आस्था की डुबकी, गंगा घाट पर दिखे अनोखे नजारे
मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सोमवती अमावस्या और ग्रहों के विशेष योग में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए लाखों की कतार संगम की ओर बढ़ती गई। ज्यादातर स्नानार्थियों ने रात मेला क्षेत्र में बिताकर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान किया। (ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद)
आस्था की डुबकी, गंगा घाट पर दिखे अनोखे नजारे
अमावस्या तिथि का संचरण रविवार रात 9:44 से होने के बाद सोमवार भोर से पहले ही संतों, महात्माओं के साथ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी स्नान आरंभ कर दिया। अन्य स्नानपर्व से इतर मौनी अमावस्या पर ज्यादातर लोगों ने मौन रहकर स्नान किया। परिवार के लोगों और परिजनों जो घर में रह गए थे, उनके नाम भी डुबकी लगाई।
आस्था की डुबकी, गंगा घाट पर दिखे अनोखे नजारे
गंगा और माधव पूजा कर काला तिल, काला वस्त्र आदि का दान किया और गंगा की रेती माथे पर लगा अपने घरों को लौट गए। माघ मेला में आए ज्यादातर साधु-संन्यासियों का स्नान भोर से पहले तीन बजे से ही शुरू हो गया। सूर्य निकलने से पहले संगम में डुबकी लगाने की परंपरा का निर्वाह करते हुए तमाम कल्पवासियों ने भी ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया।
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ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, चारधाम यात्रा समिति के उपाध्यक्ष स्वामी सुबुधानंद ब्रह्मचारी, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, काशी सुमेरूपीठाधीश्वर नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ, सतुआबाबा संतोषदास, स्वामी विमलाश्रम आदि ने अपने शिष्यों और भक्तों के साथ त्रिवेणी स्नान किया। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने इस मौके पर कहा मौनी अमावस्या का स्नान नई ऊर्जा देने वाला है।
आस्था की डुबकी, गंगा घाट पर दिखे अनोखे नजारे
मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु स्नान के बाद टीका, चंदन लगवाने के लिए लोग तीर्थ पुरोहितों के डेरे पर जुटते रहे। विधिविधान से पूजा कराने के लिए पुरोहितों ने बाहर से भी पंडित बुलाए थे। भीड़ इतनी बढ़ गई कि शाम चार बजे के बाद तो चंदन, टीका ही कम पड़ गया। तीर्थपुरोहित अनूप त्रिपाठी निशान पीलीकोठी ने कहा, मां गंगा मइया का आशीर्वाद संगम नगरी पर बरसा।