सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Amritsar News ›   AAP govt and SGPC are at loggerheads over disappearance of 328 sacred copies of Guru Granth Sahib

पावन स्वरूपों की पहेली: 10 साल बाद भी अनसुलझा मामला, सरकार और एसजीपीसी आमने-सामने

पंकज शर्मा, अमृतसर Published by: अंकेश ठाकुर Updated Mon, 05 Jan 2026 12:56 PM IST
विज्ञापन
सार

स्वरूपों के गुम होने का मामला पहली बार वर्ष 2016 में सामने आया। एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग में रिकॉर्ड और लेखा-जोखा की आंतरिक जांच के दौरान पाया गया कि कई स्वरूपों का कोई लेखाजोखा मौजूद नहीं है।

AAP govt and SGPC are at loggerheads over disappearance of 328 sacred copies of Guru Granth Sahib
एसजीपीसी - फोटो : वीडियो ग्रैब
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के गुम होने का मामला एक दशक बीत जाने के बाद भी किसी पहेली से कम नहीं है। सिख समुदाय की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण ने अब एक बार फिर पंजाब की राजनीति और धार्मिक संस्थाओं के बीच टकराव को हवा दे दी है। पंजाब सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की सक्रियता और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के पूर्व ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी के बाद यह मामला पूरी तरह से सुर्खियों में आ गया है।

Trending Videos

एक ओर जहां एसजीपीसी इसे धार्मिक संस्था के आंतरिक प्रशासन से जुड़ा मामला बताते हुए सरकारी हस्तक्षेप करार दे रही है, वहीं पंजाब सरकार का कहना है कि यह धार्मिक अपमान और गंभीर आपराधिक लापरवाही का विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस टकराव ने आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब की राजनीति को भी गरमा दिया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का सर्वोच्च और पवित्र ग्रंथ है। इसके प्रत्येक स्वरूप (प्रति) को जीवित गुरु का दर्जा प्राप्त है। इन स्वरूपों का प्रकाशन, संरक्षण और वितरण शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की जिम्मेदारी है जिसे सिखों की सर्वोच्च धार्मिक-प्रबंधक संस्था माना जाता है। ऐसे में सैकड़ों स्वरूपों के गुम होने का आरोप केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

2016 में हुआ था पहला खुलासा
स्वरूपों के गुम होने का मामला पहली बार वर्ष 2016 में सामने आया। एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग में रिकॉर्ड और लेखा-जोखा की आंतरिक जांच के दौरान पाया गया कि कई स्वरूपों का कोई लेखाजोखा मौजूद नहीं है। शुरुआती जांच में 267 स्वरूपों के गायब होने की बात सामने आई। इसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के निर्देश पर पूरे मामले की विस्तृत जांच करवाई गई। इस जांच का नेतृत्व एडवोकेट डॉ. इशर सिंह ने किया। जांच पूरी होने पर यह संख्या बढ़कर 328 स्वरूपों तक पहुंच गई।

कहां से और कैसे गायब हुए स्वरूप
जांच रिपोर्ट के अनुसार ये सभी स्वरूप अमृतसर स्थित एसजीपीसी के प्रकाशन हाउस से गायब पाए गए। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि कम से कम 186 स्वरूप बिना किसी आधिकारिक अनुमति के प्रकाशित किए गए और बिक्री या वितरण में लाए गए। इन स्वरूपों का न तो वैध रिकॉर्ड था और न ही विधिवत बिल या अनुमति। सबसे अहम बात यह रही कि 2016-17 में मामला सामने आने के बावजूद तत्कालीन अकाली दल और बाद में कांग्रेस सरकार के दौरान न तो एफआईआर दर्ज करवाई गई और न ही किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की गई। एसजीपीसी ने भी इसे आंतरिक जांच तक सीमित रखा।

विरोध और आंदोलनों की गूंज
इस मुद्दे को लेकर सिख सद्भावना दल, गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी, संयुक्त किसान मोर्चा समेत कई सिख और पंथक संगठनों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। 2020 के आसपास एसजीपीसी मुख्यालय और श्री हरिमंदिर साहिब परिसर के बाहर लंबे समय तक धरने और प्रदर्शन हुए। भाई बलदेव सिंह वडाला की अगुआई में हेरिटेज स्ट्रीट पर चार वर्षों तक आंदोलन चला। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। श्रद्धालुओं का आरोप था कि एसजीपीसी ने मामले को दबाने का प्रयास किया।

अकाल तख्त की 1000 पेज की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
श्री अकाल तख्त की ओर से गठित एडवोकेट इशर सिंह जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा कि प्रकाशन विभाग में रिकॉर्ड के साथ गंभीर छेड़छाड़ हुई है। रिपोर्ट के अनुसार कई स्वरूप बिना किसी अनुमति और बिल के बेचे गए। सिख सद्भावना दल ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई की मांग की और एसजीपीसी पर प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाया।

  • रिकॉर्ड में भारी अनियमितताएं।
  • अभिलेखों से छेड़छाड़ के प्रमाण।
  • बिना अनुमति स्वरूपों की बिक्री।
  • लेखा-जोखा रखने में गंभीर लापरवाही।

एफआईआर और एसआईटी की एंट्री
लगभग एक दशक बाद 7 दिसंबर 2025 को पंजाब सरकार के आदेश पर अमृतसर के थाना सी डिवीजन में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में एसजीपीसी के 16 वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों को नामजद किया गया है। इन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने, विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया। नामजद आरोपियों में एसजीपीसी के पूर्व मुख्य सचिव रूप सिंह, धर्म प्रचार कमेटी के पूर्व अधिकारी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

एसआईटी की कार्रवाई तेज
एसआईटी में अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम ने कई स्थानों पर छापे मार कर दस्तावेज बरामद किए हैं। अब तक एसजीपीसी के पूर्व ऑडिटर सतिंदर सिंह कोहली और एक सहायक कर्मचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

एसजीपीसी का पक्ष...

धार्मिक संस्था के कामकाज में दखल दे रही सरकार: धामी
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी का कहना है कि संस्था ने 2016 से 2020 के बीच आंतरिक जांच कर दोषियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की थी। नियमों के अनुसार दंड भी दिया गया। धामी का आरोप है कि पंजाब सरकार धार्मिक संस्था के कामकाज में दखल दे रही है। उनके अनुसार अकाल तख्त द्वारा करवाई गई जांच पर्याप्त थी और एफआईआर व एसआईटी की जरूरत नहीं थी। एसजीपीसी का कहना है कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है।
सरकार का सख्त जवाब

धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला, किसी को नहीं मिलेगी छूट
पंजाब सरकार के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि सैकड़ों पावन स्वरूपों का गुम होना बेहद गंभीर मामला है। सरकार का कर्तव्य है कि दोषियों को सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी समय रहते सख्त कदम उठाने में विफल रही, इसलिए एफआईआर और एसआईटी जरूरी हो गई। जो भी दोषी होगा, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

आंदोलनकारी संगठनों की उम्मीद
सिख सद्भावना दल के मुखी बलदेव सिंह वडाला का कहना है कि एसजीपीसी ने वर्षों तक इस मामले को दबाए रखा। जांच रिपोर्ट होने के बावजूद पुलिस में मामला दर्ज नहीं करवाया गया। वडाला का कहना है कि अब एफआईआर और एसआईटी से उन्हें उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और सिख समुदाय की भावनाओं के साथ हुए खिलवाड़ का न्याय मिलेगा।

2027 के चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा
पावन स्वरूपों का यह मामला अब केवल धार्मिक या कानूनी नहीं रह गया है। यह 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अकाली दल और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। पंथक राजनीति, धार्मिक आस्था और सरकारी दखल—इन तीनों के संगम ने इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील और विस्फोटक बना दिया है। अब सबकी नजर एसआईटी की अगली कार्रवाई और आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि यह पहेली कब और कैसे सुलझेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed