मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती हैं। देश में हर साल अगस्त से अक्तूबर के महीने में डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लग जाती है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त के आखिरी हफ्ते तक राजधानी में डेंगू के 272, मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। अगस्त में ही डेंगू के 51 मामले सामने आए। यह इस साल किसी एक महीने में डेंगू के मामलों का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है, इससे पहले अप्रैल में 52 मामले सामने आए थे।
जानना जरूरी: क्या मलेरिया से भी हो सकती है मौत? कौन से लक्षण हैं तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास
मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है। इसमें बुखार के साथ ठंड लगने, सिरदर्द और शरीर में दर्द की समस्या हो सकती है। इलाज में देरी होने पर गंभीर मलेरिया किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है।
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एयरपोर्ट कर्मचारियों की मौत
हालिया रिपोर्ट में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर काम करने वाले दो कर्मचारियों की मलेरिया से मौत का मामला सामने आया है। यह एयरपोर्ट से जुड़े मलेरिया का एक दुर्लभ संदिग्ध मामला है, जो संभवतः किसी विमान से आए मच्छर के कारण फैला। संक्रमण के शिकार चार अन्य एयरपोर्ट कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। इस घटना ने यूरोप में मलेरिया फैलने को लेकर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि आम जनता के लिए इसका खतरा बहुत कम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, संक्रमण का संभावित स्रोत एनोफिलीज मच्छर है, जो हवाई जहाज के जरिए देश में आया था। जर्मनी में आम तौर पर पाए जाने वाले मच्छरों के विपरीत, एनोफिलीज मच्छर प्लाज्मोडियम पैरासाइट फैला सकते हैं, जिनसे मलेरिया होता है।
एयरपोर्ट अधिकारियों ने पूरे परिसर में मच्छर पकड़ने वाले ट्रैप लगाए हैं। पकड़े गए मच्छरों की लैब में जांच की जाएगी ताकि उनकी प्रजाति का पता लगाया जा सके और यह भी पता चल सके कि वे कहां से आए थे?
अमर उजाला में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था मच्छरों का आतंक दुनियाभर में फैल रहा है। अब उन देशों में भी मच्छर देखे जा रहे हैं जहां इनका नामोनिशान भी नहीं था। जलवायु परिवर्तन ने ऐसी परिस्थितियां ला दी हैं, जिसके कारण अब मच्छरों का खतरा अधिक होता जा रहा है।
नेचर जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 से अप्रैल 2026 के बीच डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर पुर्तगाल, फ्रांस और ग्रीस समेत कई यूरोपीय देशों व अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के नए इलाकों में फैल चुके हैं। यह उन क्षेत्रों में हो रहा है, जहां कभी यह मच्छर मौजूद ही नहीं थे।
मलेरिया का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर तेज बुखार, ठंड लगने और शरीर में भयंकर दर्द को लोग मौसम बदलने या सामान्य वायरल बुखार का असर समझ लेते हैं। यही गलती कई बार भारी पड़ सकती है। मलेरिया एक परजीवी से होने वाली बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि मलेरिया का इलाज संभव है और समय पर सही उपचार मिलने पर गंभीर बीमारी और मौत को रोका जा सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब बुखार को सामान्य मानकर जांच और इलाज में देरी हो जाती है।
मलेरिया से मौत का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मलेरिया को लेकर बरती गई शुरुआती लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में अनुमानित 28.2 करोड़ मलेरिया के मामले सामने आए और करीब 6.10 लाख लोगों की मौत हो गई।
- गंभीर मलेरिया में संक्रमण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण किडनी डैमेज, सांस लेने में गंभीर परेशानी, एनीमिया, मस्तिष्क पर असर, दौरे, बेहोशी या कोमा जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो हर बार मलेरिया बुखार गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण खतरे की घंटी हो सकते हैं। अगर मरीज को अत्यधिक कमजोरी या असामान्य थकान हो, भ्रम की स्थिति दिखे, दौरे पड़ें या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। बच्चों में अत्यधिक सुस्ती, सांस लेने में दिक्कत या दौरे जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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