Gudi Padwa 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि एक अत्यंत पवित्र समय होता है जिसके साथ न केवल प्रकृति में एक नया चक्र शुरू होता है, बल्कि नए वर्ष का भी आगमन होता है। महाराष्ट्र और देश के कई अन्य हिस्सों में इस अवसर को गुड़ी पड़वा के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर के आंगन में फहराई जाने वाली गुड़ी केवल एक झंडा मात्र नहीं है बल्कि यह नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है। साथ ही इसे आने वाले शुभ समय का सूचक भी माना जाता है। आइए जानते हैं कि गुड़ी पड़वा के अवसर पर इस विजय पताका को फहराते समय किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा कल, जानें घर में विजय पताका लगाने के सही नियम
गुड़ी पड़वा जिसे विशेष रूप से महाराष्ट्र में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर के बाहर फहराया जाने वाला विजय ध्वज (गुड़ी) समृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है। इसे सही दिशा और सही तरीके से स्थापित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गुड़ी पड़वा तिथि
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ: 19 मार्च, प्रातः 06:52 मिनट पर
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च, प्रातः 04:52 मिनट पर
उदयातिथि के अनुसार गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा।
गुड़ी लगाने का महत्व
गुड़ी या विजय ध्वज को घर के मुख्य दरवाजे के पास लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसे ऊंचा लगाना शुभ होता है। यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। गुड़ी को एक बांस के डंडे पर साड़ी, कलश और नीम की पत्तियों से सजाया जाता है। यह सजावट जीवन में सुख और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है।
गुड़ी लगाने की सही दिशा
शास्त्रों के अनुसार गुड़ी को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। गुड़ी को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना सबसे अधिक शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा है, जो शक्ति, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक है। उत्तर दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी है। यदि गुड़ी को इन दिशाओं में लगाया जाता है, तो घर में सुख, सफलता और अच्छे परिणाम आते हैं।
गुड़ी स्थापित करने की सही विधि
- गुड़ी को स्थापित करने के लिए एक लंबे बांस के डंडे का उपयोग करें।
- इसके ऊपरी सिरे पर सुनहरे किनारों वाला पीले या केसरिया रंग का रेशमी कपड़ा बांधें।
- फिर उस पर नीम की पत्तियां और फूलों की माला चढ़ाएं।
- सबसे ऊपर तांबे या चांदी का एक कलश उल्टा करके रखें।
- इस बात का ध्यान रखें कि यह जमीन पर न छुए, इसे किसी ऊंची जगह पर मजबूती से बांधें।
- गुड़ी फहराते समय मन में खुशी और शुभकामनाओं का भाव रखें।
- शाम को सूर्यास्त से पहले पूरे सम्मान के साथ नीचे उतारें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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