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Heart & Brain: हार्ट कमजोर तो ब्रेन के लिए भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें, घट सकती है सोचने-समझने की शक्ति

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 09 Nov 2025 07:16 PM IST
सार

  • ब्रिटिश वैज्ञानिकों की टीम ने एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में बताया है कि जिन लोगों को 40-50 की उम्र में हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं होती हैं, ऐसे लोगों में आगे चलकर डिमेंशिया जैसी बीमारी होने का खतरा भी अधिक हो सकता है। 

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हार्ट और दिल का कनेक्शन - फोटो : Freepik.com

दिल की बीमारियों के मामले हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़े हैं। सबसे बड़ी चिंता इसके युवा और वयस्कों में बढ़ते मामलों को लेकर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र में ही दिल की बीमारियों के कारण संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होने का जोखिम रहता है, इतना ही नही हृदय की बीमारियों के चलते क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।



दिल सिर्फ खून पंप करने वाला अंग नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर को ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने का भी काम करता है। यही कारण है कि जब हमारा हृदय कमजोर होता है तो इसका असर शरीर के बाकी हिस्सों जैसे दिमाग, किडनी, फेफड़े और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।

इसी से संबंधित एक अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि जिन लोगों को हार्ट की समस्या होती है, उन्हें भविष्य में दिमाग की बीमारियां होने का भी खतरा अधिक हो सकता है। आइए जानते हैं कि इन दोनों का आपस में क्या लिंक है?

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हृदय की बीमारियों का शरीर पर असर - फोटो : Adobe Stock

हृदय रोगियों में डिमेंशिया का बढ़ जाता है खतरा

ब्रिटिश वैज्ञानिकों की टीम ने एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में बताया है कि जिन लोगों को 40-50 की उम्र में हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं होती हैं, ऐसे लोगों में आगे चलकर डिमेंशिया जैसी बीमारी होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।

वैज्ञानिक लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल सहित हृदय संबंधी जोखिम कारक न केवल हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि मस्तिष्क को खून पहुंचाने वाली छोटी-नाजुक रक्त वाहिकाओं को भी क्षति पहुंचा सकते हैं, जिसके कारण दिमाग से संबंधित बीमारी जैसे अल्जाइमर और डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ सकता है। 

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डिमेंशिया का जोखिम - फोटो : Freepik.com

हार्ट और ब्रेन के बीच कनेक्शन

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने बताया कि मध्यम आयु वर्ग के लोग जिन्हें हार्ट की समस्या होती है, ऐसे लोगों में डिमेंशिया का जोखिम अधिक देखा गया। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा, चूंकि हृदय रोगों के कारण दिल की सेहत पर भी असर हो सकता है इसलिए हृदय रोग और डिमेंशिया दोनों से बचे रहने के लिए खान-पान, व्यायाम और धूम्रपान न करने जैसे उपायों पर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सा अधिकारी, प्रोफेसर ब्रायन विलियम्स कहते हैं, यह अध्ययन हार्ट और ब्रेन के बीच महत्वपूर्ण संकेतों के बारे में जानकारी देता है। हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की हमारी सलाह, मस्तिष्क को भी स्वस्थ और बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकती है।

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ट्रोपोनिन का बढ़ा हुआ स्तर खतरनाक - फोटो : Adobe Stock Images

अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन में, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में प्रतिभागियों के खून में ट्रोपोनिन नामक प्रोटीन के स्तर की जांच की गई। यह प्रोटीन हृदय की मांसपेशियों के क्षतिग्रस्त होने पर रक्तप्रवाह में बढ़ने लगता है। जिन लोगों में हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है उन्हें डॉक्टर नियमित रूप से ट्रोपोनिन की जांच कराते रहने की सलाह देते रहे हैं। 

शोधकर्ताओं ने 45 से 69 वर्ष की आयु वाले लगभग 6,000 लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच की और उनमें ये टेस्ट किया। परीक्षण के समय किसी को भी डिमेंशिया या हृदय रोग नहीं था। फिर इन लोगों पर औसतन 25 वर्षों तक नजर रखी गई और उनकी याददाश्त और सोचने की क्षमता का आकलन भी किया गया।

समय के साथ इनमें से 695 लोगों में डिमेंशिया का निदान किया गया।

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डिमेंशिया का जोखिम - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों में शुरुआत में ट्रोपोनिन का स्तर अधिक था, ऐसे लोगों में बाद में चलकर डिमेंशिया होने की आशंका 38 प्रतिशत अधिक देखी गई।

ट्रोपोनिन का बढ़ा हुआ स्तर लोगों में 'संज्ञानात्मक कार्य में तेजी से गिरावट' का कारण बनती है।

यूसीएल में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक प्रोफेसर एरिक ब्रूनर कहते हैं, हम कह सकते हैं, हृदय रोगों पर ध्यान रखकर आप अपने ब्रेन को हेल्दी रख सकते हैं। जिन लोगों में कम उम्र में ट्रोपोनिन का स्तर अधिक रहता है, ऐसे लोगों को कम उम्र से ही डॉक्टर से मिलकर ब्रेन हेल्थ को ठीक रखने और अल्जाइमर-डिमेंशिया से बचाव के उपाय भी शुरू कर देने चाहिए। 




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स्रोत
High-sensitivity cardiac troponin I and risk of dementia: the 25-year longitudinal Whitehall II study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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