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जानना जरूरी: क्या मलेरिया से भी हो सकती है मौत? कौन से लक्षण हैं तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

Mon, 31 Aug 2026 06:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 31 Aug 2026 06:24 PM IST
सार

मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है। इसमें बुखार के साथ ठंड लगने, सिरदर्द और शरीर में दर्द की समस्या हो सकती है। इलाज में देरी होने पर गंभीर मलेरिया किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है।

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When Does Malaria Become Dangerous Severe Malaria Symptoms You Should Never Ignore
मलेरिया का अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती हैं। देश में हर साल अगस्त से अक्तूबर के महीने में डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लग जाती है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त के आखिरी हफ्ते तक राजधानी में डेंगू के 272, मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। अगस्त में ही डेंगू के 51 मामले सामने आए। यह इस साल किसी एक महीने में डेंगू के मामलों का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है, इससे पहले अप्रैल में 52 मामले सामने आए थे।



अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को डेंगू के साथ-साथ मलेरिया से बचाव को लेकर भी अलर्ट कर रहे हैं। डॉक्टर कहते हैं, गंभीर स्थितियों में मलेरिया जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ाने वाली बीमारी हो सकती है।

आइए समझते हैं कि किन लक्षणों पर मलेरिया को खतरनाक मान लिया जाता है?

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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com

एयरपोर्ट कर्मचारियों की मौत

हालिया रिपोर्ट में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर काम करने वाले दो कर्मचारियों की मलेरिया से मौत का मामला सामने आया है। यह एयरपोर्ट से जुड़े मलेरिया का एक दुर्लभ संदिग्ध मामला है, जो संभवतः किसी विमान से आए मच्छर के कारण फैला। संक्रमण के शिकार चार अन्य एयरपोर्ट कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। इस घटना ने यूरोप में मलेरिया फैलने को लेकर चिंता बढ़ा दी है, हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि आम जनता के लिए इसका खतरा बहुत कम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, संक्रमण का संभावित स्रोत एनोफिलीज मच्छर है, जो हवाई जहाज के जरिए देश में आया था। जर्मनी में आम तौर पर पाए जाने वाले मच्छरों के विपरीत, एनोफिलीज मच्छर प्लाज्मोडियम पैरासाइट फैला सकते हैं, जिनसे मलेरिया होता है।

एयरपोर्ट अधिकारियों ने पूरे परिसर में मच्छर पकड़ने वाले ट्रैप लगाए हैं। पकड़े गए मच्छरों की लैब में जांच की जाएगी ताकि उनकी प्रजाति का पता लगाया जा सके और यह भी पता चल सके कि वे कहां से आए थे?

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मलेरिया के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI

अमर उजाला में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था मच्छरों का आतंक दुनियाभर में फैल रहा है। अब उन देशों में भी मच्छर देखे जा रहे हैं जहां इनका नामोनिशान भी नहीं था। जलवायु परिवर्तन ने ऐसी परिस्थितियां ला दी हैं, जिसके कारण अब मच्छरों का खतरा अधिक होता जा रहा है।

नेचर जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 से अप्रैल 2026 के बीच डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर पुर्तगाल, फ्रांस और ग्रीस समेत कई यूरोपीय देशों व अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के नए इलाकों में फैल चुके हैं। यह उन क्षेत्रों में हो रहा है, जहां कभी यह मच्छर मौजूद ही नहीं थे।

मलेरिया का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर तेज बुखार, ठंड लगने और शरीर में भयंकर दर्द को लोग मौसम बदलने या सामान्य वायरल बुखार का असर समझ लेते हैं। यही गलती कई बार भारी पड़ सकती है। मलेरिया एक परजीवी से होने वाली बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।

सबसे अहम बात यह है कि मलेरिया का इलाज संभव है और समय पर सही उपचार मिलने पर गंभीर बीमारी और मौत को रोका जा सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब बुखार को सामान्य मानकर जांच और इलाज में देरी हो जाती है।
 

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मलेरिया से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock Photo

मलेरिया से मौत का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मलेरिया को लेकर बरती गई शुरुआती लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है। 
 

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में अनुमानित 28.2 करोड़ मलेरिया के मामले सामने आए और करीब 6.10 लाख लोगों की मौत हो गई।
  • गंभीर मलेरिया में संक्रमण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण किडनी डैमेज, सांस लेने में गंभीर परेशानी, एनीमिया, मस्तिष्क पर असर, दौरे, बेहोशी या कोमा जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।


डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो हर बार मलेरिया बुखार गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण खतरे की घंटी हो सकते हैं। अगर मरीज को अत्यधिक कमजोरी या असामान्य थकान हो, भ्रम की स्थिति दिखे, दौरे पड़ें या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।  बच्चों में अत्यधिक सुस्ती, सांस लेने में दिक्कत या दौरे जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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