{"_id":"c3457a3554e83670e320c16b6335c0b4","slug":"kashinath-singh-on-prize-return-issue","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
Mon, 02 Nov 2015 05:28 AM IST
Updated Mon, 02 Nov 2015 05:28 AM IST
विज्ञापन
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
1 of 8
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
साहित्यकार अनायास ही पुरस्कार नहीं लौटा रहे हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र ही नहीं, हिंदी क्षेत्र के लेखकों को भी धमकियां दी जा रही हैं। धमकी भरे फोन काल के चलते कथाकार डॉ. काशीनाथ सिंह तीन रात नहीं सो पाए थे। (अजय राय/अमर उजाला, वाराणसी)
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
2 of 8
पहले डॉ. सिंह ने इन फोन कालों को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद उन्हें लगने लगा कि सुनियोजित ढंग से लेखकों से उनकी बोलने की आजादी छीनी जा रही है। इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। काफी मंथन के बाद उन्होंने साहित्य अकादमी को पुरस्कार लौटा दिया।
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
3 of 8
डॉ. काशीनाथ सिंह का कृष्ण कथा पर आधारित उपन्यास ‘उपसंहार’ फरवरी 2014 में प्रकाशित हुआ। उसी साल सितंबर महीने में उनके पास धमकी वाली फोन कालें आने लगीं। रविवार को अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक हर घंटे के अंतराल पर फोन कालें आ रही थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
4 of 8
इन कालों के चक्कर में वे तीन रातों तक सो नहीं पाए। हारकर उन्होंने मोबाइल फोन एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया। उन्होंने समझा कि स्थानीय साहित्यकार ही उन्हें तंग करने के लिए फोन करवा रहे हैं। उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत नहीं की, लेकिन साहित्यिक पत्रिका ‘तद्भव’ के संपादक और कथाकार अखिलेश से इसका साझा जरूर किया। उन्होंने सभी फोन नंबर अखिलेश को मुहैया कराए। अखिलेश ने नंबर को ट्रेस कराया तो पता चला कि गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, हरियाणा और पंजाब के नंबरों से ये कालें की गई थीं।
विज्ञापन
काशीनाथ सिंह ने बताया आखिर उन्होंने क्यों लौटाया पुरस्कार?
5 of 8
डॉ. सिंह ने बताया कि फोन करने वालों के स्वर अलग-अलग थे, लेकिन उनके सवाल एक जैसे ही होते थे। फोन करते ही पूछते थे, ‘काशीनाथ बोल रहे हो’, ‘तुम्ही ने उपसंहार लिखा है।’ उसके बाद कहते कि ‘तुमने कृष्ण पर क्यों लिखा, मुहम्मद साहब और ईसा मसीह पर क्यों नहीं लिखा।’ उनका लहजा धमकी देने वाला ही होता था। डॉ. सिंह ने बताया कि उनसे बातचीत से यही लगा कि उनमें से किसी ने उपन्यास नहीं पढ़ा था।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।