आज देशभर में एक शब्द काफी चर्चा में है और वो है न्यायिक हिरासत। ऐसा इसलिए क्योंकि कोर्ट ने आशुतोष रांका, और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दरअसल, सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया, तो उसके अगले ही दिन मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लगभघ 20 कार्यकर्ता तिरंगा लेकर वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने जदयू कार्यालय का गेट पार किया और भारी बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन स्थल पर तिरंगा फहराया था।
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सीजेपी के आशुतोष-सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत: जानिए क्या होता है न्यायिक और पुलिस हिरासत में अंतर
Wed, 14 Oct 2026 01:03 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Wed, 14 Oct 2026 01:03 PM IST
सार
Police Custody vs Judicial Custody: पुलिस हिरासत में आरोपी पुलिस की निगरानी में रहता है। जबकि, न्यायिक हिरासत में उसे जेल में रखा जाता है। जान लें कि दोनों हिरासतों का उद्देश्य, नियंत्रण और कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
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न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में क्या फर्क होता है?
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न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में क्या फर्क होता है?
- फोटो : AI Generated
पुलिस हिरासत क्या होती है?
- जब अदालत किसी आरोपी को पुलिस की कस्टडी में रखने की अनुमति देती है, तो इसे पुलिस हिरासत कहा जाता है
- इसका मुख्य उद्देश्य जांच को आगे बढ़ाना होता है
- इस दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ कर सकती है और मामले से जुड़े तथ्यों, सबूतों तथा अन्य जानकारियों की जांच कर सकती है हालांकि, पुलिस को पूछताछ के नाम पर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट, यातना या अन्य गैरकानूनी व्यवहार करने की अनुमति नहीं होती है
न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में क्या फर्क होता है?
- फोटो : AI Generated
- पुलिस हिरासत का आदेश पुलिस स्वयं नहीं दे सकती
- इसके लिए संबंधित मजिस्ट्रेट की कानूनी प्रक्रिया के तहत अनुमति आवश्यक होती है
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) में पुलिस रिमांड और हिरासत से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं
- पुलिस हिरासत की अवधि और अनुमति मामले की परिस्थितियों तथा लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करती है
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न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में क्या फर्क होता है?
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न्यायिक हिरासत क्या होती है?
- जब अदालत आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजती है, तो उसे जेल या किसी अन्य अधिकृत स्थान पर न्यायिक आदेश के तहत रखा जाता है
- इस स्थिति में आरोपी पुलिस की नियमित कस्टडी में नहीं, बल्कि जेल प्रशासन की निगरानी में रहता है
- इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को दोषी ठहरा दिया गया है
- मुकदमे की सुनवाई और दोष साबित होने तक आरोपी को कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है
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न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में क्या फर्क होता है?
- फोटो : AI Generated
- न्यायिक हिरासत के दौरान पुलिस को पूछताछ के लिए आरोपी तक पहुंचने की जरूरत हो, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक न्यायिक अनुमति का पालन करना पड़ता है
- अदालत मामले की स्थिति, कानूनी प्रावधानों और हिरासत की अवधि को ध्यान में रखकर आगे का आदेश देती है