Shani Vakri 2026: इस साल 27 जुलाई 2026 को शनि वक्री होने जा रहे हैं। वह मीन राशि में रहते हुए इस दिन रात 10 बजकर 21 मिनट पर वक्री अवस्था में आएंगे। ज्योतिषियों की मानें, तो शनि इस अवस्था में 11 दिसंबर 2026 की सुबह 3 बजकर 51 मिनट तक रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में शनि की वक्री चाल को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप से देखने को मिलता है। जहां कुछ लोगों को मेहनत का फल मिलने की संभावनाएं बन सकती हैं, वहीं कुछ जातकों के जीवन में चुनौतियां और उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, विशेष रूप से मेष, धनु और मीन राशि के जातकों को इस अवधि में अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। आइए जानते हैं इन राशियों पर शनि की वक्री चाल का क्या प्रभाव पड़ेगा और किन उपायों से इसके अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।
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Shani Vakri 2026: शनि मीन राशि में वक्री होने वाले हैं। यह शनि देव की उल्टी चाल मानी जाती हैं, जिससे कुछ राशि वालों को परेशानियां व काम को लेकर दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं।
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मेष, धनु और मीन राशि
ज्योतिषियों के अनुसार, शनि की वक्री चाल के दौरान मेष, धनु और मीन राशि के जातकों को कुछ महत्वपूर्ण मामलों में सावधानी बरतनी होगी। इस अवधि में मेहनत के अनुरूप परिणाम मिलने में देरी हो सकती है और कई कार्यों में बार-बार बाधाएं आने की संभावना रहेगी। घर और कार्यस्थल के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।
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नए लोगों से बातचीत करते समय संयम और धैर्य बनाए रखें। यदि किसी नए काम या योजना की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो शुरुआत में कुछ अड़चनें आ सकती हैं। इसलिए बिना जल्दबाजी के सोच-समझकर निर्णय लेना आपके लिए बेहतर रहेगा। रिश्तों में अनबन होने से मन परेशान भी हो सकता है, इसलिए वाणी का खास ध्यान रखें। किसी भी नए काम से पहले अनुभवियों से बात करना आपके लिए खास हो सकता है।
बचाव के उपाय
- शनिवार के दिन व्रत रखें और शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करें।
- शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें।
- काले तिल अर्पित करें और उनका दान भी करें।
- जरूरतमंद लोगों को काले वस्त्र, उड़द की दाल या लोहे की वस्तुओं का दान करें।
- नियमित रूप से शनि चालीसा का पाठ करें।
- हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इससे शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
- शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की भी पूजा करें और चौमुखी दीपक जलाएं।