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Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड के चार धामों के नाम क्या हैं और कहां स्थित हैं? जानिए इतिहास और यात्रा का रूट

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: Shivani Awasthi Updated Thu, 30 Apr 2026 01:34 PM IST
सार

Chardham Yatra History: उत्तराखंड की चार धाम यात्रा में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल हैं। यात्रा का सही क्रम यमुनोत्री से शुरू होकर गंगोत्री, केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ होता है। यह यात्रा आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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Uttarakhand CharDham Yatra Guide Name, History And Route Detail in Hindi
चारधाम यात्रा की डिटेल - फोटो : AI

Chardham Yatra Route Detail: उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां की चार धाम यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं, ताकि आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकें और अपने जीवन के पापों से मुक्ति पा सकें। चार धाम यात्रा में चार प्रमुख तीर्थ स्थल शामिल हैं, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, जो हिमालय की गोद में स्थित हैं।



इस यात्रा का धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता भी इसे खास बनाती है। बर्फ से ढके पहाड़, बहती नदियां और शांत वातावरण यात्रियों को एक अलग ही अनुभव देते हैं।

मान्यता है कि इस यात्रा की शुरुआत 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी, ताकि हिंदू धर्म को मजबूत किया जा सके।  अगर आप भी चार धाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। यहां आपको नाम, इतिहास, लोकेशन, रूट और ट्रैवल टिप्स की पूरी जानकारी मिलेगी।

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चारधाम यात्रा की डिटेल - फोटो : Amar ujala

चार धाम के नाम और महत्व

उत्तराखंड के चार धाम में शामिल हैं, 

  • यमुनोत्री -यमुना नदी का उद्गम स्थल

  • गंगोत्री - गंगा नदी का स्रोत

  • केदारनाथ -भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग

  • बद्रीनाथ -भगवान विष्णु का धाम 

ये चारों धाम अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित हैं और हर स्थान का अपना धार्मिक महत्व है। 

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चारधाम यात्रा - फोटो : Ai

चार धाम का इतिहास और धार्मिक मान्यता

चार धाम यात्रा का इतिहास काफी प्राचीन है। माना जाता है कि इसे आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में पुनर्जीवित किया था। इनका इतिहास पौराणिक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस यात्रा को पूरा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है।
 

  • केदारनाथ का इतिहास

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव को खोजा, जिन्होंने यहां बैल का रूप धारण किया था। इसलिए केदारनाथ में शिव का बैल स्वरूप आधा धण स्थापित है।
 

  • बद्रीनाथ धाम का इतिहास

यह स्थल भगवान विष्णु को समर्पित है। विष्णु जी ने नर-नारायण के रूप में अवतार लेकर यहां हजारों वर्षों तक तपस्या की। वहीं माता लक्ष्मी ने बद्री यानी बेर के पेड़ का रूप धारण कर नर-नारायण की रक्षा की। यह नर-नारायण की तपोस्थली है।
 

  • गंगोत्री का इतिहास

इस पवित्र स्थल में मां गंगा का वास माना जाता है। कहते हैं कि राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा नदी पृथ्वी पर इस स्थान पर अवतरित हुई थीं।
 

  • यमुनोत्री का इतिहास

यह स्थान यमुना नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। यमुना सूर्य देव की पुत्री हैं।

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यमुनोत्री और गंगोत्री की यात्रा - फोटो : AI

चारों धाम कहां-कहां स्थित हैं?

चारों धाम उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में स्थित हैं।

 

  • यमुनोत्री

यमुनोत्री उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यहां कालिंद पर्वत पर बंदरपूंछ चोटी के पास यमुना नदी का उद्गम स्थल और यमुनोत्री मंदिर बना है। यहां पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादूर या हरिद्वार है, जहां से बस या टैक्सी से सफर करके जानकीपट्टी तक पहुंचना होता है। आगे का रास्ता 5-7 किमी पदयात्रा या ट्रैक द्वारा पूरा किया जाता है।
 

  • गंगोत्री


चारधामों में से एक गंगोत्री भी उत्तरकाशी जिले में ही स्थित है। उत्तरकाशी में हिमालय की गोद में स्थित इस प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल को गंगा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है, जिसे यहां भागीरथी नदी के नाम से भी जाना जाता है। ऋषिकेश या देहरादून रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग से यात्रा पूरी की जा सकती है।

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केदारनाथ से बद्रीनाथ कैसे जाएं - फोटो : AI
  • केदारनाथ


चारधामों में से सबसे लोकप्रिय माना जाने वाला केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह मंदाकिनी नदी के किनारे बसा है। केदारनाथ मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए गौरीकुंड से लगभग 18 किलोमीटर की चढ़ाई या पैदल यात्रा करनी होती है। 
 

  • बद्रीनाथ


बद्रीनाथ मंदिर को बद्रीविशाल भी कहते हैं जो कि उत्तराखंड के चमोली जिले के अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। मंदिर नर और नारायण नाम के दो पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा है। ऋषिकेश से बद्रीनाथ मंदिर की दूरी लगभग 295 किमी है। 

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