11 लाख 37 हजार की रिश्वत: CIA इंस्पेक्टर, ASI और पूर्व विधायक के पीए को 4-4 साल की कैद, ये है पूरा मामला
सीआईए इंस्पेक्टर अनिल कुमार, एएसआई परमदीप सिंह और शिअद के पूर्व विधायक के पीए हरभाल सिंह पाला को रिश्वत मामले में 4-4 साल की सजा सुनाई गई है। मामला 11 लाख 37 हजार रुपये रिश्वत का है।
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पंजाब सीआईए स्टाफ तरनतारन की टीम ने अमृतसर जिले के गांव डल के रहने वाले किसान मिल्खा सिंह के बेटे, भतीजे और एक अन्य रिश्तेदार को हिरासत में लेकर उनसे 11 लाख 37 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। इतना ही नहीं, तीनों युवकों पर ड्रग्स स्मगलिंग का झूठा केस दर्ज किया गया था। बाद में कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया। इसके बाद पीड़ित किसान ने विजिलेंस में शिकायत की और जांच के बाद सीआईए इंस्पेक्टर अनिल कुमार, एएसआई परमदीप सिंह और शिअद के पूर्व विधायक के पीए हरभाल सिंह पाला के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस मामले में तरनतारन जिला अदालत के एडिशनल सेशन जज रविंदरदीप सिंह बाजवा की कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 4-4 साल कैद और 40-40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
अजनाला थाने के गांव डल के रहने वाले किसान मिल्खा सिंह ने बताया कि साल 2014 में सीआईए स्टाफ तरनतारन के उस समय के इंचार्ज इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने एएसआई परमदीप सिंह के साथ मिलकर रेड करके उसके बेटे, भतीजे और एक और युवक को गिरफ्तार किया था। तीनों के खिलाफ नशा तस्करी का झूठा केस दर्ज किया गया था। इससे पहले इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने मिल्खा सिंह को भरोसे में लेकर 11 लाख 37 हजार रुपये की रिश्वत यह कहकर ली थी कि किसी के खिलाफ झूठा केस दर्ज नहीं होगा।
अकाली दल के पूर्व विधायक के पीए हरपाल सिंह निवासी वल्टोहा ने इस रिश्वत कांड में अहम भूमिका निभाई थी। रिश्वत की मोटी रकम वसूलने के बाद तीनों के खिलाफ केस दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया गया था। छह साल बाद वर्ष 2020 में तरनतारन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में तीनों को बरी कर दिया था। इसके बाद मिल्खा सिंह ने साल 2014 में ही विजिलेंस को शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच 2015 में शुरू हुई थी। साल 2017 में विजिलेंस ने सीआईए इंस्पेक्टर अनिल कुमार, एएसआई परमदीप सिंह और शिअद के पूर्व विधायक के पीए हरभाल सिंह पाला निवासी वल्टोहा के खिलाफ केस दर्ज किया था। बुधवार को इंस्पेक्टर अनिल कुमार, एएसआई परमजीत सिंह और हरपाल सिंह पाला को चार-चार साल की कैद और 40-40 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।