हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना गया है। इस दिन लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मिक शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या पर पितृ अपने परिजनों के समीप आते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी इस तिथि पर कई उपाय किए जाते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या 2026: 81 साल बाद फिर बना दुर्लभ संयोग, पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए करें ये 3 काम
इस वर्ष 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इस बार की अमावस्या को विशेष माना जा रहा है, क्योंकि तिथि पर कुछ दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बनने वाले हैं। ऐसे में पितरों के निमित्त किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया जा रहा है।
बन रहा दुर्लभ संयोग
इस बार सर्वपितृ अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग का संयोग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पिछले 81 वर्षों में यह संयोग केवल 12 बार बना है और अब 13वीं बार बनने जा रहा है। इस विशेष अवसर पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होने तथा पुण्य फल की प्राप्ति की मान्यता है।
पितरों की प्रसन्नता के लिए करें ये काम
- कौओं को भोजन कराएं: सर्वपितृ अमावस्या पर कौओं को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में इन्हें पितरों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए श्रद्धापूर्वक इन्हें भोजन कराना शुभ माना जाता है।
- गौ सेवा करें: इस दिन किसी धार्मिक स्थल पर पूजा-अर्चना करने के बाद गाय को चारा खिलाना और उसकी सेवा करना पुण्यकारी माना जाता है। इससे पितरों और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
- तर्पण और पिंडदान करें: सर्वपितृ अमावस्या पर उन सभी पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती। इस दिन तर्पण, पिंडदान और जरूरतमंदों को दान करने से पितरों की शांति की कामना की जाती है।
इन कामों से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। इस दिन बाल धोना भी कई परंपराओं में शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि अमावस्या की पवित्रता बनाए रखते हुए संयम, सात्विकता और पितरों के स्मरण में समय बिताना अधिक फलदायी होता है।
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