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‘वो दस मिनट मैं जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी'

Sat, 27 Feb 2016 09:06 AM IST
Updated Sat, 27 Feb 2016 09:06 AM IST
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‘वो दस मिनट मैं जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी'

madhuri fought with chain snatchers

पहड़िया के श्रीनगर कॉलोनी में बीते साल 24 दिसंबर को चेन स्नैचरों के हौसले पस्त कर देने वाली माधुरी को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार देने का प्रस्ताव किया गया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद माधुरी को प्रमाण पत्र के साथ एक लाख रुपये का नगद पुरस्कार मिलेगा। पहड़िया स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में कैंटीन चलाने वाली माधुरी श्रीनगर कॉलोनी में रहती हैं। (ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी)

‘वो दस मिनट मैं जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी'

madhuri fought with chain snatchers

पति रमेश पहड़िया स्थित एक होटल में काम करते हैं और ससुर लालचंद मौर्या चौक में कपड़े की दुकान चलाते हैं। एक साल पहले ही उन्होंने श्रीनगर कॉलोनी, फेस-3 में मकान बनवाया है। 24 दिसंबर की सुबह करीब साढ़े नौ बजे माधुरी कैंटीन से घर लौट रही थीं। घर से करीब 50 मीटर पहले बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और उनकी सोने की चेन छीनने लगे। विरोध करते हुए माधुरी दोनों से भिड़ गईं।

‘वो दस मिनट मैं जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी'

madhuri fought with chain snatchers

एक भाग गया जबकि दूसरे को पकड़ लिया गया। इसी बीच छीना झपटी में बदमाश की पिस्टल से चली गोली से लालचंद घायल हो गए। दिनदहाड़े वारदात से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मौके पर जुटे लोग माधुरी के साहस को देख चकित रह गए। पूछताछ में पता चला कि पकड़ा गया बदमाश पटना, बिहार निवासी अनीस उर्फ राहुल है। 2012 में भी वह लूट के मामले में जेल जा चुका है। मौके से भागा बदमाश पटना का ही रहने वाला रवि सिंह बताया गया था। वह अब तक नहीं पकड़ा गया।

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‘वो दस मिनट मैं जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी'

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‘वो दस मिनट मैं जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी। बदमाशों ने पहले तो मुझे थप्पड़ मारकर गिरा दिया। एक पल के लिए तो समझ ही नहीं पाई कि हो क्या रहा है। मगर मैंने भी हौसला नहीं खोया। पति से तोहफे में मिली चेन को मैं किसी भी हाल में गंवाना नहीं चाहती थी। भगवान का शुक्र है कि उन्होंने मेरा साहस डिगने नहीं दिया।’ अमर उजाला से बातचीत में यह कहा पहड़िया के श्रीनगर निवासी माधुरी मौर्या ने।

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madhuri fought with chain snatchers

24 दिसंबर 2015 को उन्होंने एक चेन स्नैचर को दिलेरी के साथ दबोच लिया था। उन्हें वीरता पुरस्कार देने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। पहड़िया स्थित एक इंजीनियरिंग में कैंटीन चलाने से पहले माधुरी अध्यापन का काम करती थीं। नेशनल इंटर कॉलेज पीलीकोठी में उन्होंने करीब पांच सालों तक पढ़ाया। पहले वह परिवार के साथ चौखंभा क्षेत्र में रहती थीं। बाद में श्रीनगर कॉलोनी में अपना मकान बनने पर यहां आ गईं।

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