भारत में विजयदशमी (दशहरा 2026) का त्योहार लोग धूमधाम से मनाते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। विजयदशमी के दिन पूरे देश में रावण का पुतला दहन किया जाता है। भगवान राम ने रावण का इसी दिन वध किया था और माता सीता को मुक्त कराया था। लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहे हैं जहां पर लोग रावण दहन नहीं करते हैं, बल्कि उसकी पूजा करते हैं। आज हम आपको अपनी खबर में कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताएंगे।
भारत में इन जगहों पर दशहरा के दिन नहीं जलाया जाता रावण, लोग मानते हैं विद्वान और करते हैं पूजा
देशभर में विजयदशमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह पर लोग रावण का पूतला जलाते हैं। दशहर का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लेकिन भारत में कुछ जगहें हैं, जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है।
मंदसौर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश का मंदसौर भी रावण से जुड़ी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। खासकर खानपुरा इलाके में नामदेव समुदाय के कुछ लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, रावण की पत्नी मंदोदरी का संबंध मंदसौर से था, जिसकी वजह से यहां रावण के प्रति सम्मान का भाव देखने को मिलता है। दशहरे पर रावण का पुतला जलाने की जगह कुछ लोग उसकी पूजा-अर्चना करते हैं। उनके लिए रावण दहन उत्सव नहीं, बल्कि एक सम्मानित परंपरा से जुड़ा विषय है।
गढ़चिरौली, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में गोंड समुदाय के कुछ वर्गों के लोग रावण को अलग नजरिए से देखते हैं। यहां पर प्रचलित कुछ मान्यताओं के मुताबिक, रावण को सम्मान के साथ याद किया जाता है और उन्हें अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। दशहरे के मौके पर लोग रावण दहन की परंपरा की जगह पूजा और प्रार्थना को महत्व देते हैं।
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विदिशा में दशानन को मिलता है विद्वान का सम्मान
मध्य प्रदेश के विदिशा के पास स्थित रावणग्राम भी रावण से जुड़ी अपनी अनोखी परंपरा के लिए चर्चा में रहता है। यहां पर रावण को समर्पित एक मंदिर है, जहां दशानन को एक विद्वान और पूजनीय व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, दशहरे के अवसर पर रावण की पूजा की जाती है। यहां रावण दहन की जगह लोग उसके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
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कर्नाटक का कोलार और मालवल्ली
कर्नाटक के कोलार और मालवल्ली जैसे इलाकों में भी कुछ स्थानीय परंपराओं में रावण को सम्मान मिलता है। इन मान्यताओं में रावण को सिर्फ रामायण के प्रतिपक्षी के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व और भगवान शिव के परम भक्त के तौर पर याद किया जाता है। हालांकि, यह परंपरा पूरे क्षेत्र में समान रूप से प्रचलित नहीं है।
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