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नई तकनीक: आईफोन 18 प्रो का वेरिएबल अपर्चर कैमरा क्या है, कैसे काम करता है; फोटोग्राफी में इसका क्या फायदा?
Thu, 10 Sep 2026 12:27 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:27 PM IST
सार
आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स का नया वेरिएबल अपर्चर कैमरा स्मार्टफोन फोटोग्राफी को और बेहतर बनाने का दावा करता है। यह रोशनी के हिसाब से कैमरे का अपर्चर बदल सकता है। जानें यह तकनीक कैसे काम करती है और नाइट फोटोग्राफी, पोर्ट्रेट और वीडियो रिकॉर्डिंग में कितना फायदा दे सकती है।
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क्या है आईफोन 18 प्रो का वेरिएबल अपर्चर कैमरा?
- फोटो : अमर उजाला
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आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स में कैमरा को लेकर एपल ने इस बार बड़ा बदलाव किया है। दोनों फोन के 48MP मेन कैमरे में पहली बार वेरिएबल अपर्चर दिया गया है। यह तकनीक जरूरत के हिसाब से कैमरे के लेंस का अपर्चर बदल सकती है, जिससे कम रोशनी में फोटो बेहतर बनाने के साथ बैकग्राउंड ब्लर और पूरे फ्रेम की डिटेल पर भी ज्यादा कंट्रोल मिलता है। आइए जानते हैं वेरिएबल अपर्चर तकनीक क्या है और कैसे काम करता है।
क्या है अपर्चर?
- फोटो : एपल
क्या है अपर्चर?
- कैमरे में अपर्चर लेंस का वह हिस्सा है, जो यह तय करता है कि सेंसर तक कितनी रोशनी पहुंचेगी। आम तौर पर छोटे एफ-नंबर का मतलब होता है कि लेंस ज्यादा खुला है और ज्यादा रोशनी अंदर जा सकती है। वहीं बड़ा एफ-नंबर लेंस को ज्यादा बंद करता है और रोशनी कम आती है।
- स्मार्टफोन के ज्यादातर कैमरों में अपर्चर फिक्स रहता है। यानी उपयोगकर्ता फोटो लेते समय लेंस के खुलने की मात्रा को सीधे नहीं बदल सकता। आईफोन 18 प्रो सीरीज में एपल ने इसी हिस्से को बदल दिया है।
कैसे काम करता है?
- फोटो : एपल
आईफोन 18 प्रो में कैसे काम करता है वेरिएबल अपर्चर?
- आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स के 48MP मेन कैमरे में एफ/1.48, एफ/1.8, एफ/2.8 और एफ/4.0 के चार अपर्चर विकल्प दिए गए हैं। एपल के अनुसार कैमरा जरूरत के हिसाब से इन सेटिंग्स के बीच अपने आप बदलाव कर सकता है।
- इसके लिए कैमरे में छह लेजर-कट ब्लेड और एक नया रोटर मैकेनिज्म इस्तेमाल किया गया है। ये ब्लेड लेंस के अपर्चर को आसानी से खोलने और बंद करने का काम करते हैं। यानी रोशनी और डेप्थ ऑफ फील्ड की जरूरत के अनुसार कैमरा अपना अपर्चर बदल सकता है।
- यूजर चाहे तो कैमरा ऐप में दिए गए प्रो कंट्रोल के जरिए अपर्चर को मैनुअली भी बदला जा सकता है। एपल ने इसके साथ शटर स्पीड, व्हाइट बैलेंस और हिस्टोग्राम जैसे कंट्रोल भी दिए हैं।
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कम रोशनी में भी बेहतर फोटोग्राफी
- फोटो : एपल
कम रोशनी में क्या फायदा मिलेगा?
बैकग्राउंड ब्लर में क्या मिलेगा कंट्रोल?
- वेरिएबल अपर्चर का सबसे सीधा फायदा कम रोशनी वाली फोटोग्राफी में मिलता है। जब आसपास रोशनी कम होती है, कैमरा एफ/1.48 जैसे बड़े अपर्चर का इस्तेमाल कर सकता है। इससे लेंस ज्यादा रोशनी सेंसर तक पहुंचाता है।
- एपल का कहना है कि एफ/1.48 सेटिंग पर कम रोशनी में प्रदर्शन करीब 50 प्रतिशत बेहतर हो सकता है। इससे इनडोर और रात के समय फोटो लेने में मदद मिलेगी और नाइट मोड शॉट तेजी से कैप्चर किए जा सकेंगे।
- इसका एक और फायदा यह है कि ज्यादा रोशनी मिलने से कुछ परिस्थितियों में धीमी शटर स्पीड पर निर्भरता कम हो सकती है, जिससे चलते हुए सब्जेक्ट को कैप्चर करना आसान हो सकता है।
बैकग्राउंड ब्लर में क्या मिलेगा कंट्रोल?
- अपर्चर का असर सिर्फ रोशनी पर नहीं होता। यह फोटो की डेप्थ ऑफ फील्ड यानी तस्वीर में कितना हिस्सा फोकस में दिखाई देगा, उसे भी प्रभावित करता है।
- उदाहरण के लिए, एफ/1.48 जैसे बड़े अपर्चर पर मुख्य सब्जेक्ट के पीछे का हिस्सा ज्यादा धुंधला दिखाई दे सकता है। यह पोर्ट्रेट और क्रिएटिव फोटोग्राफी में काम आता है।
- दूसरी तरफ एफ/2.8 या एफ/4.0 जैसे छोटे अपर्चर पर फ्रेम के ज्यादा हिस्से को स्पष्ट रखने में मदद मिल सकती है। एपल के अनुसार एफ/2.8 पर पीछे की ज्यादा डिटेल को फोकस में रखने में मदद मिलती है, जबकि एफ/4.0 का इस्तेमाल ज्यादा डेप्थ और कुछ क्रिएटिव लाइटिंग इफेक्ट के लिए किया जा सकता है।
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लैंडस्केप में कैप्चर करेगा ज्यादा डिटेल
- फोटो : एपल
लैंडस्केप और ग्रुप फोटो में क्या फायदा?
वीडियो रिकॉर्डिंग में क्या फायदा?
- वेरिएबल अपर्चर सिर्फ पोर्ट्रेट के लिए उपयोगी नहीं है। जब फ्रेम में कई लोग हों या सामने से लेकर पीछे तक ज्यादा चीजों को स्पष्ट दिखाना हो, तब छोटे अपर्चर का फायदा मिल सकता है।
- उदाहरण के लिए, किसी ग्रुप फोटो में पीछे खड़े लोगों का चेहरा ज्यादा साफ रखने के लिए ज्यादा डेप्थ ऑफ फील्ड उपयोगी होती है। इसी तरह लैंडस्केप फोटो में सामने और दूर के हिस्से को ज्यादा स्पष्ट रखने में मदद मिल सकती है।
- एपल ने यह भी कहा है कि नया कैमरा सिस्टम ग्रुप फोटो में पीछे मौजूद डिटेल को बेहतर तरीके से कैप्चर करने के लिए डिजाइन किया गया है।
वीडियो रिकॉर्डिंग में क्या फायदा?
- वेरिएबल अपर्चर का इस्तेमाल वीडियो में भी किया जा सकता है। अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में कैमरा अपर्चर को बदलकर एक्सपोजर और डेप्थ ऑफ फील्ड को एडजस्ट कर सकता है।
- एपल के मुताबिक इससे सिनेमैटिक वीडियो में रचनात्मक नियंत्रण बढ़ता है। वहीं प्रो कंट्रोल में शटर स्पीड जैसे विकल्प मिलने से वीडियो और फोटो शूट करने वाले क्रिएटर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा मैनुअल कंट्रोल मिलेगा।