बच्चे की सेहत को लेकर माता-पिता को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है और अंग नाजुक होते हैं, जिसके कारण उनमें कई तरह की बीमारियों और संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
सेहत की बात: बच्चा दिखता है हेल्दी लेकिन अंदर से हो सकता है बीमार, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
बच्चा बाहर से स्वस्थ दिखे, फिर भी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं शुरुआती दौर में सामान्य संकेतों के रूप में सामने आ सकती हैं। लगातार थकान, पीला पड़ना, ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, तेजी से वजन बढ़ना, खर्राटे और व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से जांच बीमारी की पहचान में मदद कर सकती है।
बच्चों की सेहत को लेकर रहें सावधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे अपनी परेशानियों को ठीक तरीके से बता नहीं पाते। इसके अलावा कुछ बीमारियां शुरुआत में साफ लक्षण नहीं देतीं, यही कारण है कि अगर आपको बच्चे में कुछ भी असामान्य सा लग रहा है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
- आयरन की कमी से बच्चों में थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान न लगाने में परेशानी हो सकती है।
- आयरन की कमी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकती है।
- इसी तरह बच्चों का बढ़ता वजन सिर्फ दिखने की समस्या नहीं है। बचपन का मोटापा हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल,टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और स्लीप एपनिया जैसे स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है।
हर समय थकान-कमजोरी हर बार सामान्य नहीं
अगर बच्चा पहले की तुलना में जल्दी थकने लगे, बार-बार आराम करे या पढ़ाई और सामान्य गतिविधियों में ध्यान लगाने में परेशानी हो, तो इसे सिर्फ आलस न मानें। आयरन की कमी या एनीमिया इसका एक कारण हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं, कि एनीमिया के कारण बच्चों में थकान, कमजोरी, चक्कर और सांस फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं।
- बच्चों में तेजी से बढ़ने के दौरान आयरन की जरूरत भी बढ़ती है। इसकी कमी लंबे समय तक बने रहने पर शारीरिक और दिमागी विकास प्रभावित हो सकता है।
बहुत ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब आना
बच्चे का पानी ज्यादा पीना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर बिना स्पष्ट कारण लगातार बहुत ज्यादा प्यास लगे और बार-बार पेशाब आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों में से एक है।
- बच्चों और किशोरों में टाइप-1 डायबिटीज का खतरा अधिक होता है, इसके अलावा उन्हें टाइप-2 डायबिटीज भी हो सकती है।
- जिन बच्चों का वजन ज्यादा है, बाहर खेल-कूद कम करता है और परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज रहा है ऐसे बच्चों में भी डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा रहता है।
व्यवहार या नींद में लगातार बदलाव
बच्चे का अचानक चिड़चिड़ा हो जाना, दिनभर सुस्ती रहना, नींद खराब होना और पहले की तुलना में पढ़ाई में मन न लगना हर बार सामान्य नहीं है। इस तरह के कई संकेत एक साथ दिखें और लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
नींद बच्चों की सेहत का अहम हिस्सा है। नींद कम होने से बच्चों में मोटापे का जोखिम हो सकता है। इसी तरह खाने की गुणवत्ता, शारीरिक गतिविधि और स्क्रीन टाइम भी बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। कई बार व्यवहार में बदलाव मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी संकेत हो सकता है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।