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दो बार आजीवन कारावास पाने वाले सावरकर की पूरी कहानी

Fri, 26 Feb 2016 07:16 PM IST
Updated Fri, 26 Feb 2016 07:16 PM IST
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दो बार आजीवन कारावास पाने वाले सावरकर की पूरी कहानी

story of veer savarkar

देश की आजादी के आंदोलन में बहुत लोगों ने अपना बलिदान दिया लेकिन कुछ का योगदान ऐसा है, जो इतिहास के पन्नों से पूरी तरह बाहर नहीं आ सका। कुछ ऐसा ही योगदान है वीर वारकर का। आज वीर सावरकर की पुण्यतिथि है, आइए डालते हैं उनके जीवन पर कुछ निगाह।


दो बार आजीवन कारावास पाने वाले सावरकर की पूरी कहानी

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माना जाता है इतिहास के पन्नों ने आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर के योगदान को वाले जगह नहीं दी जिसके वो हकदार थे। लेकिन उनके चाहने वाले आज भी उन्हें आजादी का ऐसा सिपाही मानते हैं जो जीवन भर अपने सिद्धांतों के साथ ब्रिटिश सरकार से लोहा लेता रहा।

दो बार आजीवन कारावास पाने वाले सावरकर की पूरी कहानी

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सावरकर की पहचान क्रांतिकारी, कवि, समाजसेवी, भाषाविद के तौर पर भी है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन को उन्होंने अपनी कलम से सूचीबद्ध किया था।

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सावरकर को उस दौर का सबसे बड़ा हिंदूवादी नेता भी माना जाता है। वह अखिल भारतीय हिंदू महासभा के छह बाहर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। जीवनभर वह हिंदुत्व का झंडा थामकर संघर्ष करते रहे। लेकिन हिंदुत्व के प्रति उनका यह प्रेम कुछ लोगों को रास नहीं आया।

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वीर सावरकर अपने जीवनकाल में कई बार जेल गए। इनमें सबसे ज्यादा लंबा समय 1911 से 1921 तक अंडमान की सेल्युलर जेल में रहा। उन्हें काले पानी की सजा सुनाई गई। वीर सावरकर ही देश के अकेले ऐसे व्यक्ति रहे जिन्हें आजीवन कारावास की दुहरी सजा सुनाई गई।

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