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हेल्थ टिप: बदलते मौसम में बच्चों का खास ध्यान रखें, बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये 7 टिप्स
Wed, 28 Oct 2026 10:51 AM IST
श्रुति गौड़
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Wed, 28 Oct 2026 10:51 AM IST
सार
How to Keep Kids Healthy During Changing Weather: बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी, खांसी, बुखार और संक्रमण से बचाना जरूरी है। इस लेख में जानें बच्चों की सेहत का ध्यान रखने, खानपान और बचाव के जरूरी टिप्स।
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बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये 7 टिप्स
- फोटो : AI
How to Keep Kids Healthy During Changing Weather: बदलते मौसम का असर सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत पर देखने को मिलता है। कभी गर्मी, कभी ठंड और कभी बारिश के कारण तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव से बच्चों को सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश और एलर्जी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। खासकर छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण उन्हें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
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बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये 7 टिप्स
- फोटो : AI
मौसम के अनुसार बच्चों को कपड़े पहनाएं
बदलते मौसम में सुबह और रात के तापमान में अंतर हो सकता है। ऐसे में बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं। बहुत ज्यादा कपड़े पहनाने से पसीना आ सकता है, जबकि कम कपड़े पहनाने से ठंड लग सकती है। बेहतर है कि बच्चों को जरूरत के अनुसार कपड़ों की परतें पहनाएं, ताकि तापमान बदलने पर उन्हें आसानी से कम या ज्यादा किया जा सके।
बच्चों के खानपान पर ध्यान दें
बच्चों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी है। उनकी डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। बच्चों को बाहर के खुले खाद्य पदार्थ और अस्वच्छ भोजन देने से बचें।
बदलते मौसम में सुबह और रात के तापमान में अंतर हो सकता है। ऐसे में बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं। बहुत ज्यादा कपड़े पहनाने से पसीना आ सकता है, जबकि कम कपड़े पहनाने से ठंड लग सकती है। बेहतर है कि बच्चों को जरूरत के अनुसार कपड़ों की परतें पहनाएं, ताकि तापमान बदलने पर उन्हें आसानी से कम या ज्यादा किया जा सके।
बच्चों के खानपान पर ध्यान दें
बच्चों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी है। उनकी डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। बच्चों को बाहर के खुले खाद्य पदार्थ और अस्वच्छ भोजन देने से बचें।
बीमारियों से बचाने के लिए अपनाएं ये 7 टिप्स
- फोटो : AI
पानी और तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में दें
बदलते मौसम में भी बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें। उनकी उम्र के अनुसार सूप, दूध और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ भी दिए जा सकते हैं। छोटे शिशुओं को उनकी जरूरत के अनुसार स्तनपान या फॉर्मूला दूध दें और छह महीने से कम उम्र के शिशुओं को डॉक्टर की सलाह के बिना अलग से पानी न दें।
साफ-सफाई की आदत डालें
बच्चों को खाना खाने से पहले, शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद और बाहर से घर आने पर साबुन से हाथ धोना सिखाएं। उनके खिलौनों, स्कूल बैग और रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों की सफाई भी करते रहें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने की आदत डालें। इससे कई संक्रमणों के फैलने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
बदलते मौसम में भी बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें। उनकी उम्र के अनुसार सूप, दूध और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ भी दिए जा सकते हैं। छोटे शिशुओं को उनकी जरूरत के अनुसार स्तनपान या फॉर्मूला दूध दें और छह महीने से कम उम्र के शिशुओं को डॉक्टर की सलाह के बिना अलग से पानी न दें।
साफ-सफाई की आदत डालें
बच्चों को खाना खाने से पहले, शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद और बाहर से घर आने पर साबुन से हाथ धोना सिखाएं। उनके खिलौनों, स्कूल बैग और रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों की सफाई भी करते रहें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने की आदत डालें। इससे कई संक्रमणों के फैलने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
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- फोटो : AI
बच्चों की नींद और दिनचर्या का ध्यान रखें
पर्याप्त नींद बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए जरूरी है। उनकी उम्र के अनुसार सोने और जागने का नियमित समय तय करें। बच्चों को रोजाना खेलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय दें। हालांकि, अगर मौसम बहुत खराब है या हवा की गुणवत्ता ठीक नहीं है, तो बाहरी गतिविधियों के बजाय घर के अंदर खेलने को प्राथमिकता दें।
सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर बच्चे को लगातार बुखार, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में परेशानी या असामान्य सुस्ती हो रही है, तो उसे नजरअंदाज न करें। छोटे बच्चों में बीमारी के लक्षण तेजी से गंभीर हो सकते हैं। सांस लेने में कठिनाई, होंठ नीले पड़ना, दौरा पड़ना या बच्चा ठीक से जाग न रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न दें।
पर्याप्त नींद बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए जरूरी है। उनकी उम्र के अनुसार सोने और जागने का नियमित समय तय करें। बच्चों को रोजाना खेलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय दें। हालांकि, अगर मौसम बहुत खराब है या हवा की गुणवत्ता ठीक नहीं है, तो बाहरी गतिविधियों के बजाय घर के अंदर खेलने को प्राथमिकता दें।
सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर बच्चे को लगातार बुखार, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में परेशानी या असामान्य सुस्ती हो रही है, तो उसे नजरअंदाज न करें। छोटे बच्चों में बीमारी के लक्षण तेजी से गंभीर हो सकते हैं। सांस लेने में कठिनाई, होंठ नीले पड़ना, दौरा पड़ना या बच्चा ठीक से जाग न रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न दें।
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- फोटो : AI
टीकाकरण और डॉक्टर की सलाह का ध्यान रखें
बच्चों का नियमित टीकाकरण समय पर करवाएं। उनकी उम्र, स्वास्थ्य और जोखिम के अनुसार डॉक्टर अतिरिक्त टीकों की सलाह भी दे सकते हैं। अगर बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है या उसकी परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच और उचित देखभाल से बीमारी की पहचान और इलाज में मदद मिलती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
बच्चों का नियमित टीकाकरण समय पर करवाएं। उनकी उम्र, स्वास्थ्य और जोखिम के अनुसार डॉक्टर अतिरिक्त टीकों की सलाह भी दे सकते हैं। अगर बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है या उसकी परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच और उचित देखभाल से बीमारी की पहचान और इलाज में मदद मिलती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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