Vijaya Ekadashi 2026: हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और पीली चीजों का दान करना शुभ होता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती हैं। शास्त्रों के मुताबिक, विजया नाम के अनुरूप यह एकादशी विजय प्रदान करने के समान मानी जाती है। यदि श्रद्धा भाव और नियमपूर्वक इस तिथि पर उपवास व श्री हरि नाम जप किया जाए, तो साधक को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती हैं। यही नहीं सभी तरह की बाधाओं से मुक्ति और कार्यों में सफलता के योग भी बनते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि, साल 2026 में यह व्रत कब रखा जाएगा।
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Vijaya Ekadashi 2026: कब है विजया एकादशी ? यहां जानें डेट से लेकर पूजा विधि और व्रत पारण का समय
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Tue, 03 Feb 2026 11:49 AM IST
सार
Vijaya Ekadashi 2026: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, विजया एकादशी पर व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु का पूजन, मंत्र-जप और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। इससे पापों का नाश और मोक्ष प्राप्त होता है ।
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विजया एकादशी 2026
- फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगा।
- इस तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर माना जा रहा है।
- तिथि के मुताबिक, विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा।
- व्रत का पारण अगले दिन 14 फरवरी को सुबह 7 बजे से सुबह 9 बजकर 14 मिनट तक की अवधि में किया जाएगा।
- इस दिन मूल नक्षत्र और व्रज योग का संयोग बना रहेगा।
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विजया एकादशी पूजा विधि
- एकादशी की पूजा के लिए एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
- भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र चढ़ाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
- अब प्रभु को चंदन लगाएं और उनके सामने शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं।
- पंचामृत, पीली मिठाई, गुड़ और चने का भोग अर्पित कर दें।
- विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें और विजया एकादशी का पाठ करें।
- अंत में आरती करें और अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा जैसे कार्य करें।
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भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
