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कामदा एकादशी: जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाती है यह एकादशी

Tue, 27 Mar 2018 07:28 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 27 Mar 2018 07:28 AM IST
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story about kamada ekadashi vrat and puja vidhi

चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में दो बार एकादशी आती है। जोकि एक एकादशी शुक्लपक्ष को आती है जबकि दूसरी कृष्ण पक्ष पर। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कामदा एकादशी का व्रत रखने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।


 

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शास्त्रों में काम, क्रोध और लोभ इन तीन को मूल कारण माना गया है। काम पीड़ित होने पर व्यक्ति के अंदर अच्छे बुरे का फर्क करने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे ही पापों से मुक्ति के लिए शास्त्रों में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने का विधान है। इस एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।

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इस व्रत में मन को संयमित रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें और दैनिक कार्य करते हुए मन में भगवान को याद करते रहें। कामदा एकादशी पर सुबह-सुबह स्नान करके भगवान विष्णु को फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल आदि से पूजन करना शुभ होता है।

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कामदा एकादशी की व्रत कथा
मान्यता के अनुसार भोगीपुर नगर में पुण्डरीक नामक नाग राज करता था। इनके दरबार में गायन और वादन में निपुण किन्नर व गंधर्व रहा करते थे। एक दिन ललित नाम का गन्धर्व दरबार में गायन कर रहा था। अचानक उसे अपनी पत्नी की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय एवं ताल बिगड़ गया। इससे नाराज होकर पुण्डरीक ने ललित को राक्षस बन जाने का शाप दे दिया।


 
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ललित के राक्षस बन जाने पर उसकी पत्नी ललिता दुःखी रहने लगी। एक दिन वन में ललिता को ऋष्यमूक ऋषि मिले। इन्होंने ललिता के दुःख को जानकर चैत्र शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने ऋषि के बताए नियम के अनुसार व्रत पूरा किया। इसके बाद व्रत का फल अपने पति ललित को दे दिया। इससे ललित वापस राक्षस से गंधर्व रुप में लौट आया। इस व्रत के पुण्य से ललित और ललिता दोनों को उत्तम लोक में भी स्थान प्राप्त हुआ।

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