Intestate Succession Law India Rules: अक्सर लोग अपनी जिंदगी में संपत्ति की वसीयत बनाए बिना ही दुनिया से चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर गंभीर विवाद खड़े हो जाते हैं। जब कोई व्यक्ति बिना वसीयत छोड़े गुजर जाता है, तो कानून की भाषा में इसे 'इंटेस्टेट' कहा जाता है।
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बिना वसीयत के कैसे होता है संपत्ति का बंटवारा? जानें इससे जुड़े जरूरी नियम
Wed, 23 Sep 2026 03:45 PM IST
Shikhar Baranawal
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Wed, 23 Sep 2026 03:45 PM IST
सार
Property Distribution Without Will Rules: हमारे समाज में ज्यादातर लोग अपने संपत्ति का वसीयत नहीं बनते हैं, और उनके जाने के बाद सारी संपत्ति कानून के हिसाब से बांटनी पड़ती है। मगर आपको बता दें कि संपत्ति के मामले में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई के लिए हमारे देश में अलग-अलग कानून है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा?
- फोटो : Amar Ujala
बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा?
- फोटो : Adobe Stock
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और प्रथम श्रेणी के वारिस
- हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनों पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 लागू होता है।
- इसके तहत मृतक की संपत्ति सबसे पहले प्रथम श्रेणी के वारिसों में बराबर बांटी जाती है।
- इसमें मृतक की पत्नी, बच्चे (बेटे-बेटियां) और मां शामिल होते हैं।
- अगर मां जीवित हैं, तो उन्हें भी बच्चों और पत्नी के बराबर ही हिस्सा मिलता है।
बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा?
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क्लास-1 वारिस न होने पर किसे मिलता है अधिकार?
- अगर प्रथम श्रेणी का कोई कानूनी वारिस मौजूद नहीं है, तो संपत्ति द्वितीय श्रेणी के वारिसों के पास जाती है।
- इसमें पिता, भाई, बहन, दादा-दादी और अन्य नजदीकी रिश्तेदार शामिल होते हैं।
- कानून की इस व्यवस्था में प्राथमिक वारिसों की गैरमौजूदगी में ही रिश्तेदारों को मालिकाना हक ट्रांसफर किया जाता है।
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बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा?
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मुस्लिम और ईसाई पर्सनल लॉ के अलग नियम
- मुस्लिम पर्सनल लॉ में बिना वसीयत बंटवारे के नियम अलग हैं।
- वहां पत्नी, बच्चों और माता-पिता का हिस्सा पहले से निश्चित होता है और बेटों का हिस्सा बेटियों की तुलना में दोगुना होता है।
- वहीं ईसाइयों के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पत्नी को एक-तिहाई और बाकी दो-तिहाई हिस्सा बच्चों में बराबर बांटा जाता है।
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उत्तराधिकार प्रमाणपत्र और म्यूटेशन है जरूरी प्रक्रिया
अस्वीकरण: यह लेख सिर्फ पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए है। हर केस अपने आप में अलग (यूनिक) होता है, इसलिए अपने मामले को बेहतर समझने के लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
- बिना वसीयत के संपत्ति अपने नाम कराने के लिए वारिसों को कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या लीगल हेयर सर्टिफिकेट बनवाना पड़ता है।
- इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
- सभी वारिसों की आपसी सहमति होने पर यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।
अस्वीकरण: यह लेख सिर्फ पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए है। हर केस अपने आप में अलग (यूनिक) होता है, इसलिए अपने मामले को बेहतर समझने के लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।