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महीनों तक रहस्यमयी गुफा में बंद रह सकते हैं ये बच्चे, रोंगटे खड़े कर देने वाली है इनकी कहानी
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 03 Jul 2018 10:17 AM IST
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twelve chilldren in cave
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वाकई इन 12 लड़कों की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। एक रहस्यमयी गुफा में 10 दिन से बंद ये बच्चे उम्र में बेहद छोटे हैं। मगर इनका अदम्य साहस किसी युवा को भी पछाड़ सकता है।
children with coach
थाईलैंड की गुफा में नौ दिन तक लापता रहे 12 लड़के और उनके फुटबॉल कोच को तलाश लिया गया है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती इन बच्चों को गुफा से बाहर निकालने की है। चियंग राय स्थित टैम लूंग गुफा में चलाए गए तलाशी अभियान की जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि 'सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन गुफा में पानी का स्तर बढ़ रहा है और कीचड़ की वजह से उन तक पहुंच मुश्किल बनी हुई है।' बचावकार्य में लगी थाईलैंड की सेना का कहना है कि गुफा से बाहर निकलने के लिए इन बच्चों को तैराकी सीखनी होगी या फिर उन्हें बाढ़ के पानी के उतर जाने तक इंतजार करना होगा जिसमें महीनों भी लग सकते हैं। लगातार बढ़ता जलस्तर बचावकार्य में लगे कर्मचारियों के लिए चुनौती बना हुआ है। बचावकर्मी बच्चों के लिए खाने और दवाओं की व्यवस्था कर रहे हैं। सेना के अनुसार बच्चों के लिए ऐसा खाना जुटाया जा रहा है जो कम से कम चार महीने तक चल सके।
टैम लूंग गुफा बाढ़ के समय हमेशा पानी से भर जाती है और बाढ़ का पानी सितंबर या अक्टूबर के महीने तक रहता है। गुफा में भरे पानी को पंप के जरिए बाहर निकालने की कोशिशें भी की जा रही हैं, लेकिन इसमें अधिक सफलता नहीं मिल रही है। गुफा में फंसे बच्चों को सोमवार को तलाश लिया गया था। उनके पास जब ब्रितानी गोताखोर पहुंचे तो उन्होंने शुक्रिया अदा करने के बाद सबसे पहले यही पूछा कि 'हम बाहर कब निकलेंगे'। गोताखोरों ने उन्हें बताया कि 'आज नहीं'। फिर उन्होंने पूछा कि 'आज कौन सा दिन है', इस पर गोताखोरों ने कहा 'सोमवार, आप यहां दस दिन से हो, आप बहुत मजबूत हैं, बहुत मजबूत'।
टैम लूंग गुफा बाढ़ के समय हमेशा पानी से भर जाती है और बाढ़ का पानी सितंबर या अक्टूबर के महीने तक रहता है। गुफा में भरे पानी को पंप के जरिए बाहर निकालने की कोशिशें भी की जा रही हैं, लेकिन इसमें अधिक सफलता नहीं मिल रही है। गुफा में फंसे बच्चों को सोमवार को तलाश लिया गया था। उनके पास जब ब्रितानी गोताखोर पहुंचे तो उन्होंने शुक्रिया अदा करने के बाद सबसे पहले यही पूछा कि 'हम बाहर कब निकलेंगे'। गोताखोरों ने उन्हें बताया कि 'आज नहीं'। फिर उन्होंने पूछा कि 'आज कौन सा दिन है', इस पर गोताखोरों ने कहा 'सोमवार, आप यहां दस दिन से हो, आप बहुत मजबूत हैं, बहुत मजबूत'।
rescue operation
देश भर में चिंता
गोताखोरों के बच्चों के पास पहुंचने का वीडियो थाईलैंड नेवी सील ने जारी किया है। गुफा में लापता हुए 12 लड़कों और उनके कोच को लेकर पूरे देश में चिंता का माहौल था। इन सभी के सुरक्षित होने की खबर उनके परिजनों के लिए खुश होने की वजह लेकर आई है। चियंग राय के गवर्नर नारोंग्सक ओसोटानकोर्न ने बताया कि खोजी अभियान में शामिल नौसेना के विशेष दल ने इनकी तलाश की। जब उनके जिंदा होने की खबर बाहर आई तो गुफा के बाहर मौजूद एक बच्चे की मां ने कहा, "आज का दिन सबसे अच्छा है।
मैं कब से अपने बेटे का इंतजार कर रही हूं। मुझे लग रहा था कि उसके जिंदा होने की संभावना 50 फीसदी ही है। अब मैं बहुत उत्साहित हूं। जब वो बाहर आएगा तो सबसे पहले मैं उसे गले लगाउंगी। मैं सबका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं।" बचावकर्मियों के अनुसार गुफा में फंसे बच्चों और उनके कोच ने जमीन के भीतर कोई ऐसी जगह तलाश ली थी जिससे वे बाढ़ के पानी की चपेट में आने से बच गए। इस घटना की चर्चा पूरे थाईलैंड में हो रही थी और पूरे देश में इन बच्चों और उनके कोच को बचाने के लिए दुआएं की जा रहीं थीं।
गोताखोरों के बच्चों के पास पहुंचने का वीडियो थाईलैंड नेवी सील ने जारी किया है। गुफा में लापता हुए 12 लड़कों और उनके कोच को लेकर पूरे देश में चिंता का माहौल था। इन सभी के सुरक्षित होने की खबर उनके परिजनों के लिए खुश होने की वजह लेकर आई है। चियंग राय के गवर्नर नारोंग्सक ओसोटानकोर्न ने बताया कि खोजी अभियान में शामिल नौसेना के विशेष दल ने इनकी तलाश की। जब उनके जिंदा होने की खबर बाहर आई तो गुफा के बाहर मौजूद एक बच्चे की मां ने कहा, "आज का दिन सबसे अच्छा है।
मैं कब से अपने बेटे का इंतजार कर रही हूं। मुझे लग रहा था कि उसके जिंदा होने की संभावना 50 फीसदी ही है। अब मैं बहुत उत्साहित हूं। जब वो बाहर आएगा तो सबसे पहले मैं उसे गले लगाउंगी। मैं सबका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं।" बचावकर्मियों के अनुसार गुफा में फंसे बच्चों और उनके कोच ने जमीन के भीतर कोई ऐसी जगह तलाश ली थी जिससे वे बाढ़ के पानी की चपेट में आने से बच गए। इस घटना की चर्चा पूरे थाईलैंड में हो रही थी और पूरे देश में इन बच्चों और उनके कोच को बचाने के लिए दुआएं की जा रहीं थीं।
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rescue operation
खोजी अभियान में मुश्किलें
लगातार बढ़ते पानी और कीचड़ के चलते इस खोजी अभियान में बहुत-सी मुश्किलें आ रही थीं। वहां हालात कितने मुश्किल हैं ये बताया बचाव टीम में शामिल बेल्जियम के गोताखोर बेन रेमेनेंट्स ने। बच्चों के मिलने से पहले उन्होंने बीबीसी से कहा, "वो बहुत भीतर हैं और वहां सिर्फ तैरकर ही जाया जा सकता है। ये गुफाएं भूलभुलैया जैसी हैं, तापमान 21 डिग्री है और बहुत चिपचिपाहट है। ये छोटी-छोटी सुरंगों की भूलभुलैया है जो कई किलोमीटर तक है। पहले दिन मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि अंधेरे की वजह से हम कुछ देख ही नहीं पा रहे थे।"
बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई जा रही है। पत्रकारों से बात करते हुए चियंग राय के गवर्नर ने बचाव अभियान के अगले चरण के बारे में बताते हुए कहा, "अब हम उनके पास खाना भेजेंगे, लेकिन अभी हम नहीं जानते कि वो खा पाएंगे या नहीं क्योंकि उन्होंने दस दिनों से कुछ नहीं खाया है। हम देखेंगे कि वो खाने को पचा पाएंगे या नहीं। अभी हमें बहुत कुछ करना है। उन्हें बाहर सुरक्षित निकालना है और सामान्य करना है ताकि वो स्कूल जा सकें।"
लगातार बढ़ते पानी और कीचड़ के चलते इस खोजी अभियान में बहुत-सी मुश्किलें आ रही थीं। वहां हालात कितने मुश्किल हैं ये बताया बचाव टीम में शामिल बेल्जियम के गोताखोर बेन रेमेनेंट्स ने। बच्चों के मिलने से पहले उन्होंने बीबीसी से कहा, "वो बहुत भीतर हैं और वहां सिर्फ तैरकर ही जाया जा सकता है। ये गुफाएं भूलभुलैया जैसी हैं, तापमान 21 डिग्री है और बहुत चिपचिपाहट है। ये छोटी-छोटी सुरंगों की भूलभुलैया है जो कई किलोमीटर तक है। पहले दिन मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि अंधेरे की वजह से हम कुछ देख ही नहीं पा रहे थे।"
बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई जा रही है। पत्रकारों से बात करते हुए चियंग राय के गवर्नर ने बचाव अभियान के अगले चरण के बारे में बताते हुए कहा, "अब हम उनके पास खाना भेजेंगे, लेकिन अभी हम नहीं जानते कि वो खा पाएंगे या नहीं क्योंकि उन्होंने दस दिनों से कुछ नहीं खाया है। हम देखेंगे कि वो खाने को पचा पाएंगे या नहीं। अभी हमें बहुत कुछ करना है। उन्हें बाहर सुरक्षित निकालना है और सामान्य करना है ताकि वो स्कूल जा सकें।"
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children in the cave
कौन थे ये बच्चे?
सभी 12 बच्चे मू पा, जिसे वाइल्ड बोर भी कहते हैं, फुटबॉल टीम के सदस्य हैं। 25 साल के उनके सहायक कोच इक्कापोल जनथावोंग कभी-कभी इन बच्चों को घुमाने ले जाते थे। दो साल पहले भी इसी गुफा में वो बच्चों को घुमाने लाए थे। टीम में सबसे छोटा खिलाड़ी 11 साल का चैन 'टाइटन' है, उन्होंने सात साल की उम्र से फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। टीम के कप्तान 13 साल के डुआंगपेट 'डोम' हैं, वे अपनी टीम के मोटिवेटर यानी उत्साह बढ़ाने वाले सदस्य भी हैं। क्लब के मुख्य कोच नोप्पारात कंतावोंग टीम के साथ घूमने नहीं गए थे। उन्होंने कहा है कि ये सभी बच्चे एक दिन प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का ख्वाब रखते हैं, उन्हें विश्वास है कि सभी लड़के एक-दूसरे के साथ रहेंगे और एक-दूसरे को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे।
सभी 12 बच्चे मू पा, जिसे वाइल्ड बोर भी कहते हैं, फुटबॉल टीम के सदस्य हैं। 25 साल के उनके सहायक कोच इक्कापोल जनथावोंग कभी-कभी इन बच्चों को घुमाने ले जाते थे। दो साल पहले भी इसी गुफा में वो बच्चों को घुमाने लाए थे। टीम में सबसे छोटा खिलाड़ी 11 साल का चैन 'टाइटन' है, उन्होंने सात साल की उम्र से फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। टीम के कप्तान 13 साल के डुआंगपेट 'डोम' हैं, वे अपनी टीम के मोटिवेटर यानी उत्साह बढ़ाने वाले सदस्य भी हैं। क्लब के मुख्य कोच नोप्पारात कंतावोंग टीम के साथ घूमने नहीं गए थे। उन्होंने कहा है कि ये सभी बच्चे एक दिन प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का ख्वाब रखते हैं, उन्हें विश्वास है कि सभी लड़के एक-दूसरे के साथ रहेंगे और एक-दूसरे को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे।