना कारण होने वाला दर्द या अचानक चोट लगना इसके संकेत हो सकते हैं।
विशेष रूप से जब केतु षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल या शनि के साथ हो, तब दुर्घटना या सर्जरी की आशंका बढ़ जाती है।

उपाय
मंगलवार और शनिवार को मंदिर में नारियल अर्पित करें। प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। घर के मुख्य द्वार पर लाल रंग का तोरण लगाएं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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