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कभी राजीव के खास दोस्त थे स्वामी, जानें 10 दिलचस्प बातें

Sat, 19 Dec 2015 01:21 PM IST
Updated Sat, 19 Dec 2015 01:21 PM IST
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कभी राजीव के खास दोस्त थे स्वामी, जानें 10 दिलचस्प बातें

freindship of rajeev gandhi and subramanian swamy

नेशनल हेरल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को अदालत तक लाने वाले सुब्रमण्यम स्वामी अपने सार्वजनिक जीवन में कई वजहों से चर्चा में रहे हैं। कभी प्रतिभाशाली गणितज्ञ के तौर पर मशहूर रहे स्वामी को कानून का जानकार भी माना जाता है। उनके अब तक के सफर से जुडी 10 दिलचस्प बातें-

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स्वामी के पिता सीताराम सुब्रमण्यम जाने माने गणितज्ञ थे। वे एक समय में केंद्रीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट के डायरेक्टर थे। पिता की तरह ही स्वामी भी गणितज्ञ बनना चाहते थे। उन्होंने हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद से भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता पढने गए।

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स्वामी के जीवन का विद्रोही गुण पहली बार कोलकाता में जाहिर हुआ। उस वक्त भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता के डायरेक्टर पीसी महालानोबिस थे, जो स्वामी के पिता के प्रतिद्वंद्वी थे। लिहाजा उन्होंने स्वामी को खराब ग्रेड देना शुरू किया। स्वामी ने 1963 में एक शोध पत्र लिखकर बताया कि महालानोबिस की सांख्यिकी गणना का तरीका मौलिक नहीं है, बल्कि यह पुराने तरीके पर ही आधारित है।

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स्वामी ने महज 24 साल में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली। 27 साल में वे हार्वर्ड में गणित पढाने लगे थे। 1968 में अमृत्य सेन ने स्वामी को दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स में पढाने का आमंत्रण दिया। स्वामी दिल्ली आए और 1969 में आईआईटी दिल्ली से जुड गए।

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उन्होंने आईआईटी के सेमिनारों में ये कहना शुरू किया कि भारत को पंचवर्षीय योजनाएं खत्म करनी चाहिए और विदेशी फंड पर निर्भरता हटानी होगी। इसके बिना भी भारत 10 फीसदी की विकास दर को हासिल कर सकता है। स्वामी तब इतने महत्वपूर्ण हो चुके थे कि उनकी राय पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था यह विचार वास्तविकता से परे है।

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