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मघा नक्षत्र में श्राद्ध 2026: मघा नक्षत्र में तर्पण करना क्यों है महत्वपूर्ण? जानें धार्मिक मान्यता

Tue, 29 Sep 2026 10:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 29 Sep 2026 10:18 AM IST
सार

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में मघा नक्षत्र को पितरों से जुड़ा विशेष नक्षत्र माना जाता है। जानें 7 अक्टूबर को मघा नक्षत्र में श्राद्ध-तर्पण का महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

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Magha Nakshatra and Pitru Paksha  Know Why Magha Nakshatra Is Associated With Ancestors
मघा नक्षत्र में श्राद्ध - फोटो : amar ujala

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत परिजनों के लिए तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पितृ पक्ष की तिथियों के साथ कुछ नक्षत्रों का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। इनमें मघा नक्षत्र को विशेष रूप से पितरों से संबंधित माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मघा नक्षत्र के अधिदेवता पितर माने जाते हैं। यही कारण है कि पितृ पक्ष में जब मघा नक्षत्र का संयोग बनता है, तो इस दौरान पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का पालन अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अपनी परंपरा के अनुसार किया जाता है।

 

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कब रहेगा मघा नक्षत्र? - फोटो : adobe stock

कब रहेगा मघा नक्षत्र?
साल 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्तूब तक माना जा रहा है। इस दौरान 7 अक्तूबर 2026 को मघा नक्षत्र का संयोग रहेगा। दिए गए पंचांग के अनुसार इस दिन मघा नक्षत्र अपराह्न काल में मौजूद रहेगा। श्राद्ध कर्म में अपराह्न समय को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए मघा नक्षत्र के दिन पितरों के लिए तर्पण और अन्य धार्मिक कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा एवं स्थानीय पंचांग के अनुसार किए जा सकते हैं।

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पितृ कर्म और मघा नक्षत्र के बीच विशेष संबंध माना जाता है। - फोटो : adobe stock

मघा नक्षत्र का पितरों से क्या संबंध है?
मघा 27 नक्षत्रों में से एक है और वैदिक ज्योतिष में इसे पितरों से संबंधित नक्षत्र माना गया है। धार्मिक परंपरा में मघा के अधिदेवता पितर बताए गए हैं। इसी वजह से पितृ कर्म और मघा नक्षत्र के बीच विशेष संबंध माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान इस नक्षत्र का संयोग होने पर कई लोग अपने पूर्वजों का विशेष रूप से स्मरण करते हैं और जल, तिल आदि से तर्पण करते हैं। इसका मुख्य भाव पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना होता है।

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मघा नक्षत्र में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की तृप्ति और शांति की कामना की जाती है। - फोटो : Amar Ujala

मघा नक्षत्र में श्राद्ध करने की क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार मघा नक्षत्र में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की तृप्ति और शांति की कामना की जाती है। परिवार के लोग इस अवसर पर अपने दिवंगत परिजनों को याद करते हुए उनके लिए प्रार्थना करते हैं। कुछ परंपराओं में यह भी माना जाता है कि यदि किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि ठीक से ज्ञात न हो या किसी कारण से उनका नियमित श्राद्ध न हो पाया हो, तो मघा नक्षत्र में पितृ कर्म किया जा सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में अपने कुल की परंपरा या किसी विद्वान आचार्य की सलाह के अनुसार विधि अपनाना उचित माना जाता है।

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पितरों का नाम और गोत्र ज्ञात होने पर उनका उच्चारण करते हुए तर्पण करने की परंपरा है। - फोटो : AI

मघा नक्षत्र में तर्पण कैसे किया जाता है?
तर्पण के लिए सामान्य रूप से जल और काले तिल का इस्तेमाल करने की परंपरा है। स्नान आदि के बाद शांत मन से पितरों का स्मरण किया जाता है और उनकी शांति की कामना करते हुए जल अर्पित किया जाता है। कई परिवार तर्पण में कुश, तिल और जल का प्रयोग करते हैं। पितरों का नाम और गोत्र ज्ञात होने पर उनका उच्चारण करते हुए तर्पण करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में तर्पण की विधि में अंतर हो सकता है, इसलिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

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