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बीफ खाने से होता है पर्यावरण को भारी नुकसान, जानिए कैसे
Thu, 22 Oct 2015 05:56 PM IST
Updated Thu, 22 Oct 2015 05:56 PM IST
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बीफ खाने से होता है पर्यावरण को भारी नुकसान, जानिए कैसे
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बीफ खाने को लेकर देश भर में बेचैनी है और सभी तरह के नेता सांडों की तरह भिड़ रहे हैं। धार्मिक मत तो एक पक्ष है लेकिन बीफ न खाने को लेकर बहुत मजबूत पर्यावरणीय वजहें भी हैं। संयुक्त राष्ट्र के पर्वायवरण कार्यक्रम ने बीफ को 'जलवायु के लिए नुक़सानदेह गोश्त' बताया है। बीफ के हर ग्राम को पकाने के लिए बहुत सारी ऊर्जा खर्च होती है। औसतन हर एक हमबर्गर को बनाने में वातावरण में तीन किलो कार्बन उत्सर्जन होता है।
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आज अपने ग्रह को बचाने के लिए ऐसे खाने की जरूरत है जो लंबे समय तक नुकसान न दे और दुर्भाग्य से गोश्त का उत्पादन बहुत ऊर्जा खाने वाली प्रक्रिया है। विज्ञान के क्षेत्र के जाने माने लेखक पल्लव बागला ने एक लेख में कहा है कि रोम में संयुक्त राष्ट्र इकाई फूड एंड एग्रीकल्चर संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक गोश्त खाने वाले और खासकर बीफ खाने वाले दुनिया के पर्यावरण के प्रति सबसे कम दोस्ताना हैं।
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यह अचरज की बात लग सकती है लेकिन दुनिया में बीफ उत्पादन जलवायु परिवर्तन की एक मुख्य वजह है। कुछ तो यह भी कहते हैं कि बीफ गोश्त उत्पादन उद्योग का 'शैतान' है। लेकिन यह भी कह दें कि बीफ खाने के संदेह में एक आदमी की पीट-पीटकर हत्या को किसी भी समाज में सही नहीं ठहराया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि बीफ छोड़ देने से दुनिया का कार्बन उत्सर्जन कारों के इस्तेमाल के मुक़ाबले कई गुना कम हो जाएगा!
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अगर आप आंकड़ों पर नजर डालें तो समझ आ जाएगा कि क्यों मवेशी उत्पादन का हिस्सा गैसों के उत्सर्जन के जरिये ग्लोबल वॉर्मिंग में परिवहन क्षेत्र के मुकाबले अधिक है जिससे जलवायु परिवर्तन हो रहा है। एफएओ के अनुसार वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में मवेशी क्षेत्र का हिस्सा 18 फीसदी है जबकि परिवहन क्षेत्र का 15 फीसदी। 'लाइवस्टॉक्स लॉंग शैडोः एनवायरोन्मेंटल इश्यू एंड ऑप्शन' नामक अध्ययन में एफएओ का निष्कर्ष है कि "मवेशी क्षेत्र एक मुख्य कारक है और जलवायु परिवर्तन में इसका हिस्सा परिवहन क्षेत्र से ज़्यादा हिस्सा है।"
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पर्यावरण हितैषी इस बारे में आवाजें उठाने लगे हैं और गोश्त खाने वालों को सोचने को कह रहे हैं। इनमें ताजा नाम जलवायु परिवर्तन पर चर्चा के लिए कुछ हफ्ते बाद पेरिस में होने वाले बड़े जलवायु सम्मेलन की करिश्माई फ्रांसीसी राजदूत लॉरेंस तुबिआना का है। उन्होंने कहा, "बड़ी मात्रा में गोश्त खाए जाने से बहुत सारी चीजें नष्ट हो रही हैं (इसके लिए अभियान होना चाहिए) और बहुत ज्यादा गोश्त खाने वालों को इसे रोकना चाहिए। कम से कम एक एक दिन तो बिना गोश्त के गुजारो।"
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