हमारा शरीर लगातार संकेत देता रहता है कि शरीर के भीतर सबकुछ ठीक है या नहीं? त्वचा या आंखों में बदलाव हो या फिर चक्कर-कमजोरी जैसे लक्षण, इसे देखकर सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है। क्या आप जानते हैं कि आवाज में बदलाव महसूस होना भी कई बार सेहत के लिए अलार्म हो सकता है।
जानना जरूरी: कुछ समय से बदली-बदली और कर्कश लग रही है आवाज? कहीं ये कोई गंभीर समस्या तो नहीं
अक्सर सर्दी, गले की सूजन या ज्यादा बोलने से आवाज में बदलाव हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक बनी समस्या एसिड रिफ्लक्स, वोकल कॉर्ड की समस्या, नसों की परेशानी या थायरॉयड जैसी स्थितियों से भी जुड़ी हो सकती है। संक्रमण के बिना 2-4 सप्ताह तक आवाज बदली रहे तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
हमारे गले में स्वरयंत्र होते हैं, इसमें मौजूद वोकल कॉर्ड हवा के गुजरने पर कंपन करते हैं और यहीं से आवाज निकलती है। अगर इनमें सूजन, चोट, गांठ या उनकी गति में समस्या हो तो आवाज भारी, कर्कश या कमजोर हो सकती है।
- सर्दी या गले के संक्रमण में होने वाली लैरिंजाइटिस यानी स्वरयंत्र की सूजन की समस्या आवाज में बदलाव का बड़ा कारण है।
- लगातार चिल्लाने या बहुत ज्यादा बोलने से भी आवाज प्रभावित हो सकती है।
पेट का एसिड ऊपर भोजन नली और गले की तरफ आने लगे तो इसे गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स यानी जीईआरडी कहा जाता है। यह गले और स्वरयंत्र पर भी असर डाल सकता है। एसिडिटी लगातार रहने से आवाज में भारीपन या खराश की दिक्कत हो सकती है। कई बार धूम्रपान, एलर्जी और गले का सूखापन भी आवाज की समस्या का कारण हो सकते हैं।
नसों और थायरॉयड की समस्या
वोकल कॉर्ड को चलाने वाली नसों में समस्या होने पर आवाज कमजोर या कर्कश हो सकती है। इसे वोकल कॉर्ड पैरालिसिस यानी स्वर-तंत्रियों की कमजोरी या लकवा कहा जाता है।
- गर्दन या छाती की सर्जरी, कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां और कुछ अन्य स्थितियां इसका कारण बन सकती हैं।
- थायरॉयड की समस्याएं में भी कुछ लोगों को आवाज में बदलाव की दिक्कत हो सकती है।
- थायराइड ग्रंथि हमारे वोकल कार्ड और आवाज की नसों के बहुत पास होती है। जब इस ग्रंथि में कोई असंतुलन या बदलाव आता है, तो यह सीधे तौर पर हमारी आवाज को प्रभावित करता है।
कब लक्षण हो सकते हैं गंभीर?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता कि आवाज में लगातार रहने वाली बदलाव की स्थिति कई बार गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकती है।
- गले या वोकल कॉर्ड का ट्यूमर आवाज में भारीपन और बदलाव का कारण हो सकता है।
- इसी तरह न्यूरोलॉजिकल बीमारियां जैसे पार्किंसंस रोग, मल्टीपल स्केलेरोसिस में भी कई लोगों को आवाज में बदलाव की दिक्कत हो सकती है।
अगर सर्दी या किसी संक्रमण के बिना आवाज में बदलाव लगातार बनी रहता है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। आवाज में भारीपन या दूसरी समस्या 2 से 4 सप्ताह तक बनी रहे तो डॉक्टर से जांच कराएं। आवाज के साथ सांस लेने में परेशानी, निगलने में दिक्कत हो रही है इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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