लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के साथ आनुवांशिक और पर्यावरणीय परिस्थितयां मिलकर सेहत पर गंभीर असर डाल रही हैं। इसका प्रजनन स्वास्थ्य पर भी सीधा असर देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में लगभग हर 6 में से 1 व्यक्ति बांझपन से प्रभावित है। इनमें से लगभग 50% मामलों में पुरुष पार्टनर मुख्य कारण माने जाते हैं।
Infertility In Men: प्रजनन समस्याओं से परेशान पुरुषों के लिए बड़ी राहत, एम्स विशेषज्ञों ने बताया असरदार तरीका
वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने योग को लेकर बेहद दिलचस्प जानकारी सामने रखी है। इस अध्ययन के अनुसार, नियमित योग करने से पुरुषों के शुक्राणुओं (स्पर्म) की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और उनमें होने वाले डीएनए नुकसान व ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद मिल सकती है।
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योग है आपकी समस्या का समाधान
हाल ही में हुए एक अध्ययन में एम्स के वैज्ञानिकों ने पाया कि नियमित और अनुशासित तरीके से योग करने वाले कुछ पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता बेहतर हुई। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और डीएनए को होने वाले नुकसान को भी कम करने में योग को बहुत लाभकारी पाया गया है।
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इससे पहले एम्स के वैज्ञानिकों ने बताया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ योग का अभ्यास पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इंटरनेशल जर्नल ऑफ योग में प्रकाशित ये रिपोर्ट लाखों लोगों के लिए बड़ी उम्मीद के तौर पर देखी जा रही है।
अध्ययन में क्या पता चला?
आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में 15 प्रतिशत से अधिक दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें लगभग आधे मामलों में पुरुषों से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं।
एम्स के डॉक्टर प्रभाकर तिवारी, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. रीमा दादा और अंजलि यादव की टीम ने यह जानने की कोशिश की कि नियमित योग का असर पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर किस तरह पड़ता है।
- शोध के दौरान 25 से 40 वर्ष की उम्र के 78 ऐसे पुरुषों को शामिल किया गया जो प्राथमिक बांझपन से पीड़ित थे।
- इनमें से 42 प्रतिभागियों ने पूरा 12 सप्ताह का योग कार्यक्रम पूरा किया। इस कार्यक्रम में सप्ताह में पांच दिन रोजाना एक घंटे तक योगासन, प्राणायाम, मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
- अध्ययन पूरा होने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि योग करने वाले प्रतिभागियों में प्रजनन क्षमता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों में सकारात्मक बदलाव आए।
योग ला सकता है कई सकारात्मक बदलाव
विशेषज्ञों ने पाया कि इससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और उससे होने वाले डीएनए को नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई। नियमित योग अभ्यास से स्पर्म की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और हानिकारक ऑक्सीडेटिव प्रभाव कम हुए।
- रिसर्च में स्पर्म डीएनए फ्रैगमेंटेशन इंडेक्स (डीएफआई) यानी शुक्राणुओं के डीएनए को हुए नुकसान का स्तर भी कम होते देखा गया
- डॉ. रीमा दादा का कहना है कि डीएनए की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार देखने के लिए कम से कम छह महीने तक नियमित योग करना जरूरी हो सकता है।
प्रजनन समस्याओं से बचे रहना इतना भी मुश्किल नहीं
शोधकर्ताओं का मानना है कि योग कई तरीकों से फायदा पहुंचा सकता है। यह तनाव वाले हार्मोन कम करने, शरीर की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ाने, प्रजनन अंगों में रक्त प्रवाह सुधारने, सूजन घटाने, माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता बेहतर करने और कोशिकाओं की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करता है।
- डॉ. रीमा दादा कहती हैं, इस अध्ययन से पता चलता है कि व्यवस्थित तरीके से किया गया योग अभ्यास प्रजनन समस्याओं पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को कम कर सकता है।
- योग दवाओं के बिना अपनाई जाने वाली एक बेहतरीन जीवनशैली रणनीति है, जो प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और संतान प्राप्ति की कोशिश कर रहे दंपतियों में मददगार साबित हो सकती है।
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स्रोत:
Impact of a 12-week Yoga Intervention on Seminal Oxidative Stress, Sperm Quality, and DNA Fragmentation Index in Infertile Men: A Pre–post Intervention Study
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