Lal Kitab Ke Upay: आज के दौर में हम बच्चे के जन्म पर खुशियाँ तो मनाते हैं, लेकिन पुराने समय की वह परंपरा भूल गए हैं जहाँ जन्म लेते ही बच्चे के ग्रह-नक्षत्रों की शांति कराई जाती थी। लाल किताब के अनुसार, आपके घर में नन्हे मेहमान के कदम सिर्फ खुशियाँ ही नहीं, बल्कि अपने साथ एक अलग 'किस्मत' भी लाते हैं। कई बार माता-पिता की कुंडली अच्छी होने के बावजूद घर में परेशानियां बनी रहती हैं, जिसका कारण बच्चे की कुंडली के कुछ खास दोष हो सकते हैं। आइए जानते हैं वे 4 खतरनाक स्थितियां, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
Lal Kitab: क्या आपके बच्चे के ग्रह बिगाड़ रहे हैं आपकी किस्मत? जानें लाल किताब के ये चौंकाने वाले सूत्र
Lal Kitab: कई बार माता-पिता की कुंडली अच्छी होने के बावजूद घर में परेशानियां बनी रहती हैं, जिसका कारण बच्चे की कुंडली के कुछ खास दोष हो सकते हैं। आइए जानते हैं वे 4 खतरनाक स्थितियां, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
1. पिता की संपत्ति और मां की सेहत पर संकट
अगर बच्चे की कुंडली के 5वें घर में चंद्रमा बैठा हो और साथ ही 10वें या 12वें घर में पापी ग्रह मौजूद हों, तो यह सीधे तौर पर घर के बड़ों पर असर डालता है। इससे पिता का अपने भाइयों से प्रॉपर्टी को लेकर विवाद शुरू हो सकता है और माता को नसों की समस्या या नींद न आने की बीमारी घेर सकती है।
2. माता के लिए कष्टकारी योग
यदि चंद्रमा अष्टम (8 वें) भाव में हो और पहले घर में कोई क्रूर या पापी ग्रह बैठा हो, तो यह स्थिति माता के लिए बहुत कष्टकारी मानी जाती है। इससे उन्हें गंभीर शारीरिक या मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।
3. 'मंगल बद' यानी कोर्ट-कचहरी के चक्कर
अगर बच्चे की कुंडली में मंगल 'बद' (अशुभ) होकर 9वें या 10वें स्थान पर काबिज हो जाए, तो समझ लीजिए कि घर की शांति भंग होने वाली है। ऐसे में पैसे को लेकर भयंकर झगड़े होते हैं और बात अक्सर कोर्ट-कचहरी और पुलिस तक पहुँच जाती है।
4. गृह-कलह का चक्रव्यूह
चौथे घर में चंद्रमा के साथ जब दो शत्रु ग्रह एक साथ बैठ जाते हैं, तो घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। बिना वजह के क्लेश और आर्थिक तंगी परिवार को घेर लेती है।
आपकी अपनी कुंडली भी है जिम्मेदार: केतु और बुध का खेल
लाल किताब के ज्योतिष में केतु को बेटा और बुध को बेटी का प्रतीक माना गया है। संतान सुख और उनकी तरक्की के लिए अपनी
कुंडली के इन दो ग्रहों को चेक करना न भूलें
- संतान को कष्ट: यदि आपकी कुंडली में केतु या बुध खराब हैं, तो संतान की शिक्षा में रुकावट आएगी या उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहेंगी।
- पंचम भाव: कुंडली का पांचवां घर संतान का होता है। अगर यहां बैठे ग्रह अशुभ फल दे रहे हैं, तो तुरंत सुधार की जरूरत है।
डरने के बजाय लाल किताब के इन सरल और सटीक उपायों को अपनाएं
1. केतु की शुभता के लिए: भगवान गणेश की नियमित पूजा करें। रोज माथे पर केसर का तिलक लगाएं और किसी शुभ मुहूर्त में मंदिर में सफेद ध्वज (झंडा) दान करें।
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