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भारत के वो लाल, जो अपने पहले प्रयास में हो गए थे असफल
Thu, 22 Oct 2015 08:48 AM IST
Updated Thu, 22 Oct 2015 08:48 AM IST
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ये वो लोग हैं जिन्होंने पूरे दुनिया में न केवल अपना नाम रोशन किया बल्कि देश का नाम भी ऊंचा किया।
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एपीजे अब्दुल कलाम: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रसिद्ध वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट बनना जाहते थे लेकिन आठ रिक्त पदों को भरने के लिए हुई परीक्षा में कुछ ही अंतर से पीछे रहे गए। मेरिट में उनका नौंवा स्थान था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक दिन ऐसा आया कि वे भारत के 'मिसाइल मैन' बन गए।
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धीरुभाई अंबानी:इस सूची में दूसरा नाम है धीरुभाई अंबानी का जिसने रिलांयस इंडस्ट्रीज को खड़ा किया। अपने व्यवस्या के शुरुआती दिनों में उन्होंने एक साक्षा धंधे की शुरुआत की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। उसने बाद महज 32 साल के उम्र में उन्होंने विमल इंडस्ट्रीज की शुरुआत की और आगे जो हुआ उसका इतिहास गवाह है।
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अमिताभ बच्चन: अमिताभ जब फिल्मों में अपने अभिनय की शुरुआत की तो उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप हुई। 1973 में आई 'जंजीर' फिल्म जबरदस्त हिट हुई। उनकी आवाज की वजह से पहले उन्हें यह फिल्म नहीं मिल रही थी। लेकिन वही आवाज आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। उनके जीवन में 90 की दशक में एक बार फिर उतार देखा गया लेकिन अपनी दूसरी पारी में वह फिर एक चट्टान की तरह खड़े हुए और आज भी वहीं कायम हैं।
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रतन टाटा: टाटा ग्रुप के मालिक रतन टाटा भी उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने असफलता का कड़वा स्वाद चखा है। उन्होंने टाटा का कार्यभार संभाला तो सबसे पहले रिटायरमेंट की उम्र 70 साल से घटाकर 65 साल कर दी जिसका कर्मचारियों ने विरोध भी किया। उस वक्त उनको अपने दो कंपनियां को दिवालिया घोषित करना पड़ा था लेकिन वह फिर उठे और टाटा को एक नए मुकाम पर लेकर गए।
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