हाल ही में नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर चर्चा तेज हुई है। बाबा नीम करौली का नाम केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता और सेवा की भावना से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर अमेरिका तक उनके भक्तों और अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स से लेकर फेसबुक के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स तक का नाम भी बाबा से जुड़ी प्रेरक कहानियों में सामने आता है।
‘हनुमान अंश’ में दिखी नीम करौली बाबा की कहानी, जानें उनके जीवन के 10 खास और रहस्यमयी तथ्य
भगवान हनुमान के परम भक्त माने जाने वाले नीम करौली बाबा का जीवन बेहद सादगीपूर्ण था, लेकिन उनसे जुड़ी कई घटनाएं आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय हैं। आखिर उन्हें ‘नीम करौली बाबा’ नाम कैसे मिला? वह हमेशा कंबल ओढ़े हुए क्यों नजर आते थे? कैंची धाम की स्थापना के पीछे क्या कहानी है? आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े 10 खास तथ्य।
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1. आखिर ‘नीम करौली’ नाम कैसे पड़ा?
बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। ‘नीम करौली’ नाम उत्तर प्रदेश के नीम करौली गांव से जुड़ा माना जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार, बाबा एक बार ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे और उन्हें उत्तर प्रदेश के नीम करौली स्टेशन पर उतार दिया गया। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। लोगों के आग्रह पर बाबा को दोबारा ट्रेन में बैठाया गया और ट्रेन चल पड़ी। इसी घटना के बाद उनका नाम नीम करौली बाबा के रूप में प्रसिद्ध होने की कथा कही जाती है। हालांकि, यह घटना मुख्यतः भक्तों और अनुयायियों के बीच प्रचलित कथा के रूप में मिलती है।
2. बाबा का असली नाम क्या था?
नीम करौली बाबा का जन्म लगभग 20वीं सदी की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर क्षेत्र में हुआ माना जाता है। उनका नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। आगे चलकर वे साधु जीवन की ओर मुड़े और भक्तों के बीच ‘महाराज जी’ के नाम से भी प्रसिद्ध हुए।
3. भगवान हनुमान के थे अनन्य भक्त
बाबा नीम करौली भगवान हनुमान के परम भक्त थे। उनके अनुयायियों में उन्हें हनुमान जी का अंश या अवतार मानने की परंपरा भी रही है। कैंची धाम में भगवान हनुमान का मंदिर उनकी इसी भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. वह हमेशा कंबल क्यों ओढ़ते थे?
बाबा की तस्वीरों में उन्हें अक्सर कंबल ओढ़े हुए देखा जाता है और यही उनकी पहचान का हिस्सा बन गया। उनके कंबल को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन इसका कोई एक प्रमाणित कारण उपलब्ध नहीं है। कुछ अनुयायी इसे उनकी सादगी और वैराग्य का प्रतीक मानते हैं। बाबा अपने पहनावे को लेकर दिखावे से दूर रहते थे और साधारण कंबल में ही नजर आते थे। इसलिए कंबल धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गया।
5. कैंची धाम का नाम 'कैंची' क्यों पड़ा?
उत्तराखंड में नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम का नाम सुनकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इसका कैंची से क्या संबंध है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, यहां सड़क के दो तीखे हेयरपिन मोड़ कैंची की आकृति जैसे दिखाई देते हैं। इसी वजह से इस स्थान को कैंची धाम कहा गया, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
6. कैंची धाम की स्थापना कब हुई?
कैंची धाम बाबा नीम करौली महाराज से जुड़ा प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है। बाबा नीम करौली पहली बार इस स्थान पर 1961 के आसपास आए थे। इसके बाद यहां आश्रम और हनुमान मंदिर बनाने की योजना आगे बढ़ी। 15 जून 1964 को हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई और इसी दिन को कैंची धाम का स्थापना दिवस माना जाता है। इसलिए हर साल 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस मनाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
7. अमेरिकी प्रोफेसर कैसे बने राम दास?
नीम करौली बाबा के सबसे प्रसिद्ध शिष्यों में अमेरिकी आध्यात्मिक शिक्षक राम दास का नाम लिया जाता है। उनका मूल नाम रिचर्ड अल्पर्ट था और वे हार्वर्ड के मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे। वर्ष 1967 में भारत यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात बाबा से हुई। इसके बाद उनके जीवन की दिशा बदल गई और वे राम दास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने दुनिया भर में भारतीय आध्यात्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाया।
8. स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग भी पहुंचे कैंची धाम
नीम करौली बाबा से जुड़ी सबसे चर्चित बातों में दुनिया की मशहूर हस्तियों का उनके आश्रम से जुड़ाव भी है। स्टीव जॉब्स भारत यात्रा के दौरान कैंची धाम पहुंचे थे। मार्क जुकरबर्ग भी यहां आए थे और उन्होंने बाद में इस यात्रा को अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों में बताया। इन घटनाओं ने कैंची धाम को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रसिद्ध किया।
10. देह त्याग के बाद भी बढ़ती गई आस्था
नीम करौली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में देह त्याग किया। हालांकि, उनके जाने के दशकों बाद भी उनके प्रति लोगों की श्रद्धा लगातार बनी हुई है। कैंची धाम में आज भी देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और बाबा की स्मृति से जुड़े आध्यात्मिक अनुभवों को महसूस करने की बात कहते हैं।
नीम करौली बाबा का जीवन जितना रहस्यमयी माना जाता है, उतना ही उनकी सादगी भी लोगों को आकर्षित करती है। शायद यही वजह है कि समय बीतने के बावजूद उनके जीवन, शिक्षाओं और चमत्कारों से जुड़ी कथाओं को जानने की लोगों की उत्सुकता कम नहीं हुई है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।