Varuthini Ekadashi 2026 Date: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, जिसे विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सौभाग्य और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साल 2026 में यह व्रत अप्रैल महीने में पड़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष वरुथिनी एकादशी कब मनाई जाएगी और पूजा के लिए कौन-सा समय सबसे शुभ रहने वाला है।
Varuthini Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा वरुथिनी एकादशी व्रत? जानें तिथि और पूजा विधि
Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष वरुथिनी एकादशी का वर्त किस दिन रखा जाएगा और पूजा के लिए कौन-सा समय सबसे शुभ रहने वाला है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
- इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना और व्रत का संकल्प लेना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सुबह का समय भगवान विष्णु की आराधना के लिए श्रेष्ठ होता है।
- इस दौरान श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा व्यक्ति को विशेष पुण्य फल प्रदान करती है।
वरुथिनी एकादशी की पूजा विधि
- इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, विशेषकर पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल पर एक चौकी सजाकर भगवान विष्णु या उनके वराह अवतार की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- इसके बाद भगवान को अक्षत, फल, पीले पुष्प और चंदन अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर विधि पूर्वक आरती करें।
- धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है।
- पूजा के समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना मन को शांति और आध्यात्मिक शक्ति देता है।
- शाम के समय घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
- व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- तामसिक भोजन जैसे लहसुन-प्याज से दूर रहना चाहिए।
- मन और विचारों की शुद्धता बनाए रखें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक सोच से बचते हुए दान-पुण्य करें।
वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
वरुथिनी एकादशी को अत्यंत पुण्य देने वाली तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग मिलता है। यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। कहा जाता है कि इसका फल हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर होता है।
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