Mandir Jaane Ka Samay: मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक विकास की चाह में लोग मंदिरों का रुख करते हैं। यहां पहुंचकर भक्त अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं, दर्शन करते हैं और प्रसाद, फूल, माला या हवन सामग्री अर्पित करते हैं। अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए लोग मन्नतें भी मांगते हैं। हर व्यक्ति का अपना इष्ट देव अलग हो सकता है, लेकिन श्रद्धालु लगभग हर मंदिर में जाते हैं, चाहे वह भगवान शिव का हो, श्रीहरि विष्णु का, मां दुर्गा का या हनुमान जी का। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि मंदिर जाने का सही समय क्या होता है, सुबह, दोपहर या शाम?
Mandir Jaane Ka Samay: कब जाना चाहिए मंदिर? जानिए सही समय, नियम और मान्यताएं
Mandir Jaane Ka Samay: अक्सर यह सवाल उठता है कि मंदिर जाने का सही समय क्या होता है, सुबह, दोपहर या शाम? आइए जानते हैं इस सवाल का सही जवाब क्या है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंदिर जाने का सबसे शुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर जाने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय का माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः लगभग 4 बजे से शुरू होता है और इस दौरान वातावरण बेहद शांत और शुद्ध होता है। इस समय मन एकाग्र रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का स्तर उच्च होता है। मंदिरों में इसी समय भगवान का अभिषेक, पूजा और मंगला आरती होती है, जिसमें शामिल होने के लिए भक्त सुबह-सुबह पहुंचते हैं। यदि किसी कारणवश ब्रह्म मुहूर्त में जाना संभव न हो, तो सूर्योदय के समय या उसके थोड़ी देर बाद मंदिर जाना भी शुभ माना जाता है।
दोपहर के समय मंदिर जाना उपयुक्त नहीं माना जाता। इस दौरान भगवान के श्रृंगार और भोग की प्रक्रिया होती है, जिसके बाद उन्हें विश्राम दिया जाता है। कई मंदिरों में इस समय कपाट बंद कर दिए जाते हैं, जिससे दर्शन नहीं हो पाते।
अगर सुबह मंदिर नहीं जा पाएं, तो सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में जाना भी अच्छा विकल्प है। इस समय संध्या आरती होती है और पूजा के लिए यह समय भी शुभ माना गया है। हालांकि, देर रात मंदिर जाने से बचना चाहिए, क्योंकि उस समय भगवान के शयन का समय होता है और आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
ग्रहण काल चाहे सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण, में मंदिर जाना वर्जित माना जाता है, क्योंकि उस समय मंदिर बंद रहते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण के पश्चात ही दर्शन की अनुमति मिलती है।
मंदिर जाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। स्नान करके शुद्ध अवस्था में जाएं, सादे और मर्यादित वस्त्र पहनें, चमड़े की वस्तुएं साथ न ले जाएं और मांस-मदिरा से दूर रहें। साथ ही, भोजन करने के तुरंत बाद मंदिर जाने से बचना चाहिए। इन बातों का पालन करने से पूजा का फल और भी अधिक शुभ माना जाता है।
Pradosh Vrat July: 11 या 12 जुलाई कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत? जानें शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
Sawan 2026: शिवलिंग पर 3 पत्तियों वाला बेलपत्र ही क्यों चढ़ाया जाता है? जानें इसके पीछे की मान्यता
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।