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नहीं रहे मशहूर शायर नाजिम जाफरी, लीवर की थी बीमारी

Sun, 03 Jan 2016 03:09 AM IST
Updated Sun, 03 Jan 2016 03:09 AM IST
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नहीं रहे मशहूर शायर नाजिम जाफरी, लीवर की थी बीमारी

nazim jafri is no more now

जाने-माने शायर डॉ. नाजिम जाफरी का शनिवार को दोपहर बाद इंतकाल हो गया। महमूरगंज के एक निजी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वह 75 साल के थे। उर्दू सॉनेट के तो वह वाहिद शायर थे ही, नौहा और गजलों में भी उनका कोई सानी नहीं था। इंतकाल की खबर मिलते ही दालमंडी स्थित उनके घर पर मुरीदों के अलावा शहर के मानिंद लोगों का तांता लग गया। (अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी)

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दरगाहे फातमान में रविवार की दोपहर उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा। बात-बात पर शेर और नौहे कहने वाले शायर जाफरी ने दोपहर बाद करीब 2:30 बजे जिंदगी को हमेशा के लिए अलविदा कहा। छह महीने से वे लीवर की बीमारी से पीड़ित थे। हालत बिगड़ने पर शुक्रवार की सुबह परिवारीजनों ने उनको अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके पांच पुत्र और दो पुत्रियां हैं।

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अंतिम समय अस्पताल में उनके दो पुत्र अली अब्बास जाफरी और हसन जाफरी साथ थे। अंजुमन हैदरी के सरपरस्त रहे जाफरी साहब के इंतकाल की खबर मिलने के बाद दालमंडी में मातमी माहौल बन गया। उनके घर से लगे मुसाफिरखाने के आसपास की तमाम दुकानें बंद कर दी गईं। अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद बबलू, क्रिकेटर जावेद अख्तर के अलावा मौलाना अकील, मौलाना शमीमुन हसन, मौलाना नदीम असगर, हैदर हुसैन समेत तमाम लोग उनके घर पहुंचे।

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पहली जनवरी, 1940 को जन्मे नाजिम जाफरी मशहूर शायर के साथ ही शहर के बेहतरीन चिकित्सकों में भी एक थे। 1965 में रांची मेडिकल कॉलेज से उन्होंने एमबीबीएस किया था। बांसफाटक स्थित सेवा सदन अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिकारी भी रह चुके थे। गजल संग्रह ‘किर्तासे-आगही’, ‘खंजर बोलता है’, उर्दू सॉनेट ‘तनवीरे-खयाल’ के अलावा नौहा और सलाम विधा में उन्होंने कुल 11 किताबें लिखीं हैं।

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चार किताबों का संपादन भी किया। उन्हें 1993 में इम्तियाजे मीर अवार्ड से नवाजा गया था। 2006 में उनकी किताब ‘खंजर बोलता है’ का विमोचन देश के जानेमाने शायर निदा फाजली और गजल सम्राट जगजीत सिंह की मौजूदगी में हुआ था।

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