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Cause of Tinnitus: कान में सीटी बजने की समस्या क्यों होती है? जानिए कारण, लक्षण और घरेलू उपाय
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Fri, 19 Jun 2026 01:47 PM IST
सार
Cause of Tinnitus: कान में सीटी बजने की समस्या से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं। ये दिक्कत क्यों होती है, आज हम इसी बारे में बात करेंगे और इसके घरेलू उपाय भी बताएंगे।
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टिनिटस होने पर क्या करें?
- फोटो : AI
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Cause of Tinnitus: कान में लगातार सीटी बजने, भिनभिनाने या आवाज सुनाई देने की समस्या को मेडिकल भाषा में टिनिटस कहा जाता है। यह समस्या आजकल काफी लोगों में देखने को मिल रही है और कई बार यह अस्थायी होती है, लेकिन कुछ मामलों में यह लंबे समय तक परेशान कर सकती है।
टिनिटस होने पर क्या करें?
- फोटो : AI
टिनिटस क्या है और क्यों होता है?
टिनिटस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बिना किसी बाहरी ध्वनि के कानों में सीटी बजने, भिनभिनाने, सरसराहट या लगातार बजने जैसी आवाज सुनाई देती है। यह समस्या एक या दोनों कानों में हो सकती है और कभी-कभी इतनी परेशान करने वाली होती है कि व्यक्ति की नींद, ध्यान और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो जाती हैं। टिनिटस कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि यह कान या सुनने की प्रणाली से जुड़ी किसी अन्य समस्या का संकेत होता है।
टिनिटस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बिना किसी बाहरी ध्वनि के कानों में सीटी बजने, भिनभिनाने, सरसराहट या लगातार बजने जैसी आवाज सुनाई देती है। यह समस्या एक या दोनों कानों में हो सकती है और कभी-कभी इतनी परेशान करने वाली होती है कि व्यक्ति की नींद, ध्यान और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो जाती हैं। टिनिटस कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि यह कान या सुनने की प्रणाली से जुड़ी किसी अन्य समस्या का संकेत होता है।
टिनिटस होने पर क्या करें?
- फोटो : AI
टिनिटस के मुख्य कारण
- लंबे समय तक हेडफोन या तेज म्यूजिक सुनने से कान की नसों पर असर पड़ सकता है।
- कान में ज्यादा वैक्स जमा होने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे टिनिटस हो सकता है।
- हाई या लो बीपी भी कान में अजीब आवाज का कारण बन सकता है।
- मेंटल स्ट्रेस भी इस समस्या को बढ़ा सकता है।
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टिनिटस होने पर क्या करें?
- फोटो : AI
टिनिटस होने पर क्या करें?
- ज्यादा नमक शरीर में ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है, जिससे कानों में दबाव महसूस हो सकता है और टिनिटस की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए संतुलित मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए।
- अच्छी और पूरी नींद लेने से दिमाग और नसों को आराम मिलता है। नींद की कमी से तनाव बढ़ता है, जो टिनिटस को और ज्यादा परेशान कर सकता है।
- तेज आवाज में लंबे समय तक संगीत सुनना कान की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए हेडफोन का सीमित उपयोग करें और वॉल्यूम हमेशा कम रखें।
- योग और ध्यान (मेडिटेशन) तनाव को कम करने में मदद करते हैं। तनाव कम होने से टिनिटस के लक्षणों में भी राहत मिल सकती है।
- हल्की भाप लेने से कान और आसपास की मांसपेशियों में आराम महसूस हो सकता है और दबाव कम हो सकता है, जिससे कुछ लोगों को राहत मिलती है।
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टिनिटस होने पर क्या करें?
- फोटो : AI
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर कान में आवाज लंबे समय तक बनी रहे, बढ़ती जाए या सुनने में कमी महसूस हो, तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। शुरुआती जांच से समस्या को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
अगर कान में आवाज लंबे समय तक बनी रहे, बढ़ती जाए या सुनने में कमी महसूस हो, तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। शुरुआती जांच से समस्या को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।