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गुलजार सिंह सुसाइड केस: हाईकोर्ट का सवाल-मंत्री को आरोपी कैसे बनाया जा सकता है? सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब

Wed, 16 Sep 2026 01:11 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 16 Sep 2026 01:11 PM IST
सार

दिड़बा की पुलिस उपाधीक्षक रुपिंदर कौर बाजवा ने बताया कि कोर्ट ने दो मुख्य बातें कही हैं। पहला, अदालत ने मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। दूसरा, यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जांच पूरी तरह से उचित तरीके से हो।

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Gulzar Singh suicide case High Court seeks status report from Punjab government orders impartial probe
गुलजार सिंह सुसाइड केस में हाईकोर्ट का आदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संगरूर में मजदूर गुलजार सिंह की मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मामले में आरोपी बनाए जाने के आधार पर सवाल उठाया।

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अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि आखिर मंत्री को इस मामले में आरोपी कैसे बनाया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने मामले में नोटिस जारी करने से इनकार करते हुए पंजाब सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने और जांच उचित तरीके से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
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गुलजार सिंह की आत्महत्या के संबंध में जिला संगरूर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत दर्ज की गई है। धारा 108 पुराने भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के अनुरूप है।
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मामले को लेकर दायर जनहित याचिका में जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो या राज्य से बाहर की किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि गुलजार सिंह ने मौत से कुछ समय पहले कथित तौर पर एक वीडियो बनाया था। इसमें उसने इलाके में नशीले पदार्थों, विशेष रूप से सिंथेटिक नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए थे।

वीडियो में मंत्री का नाम लेने का दावा
याचिकाकर्ता के अनुसार, गुलजार सिंह ने अपने कथित वीडियो बयान में अपनी मौत के लिए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा सहित कुछ स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि प्राथमिकी में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है, लेकिन वीडियो में लगाए गए आरोपों और उसमें एक बड़े राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति के संदर्भ की जांच में उचित तरीके से पड़ताल नहीं की गई।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने इसी आधार पर जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की। इस पर मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मौखिक रूप से सवाल किया कि मंत्री को इस मामले में आरोपी कैसे बनाया जा सकता है।


अदालत ने फिलहाल मामले में नोटिस जारी नहीं किया। साथ ही पंजाब सरकार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मामले की उचित जांच की जाए। मामला रविंदर सिंह बनाम पंजाब सरकार के नाम से दर्ज है।

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