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Eye Care Tips: दिनभर देखते रहते हैं रील्स? जानें इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Fri, 19 Jun 2026 03:11 PM IST
सार
Eye Care Tips: आज के समय में टाइम पास करने का सबसे अच्छा तरीका है रील्स देखना। चाहे बड़े लोग हों, या युवा....यहां तक कि बच्चे भी रील्स देखकर अपना समय व्यतीत करते हैं। ये कितना सही है और इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है, आइए इस बारे में बात करते हैं।
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दिनभर देखते रहते हैं रील्स? जानें इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है
- फोटो : AI
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Eye Care Tips: आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया रील्स देखना लोगों के लिए सबसे आम मनोरंजन का साधन बन गया है। बच्चे, युवा और बड़े—हर कोई घंटों मोबाइल स्क्रीन पर रील्स देखकर अपना समय बिताता है। यह आदत भले ही मनोरंजन और टाइम पास का आसान तरीका लगे, लेकिन लगातार स्क्रीन देखने का असर आंखों की सेहत पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
दिनभर देखते रहते हैं रील्स? जानें इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है
- फोटो : FreePik
रील्स देखने का आंखों पर प्रभाव
- लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे थकान महसूस होती है।
- कम पलक झपकाने की वजह से आंखों में ड्राईनेस और जलन की समस्या हो सकती है।
- लंबे समय तक स्क्रीन देखने से अस्थायी रूप से दृष्टि धुंधली हो सकती है।
- मोबाइल की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित कर सकती है, जिससे नींद खराब हो सकती है।
- अत्यधिक स्क्रीन टाइम से सिरदर्द और आंखों के आसपास दर्द हो सकता है।
दिनभर देखते रहते हैं रील्स? जानें इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है
- फोटो : AI
आंखों की देखभाल के उपाय
20-20-20 नियम अपनाएं
हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें, इससे आंखों को आराम मिलता है।
स्क्रीन टाइम सीमित करें
जरूरत से ज्यादा रील्स या वीडियो देखने से बचें और समय तय करें।
20-20-20 नियम अपनाएं
हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें, इससे आंखों को आराम मिलता है।
स्क्रीन टाइम सीमित करें
जरूरत से ज्यादा रील्स या वीडियो देखने से बचें और समय तय करें।
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दिनभर देखते रहते हैं रील्स? जानें इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है
- फोटो : Adobe Stock
आंखों को आराम दें
बीच-बीच में आंखें बंद करें या थोड़ी देर स्क्रीन से दूर रहें।
पर्याप्त पानी पिएं
पानी की कमी से आंखों में ड्राईनेस बढ़ सकती है।
सही रोशनी में मोबाइल इस्तेमाल करें
बहुत अंधेरे या बहुत तेज रोशनी में मोबाइल देखने से बचें।
बीच-बीच में आंखें बंद करें या थोड़ी देर स्क्रीन से दूर रहें।
पर्याप्त पानी पिएं
पानी की कमी से आंखों में ड्राईनेस बढ़ सकती है।
सही रोशनी में मोबाइल इस्तेमाल करें
बहुत अंधेरे या बहुत तेज रोशनी में मोबाइल देखने से बचें।
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दिनभर देखते रहते हैं रील्स? जानें इसका आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है
- फोटो : Freepik
एक दिन में कितना फोन चलाना सही है?
विशेषज्ञों के अनुसार:
सबसे जरूरी बात
लगातार घंटों मोबाइल देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है। हर 1 घंटे बाद 5–10 मिनट का ब्रेक आंखों को सुरक्षित रखता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- बच्चे (2–12 साल): 1 से 2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं होना चाहिए
- युवा (13–18 साल): 2 से 3 घंटे सीमित मनोरंजन स्क्रीन टाइम बेहतर है
- वयस्क (18+): काम को छोड़कर 4–6 घंटे से ज्यादा लगातार स्क्रीन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
सबसे जरूरी बात
लगातार घंटों मोबाइल देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है। हर 1 घंटे बाद 5–10 मिनट का ब्रेक आंखों को सुरक्षित रखता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।