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ये तस्वीरें देखकर आप भी कहेंगे जसवंत की जय हो
रविंदर सिंह रॉबिन/चंडीगढ़ से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:40 PM IST
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लकवे के अटैक में जसवंत के दोनों हाथ और एक पैर उस समय बेकार हो गए थे जब वह उनका ठीक से इस्तेमाल करना शुरू कर ही रहे थे।इसलिए उनकी जिंदगी कभी आसान नहीं रही। लेकिन 30 साल के जसवंत एक ही पैर से टीवी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दुरुस्त करते हैं।अमृतसर के नौशेरा गांव के रहने वाले जसवंत खाना खाने के अलावा अपने रोजमर्रा के काम भी एक पैर से ही करते हैं।जसवंत अपने लकवाग्रस्त पांव के चलते चल तो नहीं पाते लेकिन अपने सही पैर से कूदते हैं। वह कहते हैं कि बचपन से ही वह इलेक्ट्रीशियन बनना चाहते थे। ( रविंदर सिंह रॉबिन चंडीगढ़ से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए )
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जसवंत बताते हैं कि बीमारी के बाद माता-पिता की प्रेरणा और अपनी दृढ इच्छाशक्ति से उन्होंने उपकरणों में गडबडी ढूंढना और उन्हें ठीक करना सीखा।वे कहते हैं, "मेरे उस्ताद ने बहुत धैर्य के साथ मुझे अपने पैर से पेचकस पकडना और मिलिमीटर, सोल्डरिंग, आयरन जैसे दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल करना सिखाया।"आंखों में चमक के साथ वह यह भी बताते हैं कि वह अपने पैर से लिखते भी हैं।
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जसवंत कहते हैं, "जिन लोगों के साथ मेरे जैसी त्रासदी होती है वे अक्सर भीख मांगकर गुजारा करते हैं लेकिन मैंने अपनी शारीरिक कमजोरी को आडे नहीं आने दिया और इसके बजाय समाज में अपने लिए इज्जत बनाई।"जसवंत के पिता कश्मीर सिंह ने बीबीसी को बताया कि जब जसवंत महज ढाई साल के थे तब उनके दोनों हाथ और एक पैर लकवे से बेकार हो गए थे।
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उन्होंने कहा, "हम उसे कई डॉक्टरों के पास ले गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
आज हमने और जसवंत ने इस सबके साथ जीना सीख लिया है। जब जसवंत 15 साल के थे
तब उन्होंने टीवी की मरम्मत का काम सीखा और जल्दी ही इसमें सिद्धहस्त हो
गए।"
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उन्होंने कहा, "जसवंत ने कभी अपने लिए पैसे की मांग नहीं की और आज उन्हें खुद पर गर्व है।"उन्होंने कहा, "जसवंत ने कभी अपने लिए पैसे की मांग नहीं की और आज उन्हें खुद पर गर्व है।" "जब पैसा देने की बात आती है तो वे ताना मारने लगते हैं कि हम तो तुम्हारी मदद करने के लिहाज से तुम्हारे पास आए थे। वरना दूसरे मैकेनिक भी तो हैं।"जसवंत कहते हैं कि सरकार को उनके जैसे लोगों की मदद के लिए हाथ बढाना चाहिए जो तमाम मुश्किलों के बावजूद जीवन में सफलता हासिल करते हैं।
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