दुनियाभर में हार्ट अटैक और हृदय से संबंधित अन्य रोगों के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हार्ट अटैक एक जानलेवा स्थिति है जिसमें दिल की धमनियां ब्लॉक होकर खून का प्रवाह रोक देती हैं। अगर समय रहते क्षणों को पहचानकर इलाज मिल जाए तो इससे रोगी की जान बच सकती है। हार्ट अटैक होने या धमनियों के ब्लॉक होने की स्थिति में डॉक्टर स्टेंटिंग की सलाह देते हैं।
Heart Health: कब पड़ती है हार्ट में स्टेंट लगवाने की जरूरत? स्टेंट लगने का मतलब खत्म हो गई बीमारी? जानिए सबकुछ
विशेषज्ञ बताते हैं कि स्टेंट किसी बीमारी का स्थायी इलाज नहीं, बल्कि अवरुद्ध धमनी को खोलने का एक प्रभावी उपचार है। आज यह प्रक्रिया लाखों लोगों की जान बचा रही है, लेकिन इसके बावजूद स्टेंट को लेकर लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां भी मौजूद हैं।
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हार्ट स्टेंट के बारे में जानिए
अमर उजाला से बातचीत में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ एन.रवि सिंह बताते हैं, स्टेंट ब्लॉक हो चुकी धमनी को खोलने का एक प्रभावी उपचार है। हालांकि इसे स्थायी इलाज नहीं माना जाता सकता। इस प्रक्रिया के बाद भी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
- यदि स्टेंट लगने के बाद भी आप धूम्रपान करते हैं, ब्लड प्रेशर-शुगर कंट्रोल नही रहता, दवाएं समय पर नहीं लेते तो भविष्य खतरा बढ़ सकता है।
- स्टेंट के बाद नियमित दवा, संतुलित भोजन, व्यायाम, वजन को नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण है।।
आइए इससे जुड़े कुछ कॉमन सवाल जान लेते हैं।
मिथ: स्टेंट लग गया तो अब हार्ट पूरी तरह ठीक हो गया
डॉक्टर कहते हैं, स्टेंट केवल ब्लॉकेज वाली धमनी को खोलता है, लेकिन एथेरोस्क्लेरोसिस की बीमारी पूरे शरीर की धमनियों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए स्टेंट लगने के बाद भी भविष्य में नई ब्लॉकेज बनने की आशंका बनी रहती है।
- इसी कारण डॉक्टर स्टेटिन, एंटीप्लेटलेट दवाएं, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएं जारी रखते हैं।
- यदि मरीज स्वस्थ जीवनशैली अपनाता है तो भविष्य में हार्ट अटैक और दोबारा अस्पताल में भर्ती होने का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
मिथ: स्टेंट लगने के बाद दवाओं की जरूरत नहीं रहती
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करने से स्टेंट में थक्का बनने का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। इसके अलावा अधिकांश मरीजों को लंबे समय तक कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं भी दी जाती हैं ताकि नई ब्लॉकेज बनने की संभावना कम हो।
मिथ: स्टेंट लगने के बाद व्यायाम नहीं करना चाहिए
डॉक्टर कहते हैं, डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया गया व्यायाम स्टेंट के बाद रिकवरी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शुरुआती दिनों में आराम की सलाह दी जाती है, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे पैदल चलना, हल्का एरोबिक व्यायाम और कार्डियक रिहैबिलिटेशन हृदय को मजबूत बनाते हैं।
- नियमित व्यायाम से रक्तचाप नियंत्रित रहता है, वजन कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहतर हो सकता है। हालांकि भारी वजन उठाने या अत्यधिक कठिन व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की अनुमति लेना जरूरी है।
मिथ: स्टेंट लगने के बाद सामान्य जीवन नहीं जी सकते
डॉक्टर कहते हैं अधिकांश मरीज स्टेंट के बाद कुछ सप्ताह में अपनी सामान्य दिनचर्या, नौकरी पर लौट आते हैं। सही दवा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह का पालन करने वाले लोग वर्षों तक सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। हालांकि यदि सीने में दर्द, सांस फूलना या असामान्य थकान जैसे लक्षण दोबारा दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।