Sanchita Ugale: स्क्रीन की चमक के पीछे का अंधेरा, टीवी सितारों में क्यों बढ़ रहे डिप्रेशन-आत्महत्या के मामले?
टीवी अभिनेत्री संचिता उगले की आत्महत्या ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। पिता मच्छिंद्र उगले ने कहा कि उनकी बेटी डिप्रेशन का शिकार थी। अब सवाल ये है कि टीवी और ग्लैमर की दुनिया वाले कलाकरों में मेंटल हेल्थ समस्या और आत्महत्या के मामले क्यों बढ़ते जा रहे हैं?
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टेलीविजन की दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखाई देती है, उसके पर्दे के पीछे उतनी ही जटिल भावनाएं, दबाव और संघर्ष भी छिपे हो सकते हैं। ग्लैमर और पर्दे की चमक आमतौर पर इस स्याह पक्ष को कभी उजागर ही नहीं होने देती, लिहाजा हम कभी सोच भी नहीं पाते कि इसके कलाकारों को भी कोई समस्याएं हो सकती हैं।
कैमरे के सामने मुस्कुराते चेहरे, सोशल मीडिया पर लाखों प्रशंसकों का प्यार और सफलता की गूंज अक्सर यही आभास देती है कि कलाकारों की जिंदगी बेफिक्र और खुशहाल होगी। लेकिन वास्तविकता कई बार इससे बिल्कुल अलग होती है।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीवी-सिनेमा की कई चर्चित अभिनेत्रियों में डिप्रेशन के मामले और आत्महत्या की खबरें काफी सुर्खियों में रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां होती हैं, जो किसी सफल और लोकप्रिय कलाकार को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती हैं? इसका मनोवैज्ञानिक पहलू क्या है?
पर्दे पर हंसी, पर दिल में दर्द
मनोरोग विशेषज्ञों की मानें तो आत्महत्या का कोई एक कारण नहीं होता। ये कई अलग-अलग परिस्थितियां जैसे स्ट्रेस-डिप्रेशन, आर्थिक दबाव, करियर की अनिश्चितता, अकेलापन और नशे की समस्या हो सकती है। ये भी हो सकता है कि आत्महत्या के विचार के पीछे इनमें से कई कारण एक साथ हों।
पर्दे की दुनिया में काम की अस्थिरता, लोकप्रियता बनाए रखने का दबाव, ऑनलाइन ट्रोलिंग के साथ-साथ कलाकार के निजी जीवन की समस्याएं भी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर सकती हैं, जिनमें व्यक्ति 'ब्लैंक' हो जाता है। उसकी सारी उम्मीदें खत्म सी होने लगती हैं और जीवन बोझ बनने लग जाता है।
हालिया मामला 22 वर्षीय अभिनेत्री संचिता उगले का है। 14 जून को मुंबई में संचिता ने आत्महत्या कर ली। संचिता के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह डिप्रेशन की शिकार थी और अक्सर परेशान रहा करती थी।
कई अन्य अभिनेत्रियां भी उठा चुकी हैं ऐसे कदम
अभिनेत्रियों में बढ़ते आत्महत्या के कारणों को जानने से पहले आइए जान लेते हैं कि किन-किन अभिनेत्रियों ने जिंदगी से परेशान होकर आत्महत्या की राह चुनी।
- प्रत्युषा बनर्जी (2016), लोकप्रिय धारावाहिक बालिका वधू से चर्चित अभिनेत्री ने मुंबई में आत्महत्या कर ली।
- सेजल शर्मा (2020): मुंबई स्थित आवास पर आत्महत्या कर ली।
- तुनिषा शर्मा (2022): मुंबई के नयागांव में अपने टीवी शो 'अलीबाब' के सेट पर अपनी वैनिटी वैन में आत्महत्या कर ली थी।
- प्रेक्षा मेहता (2022): क्राइम पेट्रोल की अभिनेत्री ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली।
- वैशाली ठक्कर (2022): ये रिश्ता क्या कहता है कि अभिनेत्री ने इंदौर में आत्महत्या कर ली।
(इस लेख में सिर्फ अभिनेत्रियों में आत्महत्या के मामलों को रिपोर्ट किया जा रहा है, पुरुष अभिनेताओं में भी आत्महत्या की खबरें चर्चा में रही हैं)
डिप्रेशन का शिकार थी, परेशान रहती थी
अब दोबारा संचिता उगले के केस पर लौटते हैं।
एक इंटरव्यू में संचिता के पिता ने उनकी मानसिक स्थिति के बारे में बात करते हुए बताया-
‘संचिता परेशान तो रहती ही थी। उसने हमें कभी साफ वजह नहीं बताई, लेकिन वो अक्सर परेशान रहती थी। मतलब, जब वो अच्छे मूड में होती थी, तब भी अचानक डिप्रेशन में चली जाती थी। हमें ये बात समझ में आ गई थी, इसलिए हम रोज उसके साथ आते-जाते थे। बस आधा घंटा भी अगर हम उसके साथ नहीं होते थे, तो उसे हम अपनी गलती मानते थे। लेकिन वो इतना बड़ा कदम उठा लेगी, ये हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था।
उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। हमने उससे बात की थी, उसे टॉर्चर किया जा रहा था। कभी पैसों को लेकर, तो कभी किसी और बात को लेकर। उसके साथ कुछ गलत हो रहा था।'
क्या कहते हैं मनोरोग विशेषज्ञ?
आत्महत्या के कारणों के बारे में समझने के लिए हमने भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत की। डॉ कहते हैं, आत्महत्या शायद ही कभी किसी एक घटना का परिणाम होती है। यह अक्सर जैविक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और व्यक्तिगत कारकों के संयोजन से जुड़ी होती है।
कलाकारों के मामलों में रिश्तों में तनाव, करियर का दबाव, आर्थिक अनिश्चितता, लगातार सार्वजनिक मूल्यांकन, सोशल मीडिया पर आलोचना और पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं इसलिए किसी भी घटना के पीछे कारणों का अनुमान लगाना गलत हो सकता है।
पहले भी कई मामलों में हमने देखा है कि डिप्रेशन, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और जीवन में बड़े नकारात्मक बदलाव आत्मघाती जोखिम से जुड़े पाए गए हैं।
टीवी-ग्लैमर की दुनिया वालों में क्यों इतना खतरा?
डॉ सत्यकांत कहते हैं, टीवी की दुनिया बिल्कुल वैसी नहीं होती, जैसी हम पर्दे पर देखते हैं। हमें ऐसा समझना भी नहीं चाहिए। कलाकारों की भी हमारी तरह भावनाएं होती हैं, वो भी मानसिक समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। कलाकार शायद ज्यादा होते हैं, क्योंकि वह कई ऐसी परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं जिन्हें अक्सर हम सच मानने को ही तैयार नहीं होते।
सोशल मीडिया का दबाव, दूसरों की तुलना में काम न मिलना, टीवी की दुनिया से जुड़े लोगों में बढ़ते मानसिक तनाव का बड़ा कारण हो सकता है।
फिर सवाल ये है कि शिक्षित-जागरूक होने के बाद भी समय पर डॉक्टर की मदद क्यों नहीं ले पाते?
मनोचिकित्सक कहते हैं, इसके दो बड़े कारण हो सकते हैं।
1. कई बार लोगों को समझ ही नहीं आता कि उन्हें जो दिक्कतें हो रही हैं वह मेंटल हेल्थ समस्याओं के कारण हैं।
2. दूसरा कारण- हमारी मनोस्थिति कैसी है, क्या हम तनाव, असफलता, अस्वीकारिता और आर्थिक दबाव को सही तरीके से ले पा रहे हैं?
इस तरह के जोखिमों को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि टीवी की दुनिया के लोगों को इस ट्रेनिंग में आना होगा कि असफलता या अस्वीकारिता में खुद को खत्म करने से बेहतर है प्रोफेशनल मदद ली जाए। हमारे पाठ्यक्रम में गणित, विज्ञान जैसी विषयों पर तो जोर दिया जाता है पर स्ट्रेस मैनेजमेंट, भावनात्मक नियंत्रण और विपरीत परिस्थितियों का कैसे हैंडल करना है, इसपर कभी ध्यान ही नहीं दिया जाता है।
हम जिस विकसित भारत की कल्पना कर रहे हैं उसमें युवाओं को हमें सिखाना होगा कि वह असफलताओं को भी सहजता और सकारात्मकता से स्वीकारना सीखें। जो आपके मन का न हो उसे भी हैंडल करना सीखें।
मेंटल फ्लेक्सिबिलिटी आने वाली सदियों का सबसे बड़ा टूल होगा।
आत्महत्या की रोकथाम में परिवार, मित्र, सहकर्मी और कार्यस्थल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार, नींद, भूख, बातचीत या सामाजिक गतिविधियों में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो उससे संवेदनशीलता के साथ बात करना उपयोगी हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना और भावनात्मक सहयोग देना महत्वपूर्ण कदम हैं। कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग सेवाएं और तनाव प्रबंधन कार्यक्रम भी लाभदायक हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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