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स्वाति बेडेकर: जिन्होंने केवल सस्ते पैड ही नहीं बनाए बल्कि पति की मदद से दिया इन्हें नष्ट करने का उपाय

Sat, 22 Aug 2020 09:20 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sat, 22 Aug 2020 09:20 AM IST
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swati bedekar makes cheaper sanitary pads and her husband made its disposable machine
swati bedekar - फोटो : social media

अच्छी सेहत के लिए स्वच्छता बेहद जरूरी है। लेकिन ये बात जब महिलाओं के लिए कही जाती है तो ज्यादातर लोगों का इस पर ध्यान नहीं जाता। जब मासिक धर्म के दौरान जरूरी स्वच्छता को लेकर जागरुक करने स्वाति बेडेकर गुजरात के एक गांव में गईं तो गांव की महिलाओं की बातों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। कि कैसे उस गांव की महिलाओं की जिंदगी हर महीने दांव पर लग जाती थी। महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ होने वाले इस खिलवाड़ के लिए वे खुद जागरुक होने के लिए तैयार नहीं थी। लेकिन स्वाति ने हार नहीं मानी। गीतों और लाखों तरीकों के जतन के बाद आखिर उनकी जीत हुई। आज वो वात्सल्य फाउंडेशन की मदद से सस्ते सैनेटरी पैड बना रही हैं। 



 
swati bedekar makes cheaper sanitary pads and her husband made its disposable machine
स्वाती अपनी कहानी बताते हुए कहती हैं कि वो सरकार के एक प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए गांव-गांव में जाती थीं। जहां पर उन्हें गणित और विज्ञान पढ़ाने का जिम्मा दिया गया था। जब वो कक्षा में पढ़ाती तो देखती कि कुछ बच्चियां चार-पांच दिनों के लिए गायब हो जाती। जब उनसे इस बार में बात किया तो पता चला कि वो पीरियड के चलते स्कूल नहीं आती हैं। बच्चियों ने बताया कि वो कैसे स्कूल आएं, खून बहता रहता है। इस बात को सुन स्वाति को हैरानी हुई कि कैसे 21वीं सदी में भी यहां की महिलाएं इस तरह का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। 

तब स्वाति ने गांव की महिलाओं से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि अगर उनके पास ब्लीडिंग रोकने के लिए पुराना कपड़ा नहीं होता है तो वो राख और मिट्टी का इस्तेमाल करती हैं। इस भयावह परिस्थिति को सुनने के बाद स्वाति ने उन महिलाओं को जागरूक करने के बारे में सोचा। लेकिन गांव की महिलाओं ने इसे समझने से इंकार कर दिया। उन्हें तो महीने के पांच दिन दर्दनाक और सेहत के साथ खिलवाड़ करते बिताने में कोई दिक्कत नहीं थी। वो लोग पैड्स को शहर की चीज समझकर प्रयोग करने से मना करती थीं।


 
swati bedekar makes cheaper sanitary pads and her husband made its disposable machine
लेकिन स्वाति ने हार नहीं मानी। जब उन्होंने इस काम में वहां के पुरुषों को शामिल किया तो उन्हें उन आदमियों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे गाने के माध्यम से महिलाओं ने स्वाति की बात को समझा। लेकिन अब स्वाति के सामने ये दिक्कत थी कि वो महिलाओं को सस्ते में पैड कैसे उपलब्ध करवाएं। 

तब स्वाति ने इस बारे में नेट पर बता किया। इंटरनेट पर रिसर्च किया, तो पता चला कि कोयमबटूर के अरुणाचलम मोरुगनानाथाम सेनेटरी नैपकिन का एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो सस्ता होने के साथ ही काफी इफेक्टिव भी है। मैंने उस मॉडल को समझा और गाँव की कुछ महिलाओं को भी समझाया और फिर पैड्स बनाने की ट्रेनिंग शुरू कर दी।

लेकिन अब महिलाओं के सामने इन पैड्स को फेंकने की दिक्कत थी। क्योंकि गांव के पुरुषों को लगता था कि अगर ये गंदे पैड्स गांव में फेंके जाएंगे तो इससे खेत की मिट्टी खराब होगी। 

स्वाति की इस परेशानी का हल निकाला उनके इंजीनियर पति ने। उन्होंने ऐसी मशीन तैयार की जो इन पैड्स को आसानी से डिस्पोज कर देती थी वो भी इकोफ्रेंडली तरीके से। कम लागत में तैयार इस मशीन को गांववाले भी आसानी से खरीद सकते थे।

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