साल 1994 में फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ ने बॉक्स ऑफिस पर एक नया कमाल किया और ये कमाल था किसी हिंदी फिल्म का कमाई के मामले में सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर जाना। राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म में सलमान खान और माधुरी दीक्षित की जोड़ी ने खूब रंग जमाया और निर्देशक गोविंद मूनीस की फिल्म ‘नदिया के पार’ का निर्देशक सूरज बड़जात्या ने बेहतरीन रीबूट या कहे कि रीमिक्स संस्करण इस फिल्म में तैयार किया। गोविंद मूनीस ही वह शख्स थे जो पहली बार माधुरी दीक्षित को लेकर राजश्री के दफ्तर आए थे। माधुरी के पिता शंकर दीक्षित और गोविंद मूनीस गहरे मित्र रहे और उन्नाव से मुंबई आने के बाद से राजश्री का दफ्तर ही गोविंद मूनीस का दूसरा घर हुआ करता था। 17 साल की जिस किशोरी को गोविंद के कहने पर साल 1984 में फिल्म ‘अबोध’ में पहला ब्रेक मिला, उसी ने अपने रूप और यौवन से दस साल बाद राजश्री की तिजोरियां भर दीं। ये माधुरी दीक्षित का पारस पत्थर काल था, वह जिस फिल्म को हाथ लगा देतीं वह सोना बन जाती और इसी कालखंड की अनोखी फिल्म है 2 जून 1995 को रिलीज हुई फिल्म ‘राजा’ जो हिंदी सिनेमा के इतिहास में इसलिए याद की जाती है कि इसे माधुरी ने अकेले अपने दम पर बॉक्स ऑफिस पर हिट करा दिया।
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माधुरी दीक्षित का माधुर्य
माधुरी दीक्षित का करिश्मा हिंदी सिनेमा में बेजोड़ रहा है। एक साधारण सी दिखने वाली महाराष्ट्रियन लड़की का हिंदी सिनेमा में शोहरत का सातवां आसमान छू लेना किसी सपने सरीखा ही है। उनकी कामयाबी के अचरज पर ही रामगोपाल वर्मा ने ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ नाम से फिल्म भी बना डाली थी। लेकिन, कम लोगों की ही पता होगा कि माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में तमाम मौकों पर ऐसे फैसले लिए हैं जिनके लिए मजबूत कलेजा चाहिए होता है। माधुरी ने राजकुमार संतोषी को फिल्म ‘दामिनी’ के लिए ना कहा। यश चोपड़ा को फिल्म ‘डर’ और ‘चांदनी’ के लिए मना किया और संजय लीला भंसाली को फिल्म ‘खामोशी’ और ‘1942 ए लव स्टोरी’ में काम करने से मना कर दिया था। अपने करियर में सौ के करीब फिल्में लीड रोल में करने वाली माधुरी ने निर्देशक इंद्र कुमार के साथ भी एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। इंद्र कुमार हिंदी सिनेमा के उन बिरले निर्देशकों में से हैं जिनकी डेब्यू से लेकर चार फिल्में ‘दिल’, ‘बेटा’, ‘राजा’ और ‘इश्क’ लगातार सुपर हिट रहीं। और, इनमें से शुरू की तीनों फिल्मों की हीरोइन रहीं माधुरी दीक्षित। ‘इश्क’ भी इंद्र कुमार ने पहले माधुरी को ही ऑफर की थी। उनके मना करने पर फिल्म में जूही चावला का नंबर लगा था। इंद्र कुमार और माधुरी दीक्षित का नाता अब तक कायम है। दोनों ने पिछली फिल्म ‘टोटल धमाल’ में भी साथ काम किया।
राजनीति का शिकार हुई ‘राजा’
अपने समय के दिग्गज लेखकों राजीव कौल और प्रफुल्ल पारेख की लिखी फिल्म ‘राजा’ की कहानी का मूल विचार बताते हैं कि नौशीर खटाऊ का था, जिनकी कहानियों पर ही ‘इश्क’ और ‘होते होते प्यार हो गया’ जैसी फिल्में भी बनीं। ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा में आमिर खान के नाम की तूती बोलती थी और माधुरी दीक्षित का फिल्म ‘दिल’ के दौरान आमिर से हुआ पंगा अभी ताजा ही था। फिल्म ‘राजा’ को फिल्मफेयर पुरस्कारों में 11 नॉमीनेशन मिले लेकिन पुरस्कार एक भी नहीं मिला। इसे लेकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में तमाम तरह की चर्चाएं बरसों बरस होती रहीं। माधुरी दीक्षित को इसी फिल्म के लिए एक दूसरी फिल्म पत्रिका स्क्रीन ने बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड दिया था। माधुरी दीक्षित के स्टारडम को बढ़ाने में फिल्म ‘राजा’ ने जबर्दस्त भूमिका निभाई। इसी फिल्म से ये भी तय हुआ कि हिंदी सिनेमा की हीरोइन नंबर वन अब वही हैं और फिल्म दर फिल्म माधुरी का बढ़ता जा रहा पारिश्रमिक टोटका नहीं है। ये वह दौर था जब माधुरी अपने समय के बड़े से बड़े हीरो से ज्यादा फीस फिल्मों में काम करने के लिया करती थीं।
भाई हो तो ऐसा
फिल्म ‘राजा’ की कहानी में एक तरफ दो भाई राणा और विश्वा हैं तो दूसरी तरफ भी दो भाई हैं बिरजू और राजा। इनके बीच की कड़ी बनती है मधु। राणा और बिरजू की दोस्ती तब टूट जाती है जब बिरजू अपनी फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद सारी दौलत खो देता है। मधु और राजा की सगाई भी इसी के साथ टूट जाती है। बिरजू ये हादसे बर्दाश्त नहीं कर पाता और बीमार रहने लगता है। राजा अपने भाई को लेकर दूर चला जाता है और उसकी देखभाल करता है। तभी मधु फिर से राजा को मिलती है। दोनों में फिर से प्यार होता है। दोनों घरवालों से बगावत भी कर देते हैं। लेकिन राणा और विश्वा के खेल अभी पूरे नहीं हुए हैं। फिर से साजिश रची जाती है। इस बार मोहरा बिरजू बनता है। लेकिन राजा अपने भाई पर लगे इल्जाम नकार देता है। प्यार से दूर हो जाता है और खून के रिश्ते पर ही अडिग रहता है। इसके बाद तमाम उठापटक और घुमावदार रास्तों से होती हुई कहानी अपने अंत को प्राप्त होती है। राजा और माधुरी के अच्छे दिन आते हैं। बाकी भाइयों को भी लगता है कि इनके अच्छे दिनों में ही उनके अच्छे दिन भी शामिल हैं।
‘मि. इंडिया’ से शुरू हुई ट्रेनिंग
निर्माता सुरिंदर कपूर के तीनों बेटों बोनी कपूर, अनिल कपूर और संजय कपूर में संजय कपूर
सबसे छोटे हैं। उनकी लॉन्चिंग शेखर कपूर के निर्देशन में होना फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के बनने के दौरान ही तय हो गया था। संजय तब फिल्म के सेट पर जाकर कैमरे के पीछे की बारीकियां भी सीखा करते थे। तय हुआ कि संजय कपूर की डेब्यू फिल्म ‘प्रेम’ का निर्देशन शेखर कपूर करेंगे। फिल्म में हीरोइन तबू को लिया गया। लेकिन ‘मिस्टर इंडिया’ के बाद शेखर कपूर ने तमाम फिल्में बीच में ही छोड़कर हॉलीवुड जाने का एलान कर दिया। जब उनकी छोड़ी फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ का निर्देशक सतीश कौशिक के जिम्मे आया तो संजय कपूर उन दिनों सतीश कौशिक के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम किया करते थे। बाद में सतीश कौशिक ने ही उनकी पहली फिल्म ‘प्रेम’ भी निर्देशित की। फिल्म ‘राजा’ संजय कपूर के करियर की इकलौती सबसे बड़ी हिट फिल्म रही। फिल्म में माधुरी के काम को देखकर तब फिल्म इंडस्ट्री में ये चर्चा हुआ करती थी कि फिल्म का नाम असल में रानी होना चाहिए। माधुरी और संजय कपूर जल्द ही नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘फाइंडिंग अनामिका’ में साथ नजर आने वाले हैं।