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शौक नहीं, इनके लिए ईष्ट देवता है सोना, ये हैं गोल्डन बाबा

Sat, 08 Aug 2015 08:06 AM IST
Updated Sat, 08 Aug 2015 08:06 AM IST
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शौक नहीं, इनके लिए ईष्ट देवता है सोना, ये हैं गोल्डन बाबा

this is golden baba who wear a lot of gold

दिल्ली के गोल्डन बाबा (सुधीर कुमार) को अब सोना पहनने का शौक नहीं रह गया है, बल्कि सोना ईष्ट बन चुका है। उनका मानना है कि भोले शंकर ने आशीर्वाद दिया है कि जब तक मैं सोना पहनूंगा खुश रहूंगा। शाहदरा गांधीनगर क्षेत्र के रहने वाले गोल्डन बाबा पहली बार कांवड़ लेने 1992 में अकेले गए थे। भगवान शिव में ऐसी लगन लगी कि हर साल कांवड़ लाने लगे। उन्होंने बताया कि कांवड़ का उद्देश्य भगवान शिव को प्रसन्न करना है। (ब्यूरो/अमर उजाला, मोदीपुरम (मेरठ))

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शिव के आशीर्वाद से ही सबकुछ मिला है। गोल्डन बाबा हरिद्वार के जूना अखाड़ा से भी जुड़े हैं। अपने जीवन में वह गौ माता को राष्ट्र का दर्जा दिलाना चाहते हैं। इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे। गोल्डन बाबा कांवड़ यात्रा के अलावा पूरे वर्ष गरीब कन्याओं की शादी कराकर समाज सेवा भी करते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए वह गुरुकुल कांगड़ी स्कूल में भी दान देते हैं। उन्होंने बताया कि जब तक उनकी सांस चलेंगी तब तक समाज सेवा करते रहेंगे।

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गोल्डन बाबा ने 11 किलो सोना पहन रखा है। जिस थाना क्षेत्र से गोल्डन बाबा निकल रहे हैं, वहीं पर उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई जा रही है। शुक्रवार को दोपहर में जब गोल्डन बाबा का काफिला हाईवे से गुजरा तो आगे आगे दौराला थाने की पुलिस की जीप चल रही थी, पीछे गोल्डन बाबा की फॉरच्यूनर थी। भारी भरकम फौज के साथ बाबा दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। टोल प्लाजा पर डीजीएम कैप्टन प्रिंस मैथ्यूज, टोल प्लाजा मैनेजर आशीष गुप्ता, सुरक्षा अधिकारी मनिंदर विहान, कंसलटेंट विजय कंसल ने बाबा का स्वागत किया।

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गोल्डन बाबा ने बताया कि महीनों पहले उन्होंने दिल्ली गांधीनगर में एक भंडारा कराया था। जहां पर एक संत ने 12 साल से अन्न छोड़ रखा था। संत के लिए सोने के बर्तन मंगाए और उसमें उन्हें खाना खिलाया था। संतों के लिए यह अभी तक का सबसे बड़ा भंडारा था। इसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे।

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गोल्डन बाबा से जब उनके परिवार के बारे में पूछा तो उन्होंने पत्नी के बारे में बताया। बाबा ने बताया कि उनके कोई संतान नहीं है, लेकिन कभी उसकी कमी महसूस नहीं हुई। मेरे साथ चल रही 350 सेवादारों की फौज ही मेरी संतान की तरह है।

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