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चिंताजनक: लड़कियों में बढ़ रहा पुरुषों वाला हार्मोन, हो रही हैं ये दिक्कतें; कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?

Tue, 08 Sep 2026 03:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 08 Sep 2026 03:05 PM IST
सार

किशोरियों में बढ़ते टेस्टोस्टेरोन के स्तर को लेकर अध्ययनकर्ताओं ने चिंता जताई है। 852 बालिकाओं में 3.1 फीसदी का हार्मोन स्तर बढ़ा मिला। इससे चेहरे पर बाल, आवाज भारी होने, वजन बढ़ने से लेकर माहवारी संबंधी परेशानियों का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों ने इसके लिए संतुलित खानपान, व्यायाम और पर्याप्त नींद पर जोर दिया।

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High Testosterone in Girls how it affects their health know Risks and Prevention
लड़कियों में हार्मोनल समस्याओं का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

किशोरावस्था यानी 12-19 साल की उम्र में शरीर में तेजी से कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। आवाज में बदलाव से लेकर चेहरे पर मुंहासे, वजन में उतार-चढ़ाव और लड़कियों में माहवारी शुरू हो जाती है। ये बहुत सामान्य और प्राकृतिक स्थितियां हैं। हालांकि समस्या तब बढ़ जाती है जब यही सामान्य बदलाव कुछ असामान्य तरीके के लक्षण प्रकट करने लगें।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर में होने वाली गतिविधियां ठीक तरीके से होती रहें, इसके लिए हार्मोन्स का संतुलित रहना बहुत जरूरी है। हार्मोन हमारे शरीर में बनने वाले विशेष रासायनिक संदेशवाहक यानी एक तरह के मैसेंजर होते हैं जो रक्त के माध्यम से अंगों और ऊतकों तक पहुंचकर शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित और समन्वित करते हैं। अगर इन हार्मोन्स में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो इसका पूरी सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है। 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में किशोरियों में हार्मोनल इंबैलेंस की दिक्कत तेजी से बढ़ती देखी जा रही है। कई लड़कियों में उन हार्मोन्स का स्तर ज्यादा देखा जा रहा है जो आमतौर पर पुरुषों में होते हैं। लिहाजा आवाज में अचानक भारीपन , चेहरे पर जरूरत से ज्यादा बाल आने लगें, वजन बढ़ने लगे और पीरियड्स के अनियमित होने की समस्या बढ़ने लगती है। 

एक अध्ययन में पाया गया कि ओपीडी में आने वाली कई लड़कियों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ा हुआ मिला। टेस्टोस्टेरोन को मेल हार्मोन माना जाता है। कुछ लड़कियों में यह स्तर 200 एनजी/डीएल तक पहुंच गया, जबकि महिलाओं में सामान्य अधिकतम स्तर 59 एनजी/डीएल होता है।

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किशोरियों में बढ़ा मेल हार्मोन - फोटो : Freepik.com

किशोरियों में बढ़ा मिला मेल हार्मोन

अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में पाया गया कि ओपीडी में आने वाली किशोरियों में मेल हार्मोन का स्तर ज्यादा था।
 

  • 8-18 साल की 852 बालिकाओं पर आठ महीने तक किए गए अध्ययन में 3.1 फीसदी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ा हुआ मिला।
  • कुछ  बालिकाओं में यह स्तर 200 एनजी/डीएल तक पहुंच गया।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं,  हार्मोन्स में यह बदलाव केवल चेहरे या आवाज तक सीमित नहीं रहता। इससे शरीर में पुरुषों जैसे कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लोगों में चेहरे पर अनचाहे बाल, आवाज में भारीपन, मुंहासे, वजन बढ़ना और शरीर की बनावट में बदलाव इसके संकेत हो सकते हैं। वहीं, किशोरियों में माहवारी से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।

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हार्मोनल समस्याओं का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

आखिर क्यों बढ़ रही है ये दिक्कत?

डॉक्टरों ने जांच में पाया कि जिन किशोरियों में ये दिक्कतें ज्यादा देखी जा रही थी, उनकी दिनचर्या में फास्टफूड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक था।
 

  • ऐसे लड़कियों में लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल की आदत भी ज्यादा थी। 
  • कई लड़कियों में देर रात तक जागने जैसी आदतें भी देखी गईं। 
  • हालांकि, किसी एक आदत को हार्मोन बढ़ने का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता और ऐसे लक्षणों के पीछे पीसीओएस समेत कई चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं।


अब सवाल ये है कि इसके कौन से संकेत शरीर में दिखाई देते हैं और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है? 

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मासिक धर्म की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

पीरियड्स पर पड़ने वाला असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओपीडी में आने वाली 12-18 साल की उम्र की बालिकाओं, किशोरियों में माहवारी संबंधी परेशानी देखने को मिल रही है। इनमें से करीब दो फीसदी में फास्टफूड-खराब दिनचर्या की वजह से यह दिक्कत मिल रही है।
 

  • महिलाओं में प्रतिदिन कुछ न कुछ फास्टफूड-डिब्बाबंद चीजें खाने की आदत देखी गई। 
  • कई लड़कियां रोज 4-6 घंटे मोबाइल-लैपटॉप का भी उपयोग करती थी जिससे सोने-जागने का समय बिगड़ गया। 
  • अधिकांश रात 11 से एक बजे के बीच सोती हैं। लंबे समय तक ऐसी आदतों से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ गया। 
  • इन्हीं वजहों से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की दिक्कत भी बनी। इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। इससे 10-12 फीसदी में आगे चलकर बांझपन का भी खतरा रहता है।
  • इससे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) की दिक्कत भी बढ़ रही है, इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। ये आगे चलकर बांझपन का भी खतरा बढ़ा सकता है।


डॉक्टर कहते हैं अगर आपको भी  मुंहासे, बाल झड़ने की समस्या, वजन बढ़ने या फिर पीरियड्स की दिक्कतें हो रही हैं तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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