विजयादशमी यानी दशहरा सिर्फ रावण दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है। यह दिन अपनों के साथ खुशियां बांटने, बड़ों का आशीर्वाद लेने, गिले शिकवे मिटा कर गले मिलने और रिश्तों में प्रेम बढ़ाने का भी अवसर है। उत्तर और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में दशहरे पर ‘दशहरी’ देने की परंपरा निभाई जाती है। इसे दशहरी भेंट या दशहरी नेग भी कहा जाता है। इस परंपरा के पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ परिवार और समाज को जोड़ने और शत्रुता को भुलाकर फिर से संबंध जोड़ने का भाव भी छिपा है।
विजयादशमी 2026: दशहरे पर क्या होती है दशहरी देने की परंपरा? जानिए इसका महत्व
उत्तर और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में दशहरे पर ‘दशहरी’ देने की परंपरा निभाई जाती है। इसे दशहरी भेंट या दशहरी नेग भी कहा जाता है। ऐसे में आइए इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है दशहरी देने की परंपरा?
दशहरे के दिन परिवार के छोटे सदस्य अपने से बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद बड़े-बुजुर्ग उन्हें स्नेह के रूप में कुछ भेंट देते हैं। इसी भेंट या नेग को दशहरी कहा जाता है।
इस अवसर पर बच्चों, बहनों, शादीशुदा बेटियों, भांजों और घर आए दूसरे रिश्तेदारों को रुपये, मिठाई, पान या अन्य उपहार दिए जाते हैं। कई जगहों पर शमी के पत्ते भी भेंट किए जाते हैं। यह केवल उपहार देने की रस्म नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच अपनापन और सम्मान जताने का एक तरीका है।
यह परंपरा केवल घर-परिवार तक सीमित नहीं है। कई लोग दशहरे पर अपने कर्मचारियों, कारीगरों, श्रमिकों और घर में काम करने वाले सहायकों को भी उपहार या नकद राशि देते हैं। इस तरह त्योहार की खुशी दूसरों के साथ बांटी जाती है।
दशहरी का धार्मिक महत्व क्या है?
दशहरी को बड़ों के आशीर्वाद, शुभकामना और मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर बड़ों से मिला आशीर्वाद जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना का प्रतीक है। इस दिन दी जाने वाली राशि या उपहार की कीमत से अधिक उसका भाव महत्वपूर्ण माना जाता है।
दशहरे पर शमी के पत्ते भेंट करने की भी परंपरा है। इन्हें कई क्षेत्रों में ‘सोना पत्ती’ कहा जाता है। मान्यता है कि शमी के पत्ते एक-दूसरे को देकर लोग सुख-समृद्धि, सफलता और खुशहाली की कामना करते हैं। दशहरी के साथ इन पत्तों को भेंट करना विजय और मंगल का संदेश देने का एक पारंपरिक तरीका है।
दशहरी का सामाजिक महत्व
परिवार में बढ़ता है प्रेम और सम्मान: दशहरे पर बहनों, बेटियों और दूसरे रिश्तेदारों को बुलाकर दशहरी देना पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर बनता है। इससे अपनों के प्रति सम्मान और स्नेह प्रकट होता है।
समाज में बढ़ता है भाईचारा: जब लोग अपने साथ काम करने वालों, कारीगरों और सहायकों को भी दशहरी देते हैं, तो यह उनके योगदान के प्रति आभार जताने का माध्यम बनता है। इससे आपसी सम्मान और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिलता है।
खुशियां बांटने की परंपरा: त्योहार की खुशी केवल अपने तक सीमित न रखकर दूसरों के साथ बांटना दशहरी का एक अहम संदेश है। छोटा-सा उपहार या कुछ रुपये भी रिश्तों में अपनापन बढ़ा सकते हैं।
इस तरह दशहरी देने की परंपरा विजयादशमी के उत्सव को और खास बनाती है। यह हमें याद दिलाती है कि दशहरा केवल विजय का पर्व नहीं, बल्कि बड़ों का सम्मान करने, छोटों को स्नेह देने और समाज में प्रेम व सद्भाव बनाए रखने का भी अवसर है।
- शैली प्रकाश