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Holi Bhai Dooj 2026: शुभ योग में होली भाई दूज आज, जानें शुभ मुहूर्त और तिलक विधि

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Megha Kumari Updated Thu, 05 Mar 2026 11:18 AM IST
सार

Holi Bhai Dooj 2026: इस साल 5 मार्च 2026 को होली भाई दूज मनाया जा रहा है। यह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर पड़ता है। आइए इसके महत्व को जानते हैं।

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Holi Bhai Dooj 2026 - फोटो : अमर उजाला

Holi Bhai Dooj 2026: पंचांग के मुताबिक, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। यह होली के दो दिन बाद आता है, इसलिए इसे होली भाई दूज भी कहते हैं। मान्यता है कि, यह पर्व भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और खुशियों को बढ़ाता है। इस साल 5 मार्च 2026 को होली भाई दूज  है। इस शुभ तिथि पर बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं। कहते हैं कि, बहन के हाथों से तिलक करवाने से भाई को नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति और तरक्की का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में आइए इस दिन की तिलक विधि को जानते हैं।

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Holi Bhai Dooj 2026 - फोटो : adobe

शुभ मुहूर्त
होली भाई दूज पर सुबह से लेकर शाम 5 बजर 3 मिनट तक शुभ समय बना रहेगा। इसके अलावा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शूल योग का संयोग बना हुआ है। 

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Holi Bhai Dooj 2026 - फोटो : freepik
तिलक विधि
  • होली भाई दूज पर आप सबसे पहले साफ थाली में रोली, चावल, फूल, सूखा नारियल और मिठाई-फल को रख लें।
  • इसके बाद थाली से शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।
  • अब आप घर के साफ स्थान पर आटे से एक चौक तैयार कर लें। 
  • भाई को उस स्थान के पास बैठाएं और उसे तिलक लगाएं।
  • इस दौरान भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की की कामना करते हुए उसे मिठाई खिलाएं।
  • कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें।
  • भाई को अब सूखा नारियल का गोला दें और आरती करें।
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Holi Bhai Dooj 2026 - फोटो : freepik
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।


 
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