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Maa Durga Ke 9 Roop: मां दुर्गा के 9 स्वरूप और उनसे जुड़ी मान्यताएं, जानें नवरात्रि में उनकी पूजा का महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Mehra Updated Mon, 16 Mar 2026 11:39 AM IST
सार

Maa Durga Ke 9 Roop: नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव के साथ मां के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के बारे में...

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Navratri 9 Days Devi Names List Spiritual Significance of 9 Devi
मां दुर्गा के नौ स्वरूप - फोटो : Amar Ujala

Navratri 9 Days Devi Names List: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ पवित्र स्वरूपों को समर्पित होता है। माना जाता है कि इस पावन समय में माता दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और नियम के साथ नवरात्रि का व्रत रखता है और मां दुर्गा की आराधना करता है, उसके जीवन के दुख और कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। इन नौ दिनों के दौरान श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव के साथ मां के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के बारे में विस्तार से...



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नवरात्रि मां शैलपुत्री   - फोटो : Amar Ujala

पहला दिन: मां शैलपुत्री
मां शैलपुत्री माता दुर्गा का पहला स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। वह पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं और देवी पार्वती के शुद्ध स्वरूप का प्रतीक हैं। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसे आध्यात्मिक शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

माता शैलपुत्री सफेद वस्त्र धारण करती हैं। उनके हाथ में त्रिशूल और कमल होता है और वह नंदी नामक बैल पर सवार रहती हैं।उनका प्रिय रंग नारंगी और प्रिय फूल गुड़हल माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि वे पूरे ब्रह्मांड की सूक्ष्म ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनका स्वरूप उस अवस्था को दर्शाता है, जब व्यक्ति अपने मन से भगवान के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ाव महसूस करता है।

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नवरात्रि मां ब्रह्मचारिणी  - फोटो : Amar Ujala

दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
ब्रह्मचारिणी को माता दुर्गा का दूसरा रूप माना जाता है, जिसकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। यह देवी पार्वती का वह स्वरूप है, जब उनका विवाह भगवान शिव से नहीं हुआ था। इस रूप में उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। ब्रह्मचारिणी देवी सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक मानी जाती हैं। भगवान शिव को पाने की उनकी इच्छा ने उन्हें हजारों वर्षों तक तप करने की शक्ति और दृढ़ता दी।

माता ब्रह्मचारिणी एक तपस्विनी कन्या के रूप में दिखाई देती हैं। वह नंगे पांव चलती हैं और उनके एक हाथ में जपमाला तथा दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उनका सरल स्वरूप सादगी भरे जीवन, भक्ति, आत्मबल और ध्यान का प्रतीक है। उनका प्रिय रंग सफेद माना जाता है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है। उनका प्रिय फूल गुलदाउदी है। वाराणसी के पंचगंगा घाट, घासी टोला में उनका एक प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है।

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नवरात्रि मां चंद्रघंटा - फोटो : Amar Ujala

तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
देवी माता दुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा हैं। शिव महापुराण के अनुसार, उन्हें भगवान शिव की शक्ति माना जाता है। भगवान का कोई भी स्वरूप शक्ति के बिना अधूरा माना जाता है। उन्हें आंतरिक शक्ति, शांति और साहस की देवी माना जाता है।

माता चंद्रघंटा लाल वस्त्र धारण करती हैं और बाघ पर सवार रहती हैं। उनके हाथों में तलवार, त्रिशूल और धनुष जैसे अस्त्र होते हैं। इन अस्त्रों से वह बुराई का नाश करती हैं और धर्म की रक्षा करती हैं। माता चंद्रघंटा को रणचंडी के नाम से भी जाना जाता है। उनका तीसरा नेत्र हमेशा जागृत रहता है, जो इस बात का संकेत है कि वह दुष्ट शक्तियों से लड़ने के लिए सदैव तैयार रहती हैं। उनके प्रिय रंग सुनहरा और पीला माने जाते हैं, जो साहस और दया का प्रतीक हैं। उन्हें गेंदा और सूरजमुखी के फूल अर्पित किए जाते हैं।

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नवरात्रि मां कूष्मांडा - फोटो : Amar Ujala

चोथा दिन: मां कूष्मांडा
माता दुर्गा का चौथा दिव्य स्वरूप मां कूष्मांडा हैं। मान्यता है कि उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से इस सृष्टि की रचना की थी। माता कूष्मांडा जीवन, ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। माना जाता है कि उनके भीतर से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा ही पूरे ब्रह्मांड में जीवन का आधार बनती है। इसी ऊर्जा को प्राण ऊर्जा भी कहा जाता है, जो हर जीवित प्राणी में प्रवाहित होती है। 

माता कूष्मांडा सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी आठ भुजाएं होती हैं। उनके हाथों में अलग-अलग अस्त्र, जपमाला और अमृत से भरा कलश होता है। उनके हाथों में मौजूद ये वस्तुएं शक्ति, साहस और ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनका प्रिय रंग रॉयल ब्लू माना जाता है, जो शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान भक्त उन्हें चमेली के सुगंधित फूल अर्पित करते हैं।

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