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डराते हैं तबाही के ये 10 दृश्य, हम सब के लिए हैं चेतावनी
Wed, 02 Dec 2015 07:18 PM IST
Updated Wed, 02 Dec 2015 07:18 PM IST
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ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक दुष्प्रभाव एशिया में ही पड़ेगा। प्रकृति जलवायु परिवर्तन से होने वाली विनाश लीला का ट्रेलर बार-बार दिखाती रहती है लेकिन इंसान है कि चेतने को तैयार ही नहीं। पढ़िए पिछले चंद सालों में प्रकृति ने कब-कब ढाया कहर।
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2013-14 की सर्दियों में अमेरिका और कनाडा में शीत लहर का कहर टूटा। भारी बर्फबारी और बारिश ने जीना दूभर कर दिया। भयंकर ठंड के कारण अमेरिका और कनाडा के स्कूल, कॉलेज बंद करने पड़े, दर्जनों उड़ानें रदद कर दी गई। नियाग्रा फाल की ये तस्वीर उन्हीं दिनों की है। आम दिनों में जहां पानी झरझर करता है, जलवायु परिवर्तन ने उन सर्दियों में उसे बर्फ बना डाला।
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नियाग्रा फाल आम दिनों में ऐसा दिखता है। ग्लोबल वार्मिंग ग्लेशियरों की बर्फ पिघला सकती है, तो झरनों का पानी भी जमा सकती है। जलवायु परिवर्तन का संकट यही है।
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18 अप्रैल, 2015 को माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप के पास आए बर्फीले तूफान से 16 नेपानी गाइडों की मौत हो गई थी। ये गाइड पर्वतारोहियों को रास्ता दिखाते थे। एवरेस्ट पर आया बर्फीला तूफान जलवायु परिवर्तना का नतीजा थी। हिमालय में बार्फीले तूफानों की आवृत्ति पिछले कई सालों से बढ़े हैं।
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2013 में उत्तराखंड में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, 5000 से अधिक लोग लापता हो गए और लाखों बेघर। उत्तराखंड की तबाही भारत में जलवायु परिवर्तन होने वाली 21वीं सदी की सबसे भयावह विभीषिका थी।
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