{"_id":"d9b408ca49679be9f9c7a09987e19422","slug":"birth-anniversary-of-ex-president-rajendra-prasad","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'
Thu, 03 Dec 2015 03:07 PM IST
Updated Thu, 03 Dec 2015 03:07 PM IST
विज्ञापन
'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'
1 of 9
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि गोपाल कृष्ण गोखले से मिलने के बाद वे आजादी की लडाई में शामिल होने के लिए बेचैन हो गए। (तस्वीर में अपने बड़े भाई महेंद्र प्रसाद के साथ डॉ राजेंद्र प्रसाद, उनके बड़े भाई का उनके जीवन में बड़ा योगदान था, रवि शंकर कुमार/बीबीसी हिंदी के लिए।)
'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'
2 of 9
मगर परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी। 15-20 दिन तक काफी सोचने समझने के बाद अपने बडे भाई महेंद्र प्रसाद और पत्नी राजवंशी देवी को भोजपुरी में पत्र लिखकर देश सेवा करने की अनुमति मांगी। उनका खत को पढकर उनके बडे भाई रोने लगे। वे सोचने लगे कि उनको क्या जवाब दें। बडे भाई से सहमति मिलने पर ही राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्रता आंदोलन में उतरे। बाबू राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के भोजपुर क्षेत्र में जीरादेई नाम के गाँव में हुआ था जो अब सिवान जिले में है। (तस्वीर में राजेंद्र प्रसाद ने ये पत्र रूस के शहर सोची से पोस्टकार्ड पर लिखा था।)
'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'
3 of 9
13 साल की उम्र में राजेंद्र प्रसाद का विवाह राजवंशी देवी से हो गया। इस समय वे स्कूल में पढ रहे थे।राष्ट्रपति भवन में अंग्रेजियत का बोलबाला था जबकि राजवंशी देवी मानती थीं कि 'देश छोडो तो छोडो मगर अपना वेश मत छोडो। अपनी संस्कृति कायम रखो'। (राजेंद्र प्रसाद और उनकी पत्नी राजवंशी देवी बहुत सादगी से राष्ट्रपति भवन में रहते थे ।)
विज्ञापन
विज्ञापन
'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'
4 of 9
राजेंद्र प्रसाद गांधीजी के मुख्य शिष्यों में से एक थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ। तारा सिन्हा, डॉ। राजेंद्र प्रसाद की पोती हैं। उनका कहना है कि डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान की रूप रेखा तैयार की। मगर आज इस बात की चर्चा कहीं नहीं है। डॉ राजेंद्र प्रसाद के सम्मान में भारत में किसी प्रकार का कोई दिवस नहीं मनाया जाता है, ना ही संसार में उनके नाम पर कोई शिक्षण संस्थान ही है।
विज्ञापन
'ये झूठ है कि राजेंद्र प्रसाद खैनी खाते थे'
5 of 9
रात आठ बजते-बजते वो रात का खाना खा लेते थे। उनका खाना एकदम सादा होता था। फलों में आम उनको बहुत पसंद था। वे जल्दी सोते थे और बहुत सुबह जाग जाते थे। वकालत की पूरी पढाई उन्होंने सुबह उठकर ही की है। इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा में भी किया है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।