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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी में प्यास से हालत खराब हो तो क्या पी सकते हैं पानी? जानें व्रत के नियम
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shweta Singh
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:07 PM IST
सार
निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीना कब उचित माना जाता है? जानें व्रत के नियम, धार्मिक मान्यताएं और आपात स्थिति में अपनाई जाने वाली विधि।
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nirjala ekadashi
- फोटो : amar ujala
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Nirjala Ekadashi Jal Peene Ke Niyam: निर्जला एकादशी को सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु की आराधना करते हुए अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत करता है, उसे सभी 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। लेकिन कई बार व्रत के दौरान तेज गर्मी, कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण प्यास बहुत अधिक लग सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गला सूख जाए और स्थिति गंभीर हो जाए तो क्या पानी ग्रहण किया जा सकता है? आइए जानते हैं निर्जला एकादशी व्रत में जल ग्रहण करने से जुड़े नियम और मान्यताएं।
निर्जला एकादशी में पानी क्यों नहीं पीते?
- फोटो : अमर उजाला
निर्जला एकादशी में पानी क्यों नहीं पीते?
निर्जला एकादशी का अर्थ ही है बिना जल के किया जाने वाला व्रत। इस दिन व्रती सूर्योदय से पहले स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद अगले दिन सूर्योदय तक अन्न, जल, फल, दूध आदि का सेवन नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस कठिन तप और भगवान विष्णु की भक्ति से व्यक्ति को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसी कारण निर्जला एकादशी को सबसे फलदायी एकादशियों में से एक माना जाता है।
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किन लोगों को मिल सकती है छूट?
- फोटो : adobestock
किन लोगों को मिल सकती है छूट?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत हर व्यक्ति के लिए समान रूप से कठिन नहीं होता। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या किसी बीमारी से पीड़ित लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्रत में बदलाव कर सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को बिना जल के रहने से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने की संभावना हो, तो वह फलाहार या जल ग्रहण करते हुए भगवान विष्णु की पूजा कर सकता है। मान्यता है कि भगवान भाव और श्रद्धा देखते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया व्रत और भक्ति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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अगर प्यास से हालत खराब हो जाए तो क्या करें?
अगर प्यास से हालत खराब हो जाए तो क्या करें?
निर्जला एकादशी का संकल्प जल त्याग का होता है, इसलिए सामान्य स्थिति में पानी पीना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। लेकिन यदि स्वास्थ्य बहुत बिगड़ जाए या जीवन पर संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो धर्म परंपराओं में कुछ विशेष परिस्थितियों में राहत का उल्लेख मिलता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी आपात स्थिति में व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जल ग्रहण कर सकता है। क्योंकि शरीर की रक्षा करना भी आवश्यक माना गया है।
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आपात स्थिति में पानी पीने की मान्यता
- फोटो : Adobe Stock
आपात स्थिति में पानी पीने की मान्यता
कुछ धर्माचार्यों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति निर्जला एकादशी का कठोर व्रत रख रहा है और बहुत अधिक कमजोरी महसूस कर रहा है, तो पूजा-पाठ और भगवान विष्णु का स्मरण करने के बाद जल ग्रहण कर सकता है। कुछ परंपराओं में यह भी मान्यता है कि यदि व्रत पूरा करना संभव न हो तो सूर्यास्त के बाद कुछ समय प्रतीक्षा करके जल ग्रहण किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में इसके नियम अलग हो सकते हैं।
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