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Population: आने वाले वक्त में मुसीबत न बन जाए जनसंख्या नियंत्रण कानून, इस पर उठने वाले सवालों को आंकड़ों से समझें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 12 Jul 2022 06:17 PM IST
सार

नवंबर 2022 के मध्य तक दुनिया की आबादी आठ अरब तक पहुंच जाएगी। इस अनुमान के अनुसार 2030 तक आबादी लगभग 8.5 अरब और 2050 तक 9.7 अरब हो जाएगी। 2080 तक इसके लगभग 10.4 अरब के शिखर तक पहुंचने का अनुमान है।

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बढ़ती आबादी का संकट - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को पूरी दुनिया ने विश्व जनसंख्या दिवस मनाया। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र ने भी एक बड़ी खबर जारी की। बताया कि नवंबर 2022 के मध्य तक दुनिया की आबादी आठ अरब तक पहुंच जाएगी। इस अनुमान के अनुसार 2030 तक आबादी लगभग 8.5 अरब और 2050 तक 9.7 अरब हो जाएगी। 2080 तक इसके लगभग 10.4 अरब के शिखर तक पहुंचने का अनुमान है।


अब अपने देश की बात कर लेते हैं। पिछले एक दो दिन के अंदर आपने एक रिपोर्ट पढ़ी होगी। इसमें ये बताया जा रहा है कि अगले साल तक भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश हो जाएगा। मतलब आबादी के मामले में चीन भी हमसे पीछे छूट जाएगा।  
 
ये तो आबादी बढ़ने का मामला हो गया। लेकिन एक और आंकड़ा है, जो ये कहता है कि भारत में कुल जन्मदर में लगातार गिरावट हो रही है। कई राज्यों में ये दो प्रतिशत से भी नीचे पहुंच चुकी है। 

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर जन्मदर घट रही है तो आबादी कैसे बढ़ रही है? सवाल ये भी उठने लगा है कि अगर जन्मदर घट रही है तो कहीं जनसंख्या नियंत्रण कानून लाकर भारत मुसीबत में न पड़ जाए। जैसा चीन समेत दुनिया के कई देश झेल रहे हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं...

 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
पहले जानिए सीएम योगी ने क्या कहा? 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विश्व जनसंख्या दिवस पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, 'जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास सफलतापूर्वक हों, लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि कहीं भी जनसांख्यकीय असंतुलन की स्थिति न पैदा होने पाए। ऐसा न हो कि किसी एक वर्ग की आबादी बढ़ने की गति अधिक हो और जो मूल निवासी हों, जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों से उनकी आबादी को नियंत्रित कर जनसंख्या असंतुलन पैदा कर दिया जाए।'

उन्होंने कहा, 'जिन देशों में जनसांख्यकीय असंतुलन होता है वहां चिंताएं बढ़ती हैं, क्योंकि इससे धार्मिक डेमोग्राफी पर विपरीत असर पड़ता है। इससे एक समय के बाद वहां अव्यवस्था, अराजकता जन्म लेने लगती है।' 

ये पहली बार नहीं था जब किसी नेता ने जनसंख्या नियंत्रण कानून पर बात की हो। इसके पहले भी ये मुद्दा उठाता रहा है। उत्तर प्रदेश में तो जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर एक ड्राफ्ट भी तैयार हो चुका है। इसके अनुसार, दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी सुविधाओं से वंचित किए जाने का प्रावधान तक है। केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह समेत कई अन्य नेता भी जनसंख्या कानून के पक्ष में बयान दे चुके हैं। 
 
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जन्म दर - फोटो : अमर उजाला
अब जानिए हर साल कितने बच्चे पैदा होते हैं? 
statisticstimes.com के अनुसार अभी दुनिया में हर साल औसतन 12 से 14 करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। मतलब हर मिनट 270 बच्चों का जन्म होता है। इस रफ्तार के साथ साल 2023 में दुनिया की आबादी आठ अरब के आंकड़े को छू लेगी। 19वीं सदी की शुरुआत में दुनिया में एक अरब आबादी हो गई थी लेकिन अब 2023 तक ये बढ़कर आठ अरब होने जा रही है। 2011 में दुनिया की आबादी सात अरब हुई थी। 

 
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जनसंख्या - फोटो : अमर उजाला
तो जन्म दर के घटने के बाद भी क्यों तेजी से बढ़ी आबादी?
18वीं सदी तक एक महिला औसतन छह बच्चों को जन्म देती थी। 19वीं सदी में इसमें थोड़ी गिरावट आई। 1951 के आंकड़े बताते हैं कि उस दौरान एक महिला औसतन पांच बच्चों को जन्म देती थी। अब साल 2021 में यह आंकड़ा 2.5 पर आ गया है। मतलब पिछले 70 साल में जन्म दर आधी हो गई है। 

ऐसा नहीं है कि भारत में जन्मदर में गिरावट नहीं हुई है। भारत में भी 18वीं सदी से लेकर अब तक के आंकड़ों को देखें तो जन्मदर में लगातार गिरावट हुई है। आंकड़ों पर रिपोर्ट तैयार करने वाली statista.com के अनुसार, साल 1880 में भारत में जन्मदर 5.95 प्रतिशत थी, जो 1900 में घटकर 5.73 प्रतिशत हो गई। 1950 में जन्मदर 5.9 प्रतिशत थी। आजादी के बाद इसमें जबरदस्त गिरावट हुई। साल 2000 में भारत में जन्मदर 3.48 प्रतिशत हो गया, जो अब 2.0 प्रतिशत है। मतलब बच्चों के पैदा होने की रफ्तार में लगातार गिरावट हो रही है।  

तो अब सवाल यह उठता है कि जन्म तेजी से घटने के बावजूद भारत समेत दुनिया की आबादी इतनी तेजी से कैसी बढ़ी? इसे समझने के लिए हमने डेटा साइंटिस्ट डॉ. नमन ओझा से संपर्क किया। उन्होंने इसे आसानी से समझाया। कहा, ' जब भी आबादी बढ़ने की बात होती है तो हम लोग सिर्फ जन्म दर पर फोकस करते हैं। जबकि आबादी का एक दूसरा पहलु मृत्यु दर में भी छिपा है। आबादी बढ़ने का कारण समझने के लिए हमें मृत्यु दर पर भी बात करनी होगी।' 

नमन आगे बताते हैं, 'मौजूदा समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी हर साल एक हजार लोगों पर करीब 18 बच्चों का जन्म होता है। इसके उलट एक हजार की आबादी पर ही 7.60 लोगों की मौत होती है। मतलब जन्म दर का आंकड़ा मृत्यु दर से दो गुने से ज्यादा है। इसलिए भले ही जन्मदर घट रही है, लेकिन वो मृत्यु दर से अभी भी कहीं ज्यादा है।'

 
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बढ़ती आबादी - फोटो : अमर उजाला
तो जनसंख्या नियंत्रण कानून से नुकसान क्या होगा? 
अगर भारत समेत दुनियाभर में आबादी बढ़ रही है तो जनसंख्या नियंत्रण कानून लाकर इसे कम किया जा सकता है। ऐसे में  क्यों कहा जा रहा है कि इस कानून का देश पर भारी नुकसान पहुंचेगा? डेटा साइंटिस्ट नमन ने इसे भी विस्तार से समझाया। 

उन्होंने कहा, 'जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने के बाद कम बच्चे पैदा होंगे। एक समय के बाद मौजूदा युवा बुजुर्गों की श्रेणी में आ जाएंगे। जिनकी संख्या काफी अधिक होगी। वहीं, कम बच्चे पैदा होने के चलते युवाओं की संख्या बहुत घट जाएगी।'

नमन आगे कहते हैं, 'अभी भारत दुनिया का सबसे युवा देश कहलाता है। लेकिन जब बच्चे कम पैदा होंगे तो भारत में युवाओं की संख्या कम हो जाएगी और उतनी ही तेजी से बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी। तब भारत दुनिया का सबसे ज्यादा बुजुर्गों वाला देश बन सकता है। मतलब हमारे यहां काम करने वालों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। जो किसी भी देश के लिए सबसे खतरनाक स्थिति होती है।'

आगे जानिए चीन समेत कई देशों में जनसंख्या नियंत्रण कानून का उल्टा असर पड़ा? 

 
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